पढ़िए,किस तरह से चुराई जाती हैं आपकी खास गाड़ियां
काले रंग की कार चाहिए या सफेद,मॉडल नया या पुराना। महिंद्रा स्कॉपियो,टाटा सफारी या फिर कोई भी स्पोर्ट्स यूटीलिटी व्हीकल (एसयूवी)चल जाएगी। कुछ इसी तरह के सवाल पूछने के बाद ऑन डिमांड लग्जरी गाड़ियां चोरी करने वाले गिरोह के तीन सदस्य गाजीपुर क्षेत्र में पुलिस के हत्थे चढ़ गए।
गिरोह के सदस्य गाड़ियां चुराने के बाद रक्सौल, बिहार के रास्ते सीधे नेपाल तक डिलीवरी भी कर आते थे।सीओ गाजीपुर दिनेश पुरी ने बताया कि कई दिनों से गाजीपुर,इंदिरानगर और आसपास के क्षेत्रों में लग्जरी गाड़ी चोरी होने की शिकायतें मिल रही थीं।
इसी मामले में एसओ गाजीपुर देवेंद्र दुबे,सब इंस्पेक्टर नूरुल हुदा खान,भरत कुमार,कांस्टेबल अभय कुमार सिंह,नरेंद्र बहादुर मिश्रा,आलोक पांडेय को गिरोह के बारे में महत्वपूर्ण सूचना मिली।
इसके बाद पुलिस ने गाजीपुर क्षेत्र में घेराबंदी करके तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया। उनकी पहचान उत्तराखंड में ऊधमसिंह नगर के सुभाष नगर काशीपुर निवासी जितेंद्र चौधरी,राजपाल सिंह और सुल्तानपुर के बल्दीराय स्थित गांव फूलपुर निवासी मो.माबूद सिद्दीकी के रूप में हुई।
इस होशियारी से गाड़ी चोरी करते थे
उनके पास से चोरी की एक टाटा सफारी,वाहन चोरी में इस्तेमाल होने वाले उपकरण,ब्लैंक आरसी,गाड़ियों की नंबर प्लेट,मुहरें,इंक पैड बरामद हुए हैं। पूछताछ में जितेंद्र व राजपाल ने बताया कि गिरोह का सरगना निजामुद्दीन उर्फ मामा नेपाल में है।
निजामुद्दीन उन्हें बताता था कि उन्हें किस रंग की और किस मॉडल की गाड़ी चोरी करनी है। ऑर्डर मिलने के बाद वह लोग सफारी गाड़ी से ही लखनऊ आते थे और यहां पर सस्ते लॉज व रेस्टोरेंट में कमरा लेकर टिक जाते थे।
इसके बाद प्रमुख चौराहों व रास्तों पर खड़े होकर डिमांड के अनुसार गाड़ियां छांट लेते थे। कार का पीछा करते हुए कार मालिक के घर तक पहुंच जाते थे। रात में कार अगर घर के बाहर खड़ी मिली तो फिर उसे चोरी करके सीधे नेपाल निकल जाते थे।
पूरे देश में फैला है इनका नेटवर्क
एसओ गाजीपुर देवेंद्र दुबे ने बताया कि इस गिरोह का नेटवर्क पूरे देश में फैला है। उत्तराखंड में भी इस गिरोह के कई सदस्यों के बारे में जानकारी मिली है।
लखनऊ में उन्होंने चार जून को पीजीआई क्षेत्र से सूमो और सात जुलाई को गोमतीनगर क्षेत्र से बोलेरो गाड़ी, 23 अप्रैल को सी ब्लॉक में पानी टंकी के पास टवेरा और नौ अप्रैल को इंदिरानगर से टाटा सफारी कार चोरी करने की बात बताई है।
गिरोह के सदस्य पहले से ही गाड़ियों की चाभी बना लेते थे। वे लोग पार्किंग या फिर मार्केट में कार के बगल में अपनी कार खड़ी कर देते थे। इसके बाद गिरोह का एक सदस्य चुपके से लॉक का सैंपल ले लेता था और इससे चाभी बन जाती थी।