प्रेमी ने ही आरी से किए थे गौरी के छह टुकड़े
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आखिरकार एक हफ्ते बाद पुलिस ने कानून की छात्रा गौरी श्रीवास्तव के हत्यारे को ढूंढ निकाला। पुलिस का दावा है कि गौरी की हत्या उसके प्रेमी तेलीबाग के रमजाननगर निवासी हिमांशु प्रजापति ने अपने ही घर में की।
हिमांशु ने पहले तो उसका गला दबाया जिससे वह बेहोश या कोमा में चली गई। इसके बाद अकेले ही आरी से उसके छह टुकड़े कर दिए। पुलिस के अनुसार गौरी के मोबाइल फोन में कुछ लड़कों के नंबर और फोटो देखकर हिमांशु बौखला गया था। इसी बौखलाहट में उसने इस दिल दहला देने वाली वारदात को अंजाम दिया।
पुलिस लाइन सभागार में इस हत्याकांड का खुलासा करते हुए डीजीपी ए के जैन ने बताया कि अशोक नगर से गौरी को अपनी बाइक पर बैठाकर ले जाने वाला युवक हिमांशु उर्फ रोहित ही था।
हिमांशु और उसके दोस्त अनुज गौतम को रविवार तड़के गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि हत्या में अनुज की भूमिका को लेकर तफ्तीश की जा रही है।
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से गौरी का मोबाइल, वारदात में इस्तेमाल बाइक, हेलमेट, जैकेट, वाइपर व खून से सनी आरी बरामद की है। पुलिस के अनुसार गौरी और हिमांशु की पहचान एक दोस्त ने करीब डेढ़ साल पहले कराई थी। इसके बाद से ही दोनों में वाट्सएप पर चैटिंग होती थी।
बीकॉम का स्टूडेंट है आरोपी
हिमांशु राजस्थान के एक विश्वविद्यालय में बीकॉम द्वितीय वर्ष का प्राइवेट छात्र है और एसएससी की तैयारी कर रहा था। उसके पिता रामप्रताप प्रजापति कैंट के एक अस्पताल में सफाईकर्मी हैं।
परिवारीजन बाहर थे तो गौरी को बुलाया
पुलिस के अनुसार हिमांशु के घर वाले मुंबई में किसी रिश्तेदारी में चले गए तो उसने एक फरवरी को वाट्सएप से चैटिंग करके गौरी को अपने घर आने के लिए राजी किया। इसके बाद लाटूश रोड पहुंचा।
वहां से गौरी को बाइक पर बैठाकर अशोक नगर से बांसमंडी चौराहा के रास्ते चारबाग ले गया। डेढ़ घंटे मॉडल हाउस इलाके में घूमने के बाद दोपहर करीब तीन बजे दोनों रमजाननगर अपने घर पहुंचा।
फोन में फोटो देखकर भड़का, दबा दिया गला
घर पर उसने गौरी से उसका मोबाइल मांगा। थोड़ी ना-नुकुर के बाद उसने मोबाइल का लॉक खोलकर उसे दे दिया। मोबाइल में कुछ तस्वीरें और लड़कों के नंबर देखकर वह अपना आपा खो बैठा और गुस्से में उसका गला दबा दिया। इससे गौरी की सांस व नब्ज बंद हो गई।
बाजार से खरीदी आरी और पॉलीथिन
डीजीपी ने बताया कि हिमांशु इससे घबरा गया और घर पर बाहर से ताला लगाकर बाजार चला गया और आरी, पॉलीथिन बैग आदि खरीदकर घर पहुंचा।
छह टुकड़े किए, बैग में टुकड़े भरे
डीजीपी के मुताबिक, हिमांशु ने कुबूला कि उसने गौरी के शव के छह टुकड़े किए। काटने से पहले उसके कपड़े नाली में ठूंसे ताकि खून बाहर तक न बहे। टुकड़ों को तीन बैग में भरा। फर्श पर फैला खून साफ किया। जिस बैग में पैर का टुकड़ा रखा, उसमें उसके कपड़े भरे।
