{"_id":"fceb4c855a9cf866106d01b8a3d50734","slug":"killer-in-jel","type":"story","status":"publish","title_hn":"हां भाई ‘मामा’ बोल रहा हूं, लखनऊ के क्या मिजाज हैं...","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
हां भाई ‘मामा’ बोल रहा हूं, लखनऊ के क्या मिजाज हैं...
अनिल त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Fri, 11 Oct 2013 06:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हां भाई ‘मामा’ बोल रहा हूं, लखनऊ के क्या मिजाज हैं? माज हत्याकांड में पुलिस का क्या रूख है? अपना नाम आ रहा है कि नहीं? पुलिस पर बराबर नजर रखना। मुझे पुलिस की हर हरकत की खबर चाहिए।
विज्ञापन
सेलफोन पर कुछ इसी अंदाज में माज हत्याकांड का फरार आरोपी राकेश कुमार सोनी उर्फ मामा लगातार जानकारी ले रहा था। इलाहाबाद के नैनी जेल में बंद होने के बावजूद धड़ल्ले से फोन पर अपने लोगों के संपर्क में था।
विज्ञापन
सर्विलांस से मिली इस जानकारी के बाद क्राइम ब्रांच के होश उड़ गए। पूरे मामले का खुलासा करने के साथ ही जेल में बंद फरार आरोपी के कॉल डिटेल का ब्योरा जेल प्रशासन को सौंपा।
विज्ञापन
जानकारी होते ही जेल प्रशासन ने छापेमारी कर बैरक से मोबाइल फोन बरामद कर लिया है। साथ ही मामले की विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।
क्राइम ब्रांच के एएसपी रवींदर सिंह के अनुसार नैनी जेल में बंद होने के बावजूद राकेश दो माह से लगातार सेलफोन का प्रयोग करता रहा। इस दौरान खासतौर पर लखनऊ में दो लोगों को तीन से चार बार फोन कर हालचाल लेता था।
इसके अलावा इलाहाबाद, वाराणसी और सतना में भी बात कर रहा था। इतना ही नहीं कई बिल्डर व व्यापारियों को रंगदारी के लिए धमका रहा था।
एएसपी क्राइम के कॉल डिटेल देते ही जेल प्रशासन सन्न रह गया। आननफानन ‘पगली घंटी’ के जरिए अफसरों व बंदीरक्षकों को एकत्र कर सघन चेकिंग कराई। इस दौरान राकेश के बैरक से सेलफोन बरामद हुआ।
इसके बाद राकेश को तन्हाई बैरक में स्थानांतरित कर दिया गया। क्राइम ब्रांच के अनुसार राकेश जेल से ही गैंग आपरेट कर रहा है।
भाड़े पर हत्या कराने में महारत रखने वाले राकेश ने मध्य प्रदेश, यूपी के इलाहाबाद, वाराणसी व लखनऊ में कई वारदात को अंजाम दिया है। उसके खिलाफ कई मुकदमे भी पंजीकृत हैं।
सुनियोजित तो नहीं गिरफ्तारी
राकेश की गिरफ्तारी कहीं सुनियोजित तरीके से तो नहीं हुई। दरअसल, सूबे की राजधानी के बहुचर्चित माज हत्याकांड में पुलिस ताबड़तोड़ छापेमारी कर आरोपियों की तलाश कर रही थी।
इस दौरान ‘मामा’ का नाम भी सामने आया। मगर, पुलिस को उसके बारे में कोई सुराग नहीं मिले। इस बीच पुलिस से बचता फिर रहा राकेश जीआरपी इलाहाबाद के हत्थे चढ़ गया।
पुलिस सूत्रों का कहना है कि, राकेश खतरनाक अपराधी है। चोरी के आरोप में उसका जेल जाना गले नहीं उतर रहा। ऐसे में आशंका है कि उसने जानबूझ कर खुद को गिरफ्तार कराया है।