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इस ठग ने थानेदारों को बनाया अपना शिकार
संजय त्रिपाठी/लखनऊ
Updated Sat, 12 Oct 2013 10:56 AM IST
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हाईप्रोफाइल लोगों के फोन नंबरों का इस्तेमाल कर ठगने का एक और मामला सामने आया है। खुद को डीआईजी बताकर ठग ने थानेदारों से ही मोटी रकम वसूली ली।
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अब साइबर क्राइम सेल जांच में जुटी है। कुछ ही दिन पहले आईएएस बनकर लाखों की ठगी करने वाला गैंग पकड़ा गया था। इसमें आठ लोग गिरफ्तार किए गए थे।
सूत्रों के मुताबिक राजधानी के एक थानेदार के सीयूजी नंबर पर एक अफसर के सीयूजी नंबर से कॉल करके दो लाख रुपये तुरंत खाते में जमा करने को कहा गया।
हुक्म देने वाले शख्स ने खुद को एक डीआईजी बताया, जबकि कॉल में इस्तेमाल नंबर पीपीएस अफसर का था।
मातहत अफसर के नंबर से कॉल करके बड़े अधिकारी के रकम जमा करने के आदेश से इंस्पेक्टर का माथा ठनका।
उसने रकम की व्यवस्था के लिए कुछ समय की मोहलत मांगने के साथ फोन डिस्कनेक्ट किया और संबंधित डीआईजी का सीयूजी नंबर डायल करके बात की।
डीआईजी अपने नाम से दो लाख की मांग की बात सुनकर हैरत में पड़ गए। वहीं हुक्म देने वाले व्यक्ति व डीआईजी की आवाज में अंतर से इंस्पेक्टर ने भी माजरा भांप लिया। उसने आला अफसरों को मामले की जानकारी दी।
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मुरादाबाद में तो ठग हो गया कामयाब
छानबीन के दौरान पता चला कि मुरादाबाद के एक कमाऊ थाने में तैनात इंस्पेक्टर को कॉल करके दो लाख रुपये ठगे जा चुके हैं।
वहां भी एक डीआईजी के नाम से कॉल करके रकम एक खाते में जमा करने का आदेश दिया गया था। ईमानदार छवि के डीआईजी का नाम सुनकर इंस्पेक्टर ने समझा कि खास जरूरत पर साहब ने आदेश दिया है।
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इस पर रुपये जमा कर दिए। आला अफसरों के नाम से सीयूजी नंबर से थानेदारों को कॉल करके ठगी की बात से पूरा महकमा सन्न है। स्पूफिंग कॉल की जांच साइबर क्राइम सेल को सौंपी गई है।
सकते में हैं थानेदार
थानेदार को रोजाना ही अफसरों की छोटी-मोटी बेगार करनी पड़ती है। किसी के लिए होटल का कमरा बुक कराना तो किसी के खातिर गाड़ी की व्यवस्था करनी।
कोई सामान घर पहुंचाने का आदेश देता है तो कोई किसी अन्य काम का। मोबाइल के स्क्रीन पर अफसर का सीयूजी नंबर नजर आने पर थानेदार कॉल रिसीव करने के साथ ‘जयहिंद सर, आदेश करें, सर-सर-सर’ बोलते हैं।
वह आवाज पहचानने की जरूरत नहीं समझते। यही वजह है कि मुरादाबाद के इंस्पेक्टर ने आदेश सुनकर रकम जमा कर दी।
यह बात अलग है कि राजधानी में तैनात इंस्पेक्टर का माथा ठनक गया और मामले की जांच शुरू हुई। सूत्रों का कहना है कि छिटपुट रकम कई थानेदारों से ऐंठी जा चुकी है।
ऐसी होती है स्पूफिंग कॉल
एक विशेष वेब आधारित एप्लीकेशन की मदद से ऐसी कॉल की जाती हैं। इसमें कॉल करने के लिए किसी दूसरे के नंबर इस्तेमाल किया जा सकता है।
जालसाज इसी का फायदा उठाते हैं। कॉल रिसीव करने वाले के स्क्रीन पर जो नंबर देखता है जबकि उससे कॉल नहीं की गई होती है।