एलडीए: सबसे बड़े भूखंड घोटाले की जांच दफन, रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर किया था फर्जीवाड़ा, ये है पूरा मामला
एलडीए के पूर्व वीसी अभिषेक प्रकाश के सामने तत्कालीन कंप्यूटर सेक्शन प्रभारी एसबी भटनागर ने 50 भूखंड की सूची रखी थी। आरोप था कि किसी ने उनकी आईडी से इनके रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की। साइबर सेल के प्रभारी एसीपी विवेक रंजन को जांच सौंपी गई, जिसमें तत्कालीन संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने सहयोग किया।
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एलडीए में कंप्यूटर रिकॉर्ड से छेड़छाड़ कर भूखंड आवंटन में फर्जीवाड़ा कर किए गए अब तक के सबसे बड़े घोटाले की जांच को प्राधिकरण और पुलिस ने फाइलों में दफन कर दिया। एलडीए अफसरों ने शुरुआती जांच के बाद एफआईआर करा अपनी जिम्मेदारी की इतिश्री कर ली तो पुलिस को पांच महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी प्राधिकरण से जरूरी रिकॉर्ड ही नहीं मिल पाए हैं। ऐसे में फर्जीवाड़ा करने वाले अब भी सजा से दूर हैं।
एलडीए के पूर्व वीसी अभिषेक प्रकाश के सामने तत्कालीन कंप्यूटर सेक्शन प्रभारी एसबी भटनागर ने 50 भूखंड की सूची रखी थी। आरोप था कि किसी ने उनकी आईडी से इनके रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की। साइबर सेल के प्रभारी एसीपी विवेक रंजन को जांच सौंपी गई, जिसमें तत्कालीन संयुक्त सचिव ऋतु सुहास ने सहयोग किया। कंप्यूटर रिकॉर्ड व सर्वर के डाटा की जांच में 498 प्रकरण सामने आए।
अभिषेक प्रकाश के आदेश पर तत्कालीन तहसीलदार राजेश शुक्ला ने कार्यदायी संस्था डीजीटेक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ अजीत मित्तल और सर्विस इंजीनियर दीपक मिश्रा व अन्य पर एफआईआर कराई। इसके बाद जांच गोमतीनगर पुलिस और साइबर सेल को चली गई। 12 फरवरी को एफआईआर के बाद आज तक जिम्मेदारों पर कार्रवाई नहीं हो सकी। एलडीए की लचर पैरवी से भी जांच नहीं बढ़ सकी। मामले में और कौन जिम्मेदार हैं, उन्हें भी चिह्नित नहीं किया जा सका।
नौ भवनों में भी ठप कार्रवाई
फरवरी में इस प्रकरण के सामने आने से पहले गोमतीनगर के वास्तुखंड के नौ भवन में भी रिकॉर्ड में फर्जीवाड़ा कर आवंटन का मामला मिला। यह प्रकरण भी कंप्यूटर रिकॉर्ड में छेड़छाड़ जैसा है। पुलिस इसकी भी जांच कर रही है। इसमें एलडीए ने बाबू अजय प्रताप वर्मा के खिलाफ एफआईआर कराई।
मिलीभगत से हुआ था फर्जीवाड़ा
शुरुआती जांच में सामने आया कि निजी कंपनी ने एलडीए के सर्वर पर मौजूद डाटा का अवैध तरीके से लोगों को फायदा पहुंचाने में इस्तेमाल किया। इसमें एलडीए के कंप्यूटर सेक्शन के अधिकारी, कर्मचारी भी शामिल थे। एसीपी साइबर सेल से आगे जांच करने को कहा गया। कर्मचारियों ने सर्वर का दुरुपयोग कर मूल आवंटियों के नाम बदलकर फर्जी नामों से दस्तावेज तैयार किए। इससे प्राधिकरण को करोड़ों का नुकसान हुआ और उसकी छवि भी खराब हुई।
जानकीपुरम योजना को भी पीछे छोड़ा
एलडीए में सबसे बड़ा भूखंड आवंटन में घोटाला जानकीपुरम योजना में हुआ था। सीबीआई जांच में 413 भूखंड की फाइलें एलडीए से गायब मिलीं, जबकि 139 में ही गड़बड़ी पकड़ी जा सकी। वहीं, इस प्रकरण में आंकड़ा 498 पहुंच चुका है। इसके बाद भी कूड़े से लेकर बंद अलमारियों तक में गायब फाइलें मिल रही हैं।
मुख्य आरोपी हो चुके सेवानिवृत्त
प्रकरण में एलडीए के मुख्य आरोप एसबी भटनागर अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं। प्राधिकरण ने उन्हें चार्जशीट दी। यह जांच भी अधूरी है। सेवानिवृत्ति के बाद के उनके भुगतान एलडीए ने रोके हैं।
एलडीए पूरी कर चुका जांच
एलडीए सचिव पवन गंगवार का कहना है कि एलडीए की विभागीय जांच पूरी हो चुकी है। एफआईआर भी कराई जा चुकी है। पुलिस से लगातार बातचीत कर विधिक कार्रवाई के लिए कहा जा रहा है। एलडीए के सर्वर में एंट्री के समय आईपी एड्रेस सुरक्षित किए जाने जैसे कदम उठाए गए हैं, जिससे आगे फर्जीवाड़ा न हो।
पूरे रिकॉर्ड आज तक नहीं मिले
लखनऊ पुलिस के जांच अधिकारी उमेश सिंह का कहना है कि एलडीए से जांच पूरी करने के लिए कुछ रिकॉर्ड मांगे गए थे, जो अभी तक उपलब्ध नहीं कराए गए। जब तक रिकॉर्ड नहीं मिलेंगे, पुलिस जांच कैसे पूरी कर सकती है।
सर्वर की फॉरेंसिंक जांच जरूरी
एसीपी साइबर क्राइम विवेक रंजन का कहना है कि एलडीए के साथ शुरुआती जांच पूरी हो चुकी है। जो तथ्य सामने आए हैं उनकी सच्चाई के प्रमाणन के लिए सर्वर की फॉरेंसिक जांच होना जरूरी है। यह शुरू कराने के लिए कार्रवाई की जा रही है। फॉरेंसिक जांच में सभी दोषी सामने आ जाएंगे।