फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Police cracks Gauri Srivastav murder case

जानिए पुलिस कैसे पहुंची गौरी के कातिल तक

Mon, 09 Feb 2015 01:23 PM IST
Updated Mon, 09 Feb 2015 01:23 PM IST
विज्ञापन
 Police cracks Gauri Srivastav murder case

कानून की छात्रा गौरी श्रीवास्तव हत्याकांड के खुलासे में पुलिस की थ्योरी को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। वहीं पुलिस दावा कर रही है कि यह खुलासा उसके लिए कैसे टफ जॉब था। वह कैसे कड़ियों को जोड़ते हुए हत्यारे तक पहुंची। पर सवाल उठता है कि सीसीटीवी फुटेज व अन्य माध्यमों से गौरी का मूवमेंट पाथ ट्रेस होने के बावजूद कातिल तक पहुंचने में आखिर हफ्ते भर का वक्त क्यों लगा?

विज्ञापन


एसएसपी यशस्वी यादव देरी के सवाल पर कहते हैं कि हिमांशु प्रजापति की गौरी श्रीवास्तव से वॉट्सएप पर चैटिंग होती थी। दोनों आपस में कॉल करके बात नहीं करते थे। इसके चलते गौरी के मोबाइल की कॉल डिटेल में उसका नंबर ट्रेस नहीं किया जा सका। इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से सिर्फ गौरी के मोबाइल का लोकेशन ट्रेस करके कातिल का सुराग लगाया जा रहा था।
विज्ञापन


वह 1 फरवरी को दोपहर 1:32 से 3.02 बजे तक मॉडल हाउस इलाके में रही। उसी शाम 6:58 से 7:28 बजे तक यानी आधा घंटा तेलीबाग में शारदा नहर के पास और 7:35 से 7:42 तक यानी सात मिनट ईको पार्क के पास का लोकेशन मिला। मॉडल हाउस इलाके में डेढ़ घंटे का लोकेशन खटकने वाला था। इस पर वॉट्सएप का ब्यौरा लेने के लिए संबंधित कंपनी से संपर्क किया गया लेकिन ब्यौरा नहीं मिला। इसमें काफी वक्त लग गया।

विज्ञापन
विज्ञापन

प्रदर्शन ने बढ़ाई परेशानी

 Police cracks Gauri Srivastav murder case

एसएसपी के मुताबिक गौरी की सहेली व दोस्तों ने पूछताछ में बताया था कि गौरी की रोहित नामक युवक से दोस्ती थी। पिता शिशिर ने भी इसकी पुष्टि की। पुलिस ने गौरी का फेसबुक अकाउंट खंगाला लेकिन रोहित नहीं मिला, न ही कॉल डिटेल में उसका नंबर था। हिमांशु के हत्थे चढ़ने पर पता चला कि गौरी उसे रोहित के नाम से जानती थी और उसने भी गौरी का नंबर आलोक नाम से सेव किया था।

एसएसपी ने कहा कि वॉट्सएप कंपनी के ब्यौरा उपलब्ध न कराने पर उन्होंने साइबर क्राइम व सर्विलांस सेल को इंटरनेट लॉग एनॉलिसिस के आदेश दिए। दरअसल, कॉल डिटेल से गौरी का लोकेशन उन्हीं स्थानों का ट्रेस हो रहा था, जहां उसके नंबर पर किसी ने बात की या एसएमएस आया, जबकि इंटरनेट लॉग एनॉलिसिस से साफ हुआ कि गौरी किन टॉवरों के नेटवर्क के संपर्क में रही थी।

एसएसपी यशस्वी यादव ने डीजीपी व अन्य अफसरों की मौजूदगी में कहा कि गौरी हत्याकांड को लेकर आंदोलन, प्रदर्शन व आक्रोश ने भी पुलिस का काफी वक्त जाया किया, जबकि यह ऐसी वारदात थी जिसकी न तो पुलिस को पहले भनक लग सकती थी। गौरी खुद दोस्त के साथ गई। वहां बौखलाए दोस्त ने हत्या कर दी, किसी को भनक नहीं लगी। इस वारदात का खुलासा करना पुलिस के लिए चुनौती था।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें हर राज्य और शहर से जुड़ी क्राइम समाचार की
ब्रेकिंग अपडेट।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed