लालबत्ती वाली मिलिट्री कार में ठाठ से घूमता था जालसाज
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खुद को खुफिया एजेंसी रिसर्च एंड एनॉलिसिस विंग (रॉ) का ऑफिसर बताने वाले एक जालसाज को कोतवाली पुलिस ने बृहस्पतिवार को दबोच लिया।
उसके साथ तीन और लोगों को गिरफ्तार किया गया है। ये लोग उसके पीआरओ, ड्राइवर और चपरासी बनकर साथ चलते थे। जालसाज की सफेद रंग की इंडिगो कार पर लालबत्ती, हूटर लगा था और उस पर मिलिट्री का नंबर लगा था।
कार को भी पुलिस ने जब्त कर लिया है। उसके पास से लैपटॉप, तीन मोबाइल फोन, वीडियो कैमरा, बेसिक फोन, अशोक की लाट लगी मोहरें, रॉ के आई कार्ड और कुछ प्रतिबंधित स्थानों के फोटो समेत तमाम सामान मिला है।
पुलिस, क्राइम ब्रांच, आईबी, एमआई समेत कई खुफिया एजेंसियों के अफसरों ने अलग-अलग उससे पूछताछ की। पूछताछ जारी है।
एसएसपी के. सुनील इमैनुएल ने गुरुवार को कोतवाली में इस फर्जी रॉ ऑफिसर और उसके तीन साथियों की गिरफ्तारी का खुलासा किया।
कंट्रोल रूम तक पहुंच गया फर्जी अफसर
एसएसपी ने बताया कि सफेद रंग की इंडिगो कार बुधवार देर शाम पुलिस कंट्रोल रूम पहुंची। कार में फ्लैश वाली लालबत्ती, हूटर लगा था।
कार से चार लोग उतरे और कंट्रोल रूम में दाखिल हुए। युवक खुद को रॉ ