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यूपीटीयू के नाम पर 806 करोड़ का फर्जी ठेका

Sat, 05 Apr 2014 08:14 AM IST
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ
आशीष कुमार त्रिवेदी/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 05 Apr 2014 08:14 AM IST
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frogery on the name of uptu

यूपीटीयू में वीसी की ओर से 810 करोड़ रुपये के निर्माण का फर्जी ठेका जारी कर दिया गया। महाराष्ट्र की पारिख कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और प्रकाश कंस्ट्रोवेल लिमिटेड को यह ठेका दिया गया।

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दोनों कंपनियों ने ठेके की जो फाइल यूपीटीयू को उपलब्ध करवाई है उसमें प्रमुख सचिव प्राविधिक शिक्षा से लेकर यूपीटीयू के कुलपति, रजिस्ट्रार और वित्त अधिकारी तक के फर्जी हस्ताक्षर हैं।
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यही नहीं कंपनी को निर्माण कार्य करने के लिए पहली किश्त के रूप में 23.52 करोड़ रुपये का फर्जी चेक भी जारी कर दिया गया। यूपीटीयू प्रशासन ने जानकीपुरम थाने में मामले की एफआईआर दर्ज करवा दी है।
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वहीं, कुलपति ने मामले की जांच के लिए एडीजी विजलेंस एम मोदी को भी पत्र लिखा है। इसी के साथ यूपीटीयू प्रशासन ने वित्त अधिकारी वीरेंद्र चौबे और प्रतिकुलपति दिवाकर सिंह यादव को भी जांच की जिम्मेदारी सौंपी है।

यूपीटीयू के इस फर्जी निर्माण ठेके का फर्जी अनुबंध 13 अगस्त 2013 को किया गया था, जिसमें 42 महीने में काम पूरा करने को कहा गया था।

यह ठेका महाराष्ट्र की कंपनी पारिख कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और प्रकाश कंस्टोवेल लिमिटेड के साथ पूर्ववर्ती गौतम बुद्ध प्राविधिक विश्वविद्यालय (जीबीटीयू) के नाम पर किया गया है। जीबीटीयू अब उप्र. प्राविधिक विश्वविद्यालय (यूपीटीयू) के नाम से जाना जाता है।

अनुबंध में जानकीपुरम विस्तार में बन रहे यूपीटीयू के कैंपस के लिए 800 करोड़ रुपये का फर्जी ठेका और कमला नेहरू इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (केएनआईटी) सुल्तानपुर में हॉस्टल की बिल्डिंग बनाने के लिए 6.31 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया।

इसमें कंपनी को 12.5 प्रतिशत सेंटेज चार्ज के रूप में और बकाया 87.5 प्रतिशत का भुगतान निर्माण कार्य होने के बाद देने की बात कही गई है।

फर्जीवाड़ा करने वाले इतनी सफाई से कागज तैयार किए थे कि कोई भी झांसे में आ जाए। यह सारा फर्जीवाड़ा तब पकड़ में आया जब कुलपति डॉ. आरके खांडल के नाम पर vc@uptu.ac.in से ई-मेल भेजा गया।

यह ई-मेल यूपीटीयू के सर्वर की बजाय दूसरे सर्वर से भेजा गया था। मामले का खुलासा होने के बाद यूपीटीयू के कुलपति डॉ. आरके खांडल ने एडीजी विजलेंस एम मोदी को पत्र लिखकर इस मामले की जांच करने का अनुरोध किया है।

उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि सीनियर अधिकारियों के फर्जी हस्ताक्षर कर कंाट्रेक्ट दिया गया है। सूत्रों की मानें तो इस रिपोर्ट में वित्त विभाग से जुड़े रहे एक पूर्व अधिकारी का नाम सामने आ रहा है।

यूपीटीयू के विजया बैंक के खाते के जिस चेक नंबर 374404 पर 23.52 करोड़ रुपये का एकाउंट पेई चेक जारी किया गया है वह असल में पहले करीब तीन हजार के भुगतान के लिए विभाग से जारी किया गया था।

उसी चेक की डुप्लीकेट कॉपी तैयार कर पारिख कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड को बीते 3 मार्च 2014 को जारी किया गया। यूपीटीयू प्रशासन का कहना है कि इस चेक नंबर की जांच हुई तो यह खुलासा हुआ है।

वहीं एक अन्य आईटीजीएस खाते में करीब 50 लाख रुपये होने का मामला भी सामने आ रहा है। यूपीटीयू में हाई प्रोफाइल फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद अब कैश लेस भुगतान की व्यवस्था कर दी गई है।


सिर्फ 50 हजार रुपये तक के  भुगतान चेक से होंगे। इसके ऊपर का भुगतान बैंक ड्राफ्ट से किया जाएगा। यूपीटीयू प्रशासन ने शुक्रवार को हुई वित्त समिति की आपात बैठक में यह निर्णय लिया। साथ ही यह भी फैसला किया गया कि आगे से ई-ट्रांजेक्शन किया जाए।

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