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मर्सिडीज से चलते थे व फाइव स्टार में मीटिंग करते थे ठग, धरे गए

Fri, 14 Aug 2015 12:55 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ Updated Fri, 14 Aug 2015 12:55 AM IST
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Police arrested smoothies.

बीमा पॉलिसी के नाम पर राजधानी के सैकड़ों लोगों से करीब 200 करोड़ रुपये ठगने वाले वीकेयर लाइफ मल्टी ट्रेड प्राइवेट कंपनी के संचालक पी. सागर उर्फ परमानंद रोदियाल और सपा नेता दिनेश कुमार यादव को बुधवार दोपहर क्राइम ब्रांच की टीम ने दबोच लिया।

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क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह ने बताया कि उत्तराखंड के चमोली कर्णप्रयाग निवासी पी. सागर ने 2009 में हुसैनगंज चौराहा पर 22 सदस्यों के साथ कंपनी का ऑफिस शुरू किया था। करीब दो साल काम करने के बाद ऑफिस कृष्णानगर के सिंधुनगर में शिफ्ट हो गया। अगस्त 2012 में कंपनी बंद करके संचालक भाग गए।
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कंपनी के संचालकों पर कृष्णानगर, आशियाना, हुसैनगंज, पारा सहित कई थानों में धोखाधड़ी और ठगी की लगभग 70 एफआईआर दर्ज हैं। पुलिस आशियाना के सेक्टर के निवासी कंपनी की सीईओ मधुमिता कौर, उनके पति व डायरेक्टर गुरुजीत सिंह, प्रेम प्रकाश सिंह को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है।
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ठगी की कमाई से खोली मैप लाइफ रियल एस्टेट कंपनी
ठगी की कमाई से पी. सागर उर्फ परमानंद ने मैप लाइफ नाम की रियल एस्टेट कंपनी खोल ली थी। मैप लाइफ कंपनी का ऑफिस एलडीए कॉलोनी कानपुर रोड स्थित बारा कॉम्प्लेक्स में है।

वीकेयर कंपनी की ठगी के शिकार पारा के बुद्धेश्वर विहार कॉलोनी निवासी कप्तान सिंह बीते महीने किसी काम से एलडीए कॉलोनी गए थे जहां पी. सागर और वीकेयर कंपनी के कर्मचारियों को देखा, तब इसका खुलासा हुआ।

इस तरह लोगों को फंसाते थे जाल में

Police arrested smoothies.

कंपनी के संचालक मर्सिडीज से चलते थे और फाइव स्टार होटलों में मीटिंग करते थे। इंस्पेक्टर सत्येंद्र सिंह ने बताया कि कंपनी के कर्मचारी फोन करके लोगों को बिजनेस में पैसा लगाने का ऑफर देते थे।

जाल में फंसने वालों को फाइव स्टार होटल में बुलाकर मीटिंग की जाती थी। इसमें लोगों को बिजनेस के प्लान समझाए जाते थे। शानो-शौकत और तड़क-भड़क वाली जिंदगी के सपने दिखाए जाते थे। इससे प्रभावित होकर लोग रकम लगा देते थे।

21000 जमा करने पर एक साल में देते थे 32,000
ठगी के शिकार लोगों ने बताया कि कंपनी प्रोडक्ट नाम की एक पॉलिसी बेचती थी, जिसमें 21,000 रुपये जमा करने वालों को एक साल बाद 32,000 रुपये लौटाए जाते थे। कंपनी की मेन पॉलिसी की अवधि 15 साल थी। इसमें 30,000 रुपये प्रतिवर्ष जमा कराए जाते थे। ग्राहकों को एक साल पैसा देना होता था। अगले दो साल कंपनी खुद पैसा जमा करती थी।

15 साल तक इसी तरह रुपया जमा करने पर ग्राहक को साढ़े चार लाख रुपये दिए जाते थे। इनमें करोड़ों रुपया जमा करके कंपनी ने बोरिया-बिस्तर समेट लिया।

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