मां गिड़गिड़ाती रही, डॉक्टर अगूंठा लगवाते रहे!
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हसनगंज इलाके के घोसियाना बंधा रोड पर शनिवार शाम करीब चार बजे इंटर के छात्र विजय प्रशांत तिवारी (18) को बदमाशों ने पीछे से गोली मार दी। खून से लथपथ छात्र काफी देर तक सड़क पर पड़ा रहा।
बाद में सूचना पर पहुंची पुलिस ने उसे ट्रॉमा सेंटर पहुंचाया, जहां इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया। विजय नेशनल शूटिंग प्रतियोगिताओं में पांच गोल्ड मैडल जीत चुकी अंशिका तिवारी का भाई था। परिवार ने एक वकील, बिल्डर व पूर्व सभासद पर हत्या का आरोप लगाया है।
हालांकि पुलिस प्रेम प्रसंग को भी लेकर मामले की तफ्तीश कर रही है। हसनगंज इलाके के ही शिवनगर निवासी विजय इंटर की प्राइवेट पढ़ाई कर रहा था। सीओ महानगर विशाल पांडे ने बताया कि विजय की मां गीता का आरोप है कि मकान के बगल में ही उनका एक हजार स्क्वायर फीट का प्लॉट है।
इलाके में ही रहने वाले वकील राजकुमार, बिल्डर कय्यूब और पूर्व सभासद कुमकुम चौधरी ने फर्जी कागजात बनवाकर प्लॉट पर कब्जा कर लिया है। दो साल पहले भी प्लॉट पर कब्जे को लेकर मारपीट हुई थी। सीओ ने बताया कि तब गीता की तरफ से हसनगंज कोतवाली में शिकायत भी की गई थी।
गीता ने तीनों पर बेटे को गोली मारने का आरोप लगाया है। हालांकि, विजय को गोली मारने वालों को किसी ने देखा नहीं है। आसपास के लोगों से पूछताछ की जा रही है।
कुछ यूं गिड़गिड़ा रही थी विजय की मां
‘मेरे बच्चे का इलाज करो डॉक्टर साहब। उसकी हालत बिगड़ रही है।’ आंसुओं में डूबी आंखें लेकर गीता ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों के सामने गिड़गिड़ा रही थी।गोली से घायल उसके बेटे विजय के शरीर की तड़प धीरे-धीरे कम हो रही थी। लेकिन डॉक्टर कागजी खानापूरी में लगे थे। ‘यहां अंगूठा लगाइए। एक और। हां, अब इधर साइन कीजिए।’
डॉक्टर जैसा कहते, मजबूर गीता कांपते हाथों से जल्दी-जल्दी वैसा ही करती। उसकी जान तो बेटे में अटकी थी। वह बार-बार बेटे की तरफ देखती। डॉक्टरों के हाथ जोड़कर बोली, प्लीज बचा लीजिए। जवाब मिला, ‘अरे पुलिस केस है। लिखापढ़ी तो करनी ही पड़ेगी। इसके बाद ही इलाज शुरू होगा।’
डॉक्टरों की कुछ ऐसी ही संवेदनहीनता शनिवार देर शाम ट्रॉमा सेंटर पर देखने को मिली। पुलिस भी एक तरफ मूक दर्शक बनी खड़ी थी। आखिर जब तक विजय का उपचार शुरू हुआ, गोली अपना असर दिखा चुकी थी।
कुछ ही देर में विजय का शरीर शांत हो गया। गीता ने कहा कि वह बेटे को लेकर आई तो डॉक्टर 15 मिनट तक अंगूठा लगवाते और साइन करवाते रहे। इस दौरान बेटे के सिर्फ ऑक्सीजन लगाई गई।
...तो बच जाती बेटे की जान
अगर तुरंत उसका उपचार शुरू हो जाता तो शायद जान बच जाती। बेटे की डूबती हुई आंखें याद कर गीता बार-बार बेसुध हो रही थीं। वह पछाड़ खाकर रोती तो बेटी अंशिका और परिवारीजन उसे संभालते। गीता ने कहा कि पति शाहजहांपुर में हैं। वह अकेली थी। बेटे को लेकर ट्रॉमा सेंटर पहुंची तो समझ नहीं आ रहा था कि क्या करना है।
साथ आई पुलिस ने भी कोई मदद नहीं की। कहां जाना है? क्या करना है? किससे मिलना है? अगर यह पता होता तो शायद कुछ वक्त बच जाता और बेटा जिंदा होता। आईपीएल में सट्टेबाजी को लेकर विजय प्रकाश तिवारी का दोस्तों से झगड़ा हुआ था। मामा ओमकार शास्त्री ने यह जानकारी दी। मुहल्ले में भी इस झगड़े की काफी चर्चा रही। इलाकाई लोगों ने बताया कि इस झगड़े के बाद से विजय के परिवारीजनों ने उसका घर से निकलना काफी कम कर दिया था।
वह सिर्फ दूध लेने और अलीगंज के सेक्टर क्यू में कोचिंग पढ़ने के लिए ही निकलता था। पुलिस विजय के दोस्तों पर भी शक जता रही है। विजय को घेरकर फायरिंग की गई थी। इलाके में दो फायर होने की चर्चा है।
इलाकाई लोगों के मुताबिक एक फायर हुआ तो विजय ने भागने की कोशिश की। इसके बाद दूसरी गोली चलाई जो उसकी पीठ के बायीं तरफ लगी। गोली लगते ही विजय गिर गया जबकि हमलावर भाग निकले। पुलिस ने बताया कि जिस जगह विजय को गोली मारी गई, वहां से उसका घर मात्र 500 मीटर की दूरी पर था।