पहले जायजा लिया फिर रात में फेंका शव
इसके बाद वह बाइक लेकर घर से निकला। दोस्त अनुज के साथ शराब पी और इलाके के माहौल का जायजा लिया। इसके बाद घर से गौरी के पैर व कपड़ों वाला बैग लेकर बाइक से शहीद पथ की तरफ फेंक आया। इसके बाद दो अन्य बैग बारी-बारी ठिकाने लगाए।
हत्यारे तक कैसे पहुंची पुलिस
एसएसपी यशस्वी यादव ने बताया कि अशोक नगर और लाटूस रोड पर लगे सीसीटीवी कैमरे से गौरी के बाइक सवार के साथ जाने की पुष्टि हुई। फिर गौरी के मोबाइल के लोकेशन के आधार पर तेलीबाग इलाके में घेरा कसा गया। कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए पुलिस टीम हिमांशु के घर जा पहुंची।
वहां सीसीटीवी में नजर आई बाइक दिखने पर घर की तलाशी ली। गौरी का मोबाइल बरामद होने पर पुलिस ने कड़ाई दिखी तो हिमांशु ने जुर्म कुबूल लिया। उसने अनुज का नाम भी उगला।
‘मारने से पहले बनाए थे शारीरिक संबंध’
जानकारी के मुताबिक, हिंमाशु ने गौरी को तेलीबाग स्थित अपने घर पर मारने से पहले उसके साथ सेक्स भी किया था। उस समय हिमांशु नशे में था। हिमांशु के घर पर दोनों में लड़ाई भी हुई। उसके बाद हिमांशु ने गौरी को घर पर रखी एक आरी से जिंदा ही काट डाला।
चौंकाने वाली बात है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कुछ सूचनाएं गलत साबित हो गईं। हिमांशु ने एक साधारण सी आरी से गौरी को काटा था। फिर गौरी के शरीर के हिस्सों को पैक करके बाइक पर टांग कर लेकर गया। गौरी के सभी हिस्सों को हिमांशु ने अलग-अलग जगहों पर फेंका ताकि किसी को शक ना हो।
हिमांशु के साथ इस मर्डर में उसके तीन और दोस्त भी शामिल थे। तीन बार में गौरी की बॉडी को ठिकाने लगाया गया। हिमांशु और गौरी पहले से ही एक दूसरे को जानते थे और दोनों फिजिकल रिलेशन भी थे।
पढ़िए, गौरी के हत्यारे की साइकोलॉजी
गौरी हत्याकांड के खुलासे के बाद डीजीपी की प्रेस कांफ्रेंस में गौरी के हत्यारे के नाम के साथ ही कई चौंकाने वाली बातों पर से पर्दा उठा। इस प्रेस कांफ्रेंस में एसएसपी यशस्वी यादव ने बताया कि जब हत्यारे हिमांशु को पुलिस ने अपनी गिरफ्त में लिया तो उसके मोबाइल ने उसकी मनोस्थिति को साफ कर दिया।
हिमांशु प्रजापति अपने मोबाइल पर मोहनलालगंज में हुए गैंगरेप और हत्याकांड की वीभत्स तस्वीरों को देख रहा था। हिमांशु कहीं न कहीं उन तस्वीरों में खुद को ढूंढ रहा था। इसके अलावा हिमांशु बैंक पीओ और पुलिस सब इंस्पेक्टर की तैयारी कर रहा था।
हिमांशु प्रजापति 23 साल का है और वो जोधपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से पत्राचार से ग्रेजुएशन कर रहा था। हिमांशु के मोबाइल को देखकर पता चला कि उसकी कई महिला मित्र थी। वो शराब और नशे का आदी था। हिमांशु के मोबाइल पर गौरी की कई तस्वीरें भी पुलिस को मिली। गौरी का मोबाइल फोन भी पुलिस को हिमांशु प्रजापति के घर से बरामद हुआ।