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फरेबी बेटा गिरफ्तार, बाप अब भी फरार
अनिल त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Sat, 19 Oct 2013 10:05 AM IST
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पहले तो जालसाज ने बेटों की मदद से हेराफेरी कर एक शख्स की तीस बीघा जमीन बेच डाली और जब जेल जाने की नौबत आई तो साजिश रच एक मंदबुद्धि को भिजवा दिया।
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अपने मकसद में वे कामयाब होने के बाद आरोपी निश्चिंत हो चला लेकिन जेल गए शख्स की बीमारी से हुई मौत ने सारे राज को बेपर्दा कर दिया।
करीब सवा चार साल बाद इस मामले में मुकदमा दर्ज हुआ लेकिन आरोपी वजीरगंज कोतवाली पुलिस की गिरफ्त में आने से बचते रहे।
शुक्रवार को आखिरकार जालसाज का एक बेटा पुलिस के हत्थे चढ़ा। अफसरों व कानून की आंखों में धूल झोंकने वाली यह कहानी भले ही किसी फिल्मी पटकथा जैसे लगे पर आशियाना के रजनीखंड 7/153 निवासी जुगुल किशोर तिवारी ने बेहद शातिराना अंदाज में इसे अंजाम दे दिया।
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पहले तो जुगुल किशोर ने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर कूटरचित दस्तावेज के जरिये इटौंजा क्षेत्र के कुनौरा गांव में चौक के राजाबाजार के एक व्यवसायी की तकरीबन तीस बीघा जमीन बेच डाली।
इंस्पेक्टर वजीरगंज अभिनव सिंह पुंडीर के मुताबिक मामला पकड़ में आने पर जालसाज जुगुल किशोर एवं उसके फर्जीवाड़े में शामिल अन्य आरोपियों केखिलाफ रिपोर्ट दर्ज हुई। पेशी पर न जाने के चलते जुगुल किशोर के खिलाफ न्यायालय से गैर जमानती वारंट जारी हुआ।
जुगुल किशोर न्यायालय में हाजिर न होकर अपने नाम से वजीरगंज के मुर्गखाना मसकगंज निवासी मंदबुद्धि कमलकांत मिश्र को 12 दिसंबर 2008 को न्यायालय में हाजिर करवा दिया।
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कमलकांत को जेल भेज दिया गया। जुगुल किशोर ने कमलकांत की बीवी को मदद का भरोसा देकर अपने यहां रख लिया।
कमलकांत जेल में बीमार रहने लगा तो जेल प्रशासन ने उसकी बीवी को पत्र भेजा कि बलरामपुर अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है। उसे खून की जरूरत है। मगर गीता अस्पताल नहीं गई। 28 मार्च 2009 को कमलकांत ने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
वहीं, कमलकांत से अलग रह रहे भाई व रेलवे में टेक्नीशियन विमलकांत ने अपने भाई के बारे में जानकारी करनी शुरू की तो पता चला कि वह जेल में हैं।
जब वह जेल पहुंचा, तो उसकी मौत की खबर मिली, उसके बाद विमलकांत सच्चाई पता करने के लिए जुट गया।
विमल की मानें तो उसकी भाभी के साथ मिलकर जालसाज जुगुल किशोर व उसके बेटों ने सारा कुचक्र रचा। यही नहीं आरोपियों ने जालसाजी कर कमलकांत का शव जेल प्रशासन से हासिल कर अंतिम संस्कार कर दिया।
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उधर, भाई की मौत का राज सामने आने के बाद विमलकांत ने वजीरगंज कोतवाली में 21 जुलाई 2013 को जुगुल किशोर तिवारी, उसके बेटे शिव सागर तिवारी उर्फ राकेश उर्फ राम सहाय, पवन तिवारी व देवेंद्र तिवारी उर्फ गोलू के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कमलकांत मिश्र की मौत को छिपाने की नीयत से साजिश रचकर जेल से शव हासिल करने, गलत तरीके से पंचायतनामा भरकर कमलकांत के परिवार की जानकारी के बिना उसकी पहचान खत्म करने की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
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