{"_id":"a95a2eb6f0ca78af250d945614d98bad","slug":"girl-commits-suicide-4","type":"story","status":"publish","title_hn":"वह बनना चाहती थी आईएएस, पर किस्मत ने लिखी कुछ और दास्तां","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
वह बनना चाहती थी आईएएस, पर किस्मत ने लिखी कुछ और दास्तां
लखनऊ/इंटरनेट डेस्क
Updated Sun, 01 Sep 2013 10:17 AM IST
विज्ञापन
कृष्णानगर क्षेत्र में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रही छात्रा ने
विज्ञापन
असफलता के डर से फांसी लगा ली।
शनिवार सुबह कमरे में पहुंची मां ने बेटी को फंदे पर लटकते देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। कृष्णानगर के वीर सावरकर नगर बरिगवां निवासी शंकर प्रसाद आरपीएफ में हेड कांस्टेबल हैं।
परिवार में पत्नी आशादेवी, बेटा रवींद्र, बहू किरन है। बड़ी बेटी सुनीता की शादी हो चुकी है। जबकि छोटी कंचनलता (20) नवयुग कन्या महाविद्यालय से बीए कर रही थी। जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात शंकर ड्यूटी पर चला गया।
इसके बाद परिवार के लोग अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। कंचन भी अपने कमरे में चली गई, भतीजा असंग भी उसके साथ था। शनिवार सुबह असंग को स्कूल भेजने के लिए आशा देवी जगाने पहुंचीं।
आवाज देने और खटखटाने पर भी दरवाजा न खुलने पर खिड़की से झांका। अंदर बेटी को साड़ी के सहारे फंदे पर लटकते देखी चीख निकल गई। भाई रवींद्र ने किसी तरह दरवाजा तोड़ा। इस बीच शंकर भी पहुंच गया और पुलिस को सूचना दी।
शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। उधर, शंकर के अनुसार बेटी एसएससी व बैंक की परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी।
साथ ही आईएएस बनने का सपना था, जिसके लिए वह तैयारी कर रही थी। हालांकि, असफलता के डर से डिप्रेशन में आ गई थी। परिवार के लोग उसे बराबर प्रोत्साहित भी करते थे।
भाई रवींद्र ने बताया कि कंचन हमेशा प्रथम श्रेणी में पास होती थी। वह पढ़ने में काफी अच्छी थी और आईएएस बनने की ठानी थी। इसी के चलते बीए की पढ़ाई के साथ ही उसने तैयारी भी शुरू कर दी थी
शनिवार सुबह कमरे में पहुंची मां ने बेटी को फंदे पर लटकते देखा। सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। कृष्णानगर के वीर सावरकर नगर बरिगवां निवासी शंकर प्रसाद आरपीएफ में हेड कांस्टेबल हैं।
परिवार में पत्नी आशादेवी, बेटा रवींद्र, बहू किरन है। बड़ी बेटी सुनीता की शादी हो चुकी है। जबकि छोटी कंचनलता (20) नवयुग कन्या महाविद्यालय से बीए कर रही थी। जानकारी के अनुसार शुक्रवार रात शंकर ड्यूटी पर चला गया।
इसके बाद परिवार के लोग अपने-अपने कमरे में सोने चले गए। कंचन भी अपने कमरे में चली गई, भतीजा असंग भी उसके साथ था। शनिवार सुबह असंग को स्कूल भेजने के लिए आशा देवी जगाने पहुंचीं।
आवाज देने और खटखटाने पर भी दरवाजा न खुलने पर खिड़की से झांका। अंदर बेटी को साड़ी के सहारे फंदे पर लटकते देखी चीख निकल गई। भाई रवींद्र ने किसी तरह दरवाजा तोड़ा। इस बीच शंकर भी पहुंच गया और पुलिस को सूचना दी।
शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है। उधर, शंकर के अनुसार बेटी एसएससी व बैंक की परीक्षाओं की तैयारी कर रही थी।
साथ ही आईएएस बनने का सपना था, जिसके लिए वह तैयारी कर रही थी। हालांकि, असफलता के डर से डिप्रेशन में आ गई थी। परिवार के लोग उसे बराबर प्रोत्साहित भी करते थे।
भाई रवींद्र ने बताया कि कंचन हमेशा प्रथम श्रेणी में पास होती थी। वह पढ़ने में काफी अच्छी थी और आईएएस बनने की ठानी थी। इसी के चलते बीए की पढ़ाई के साथ ही उसने तैयारी भी शुरू कर दी थी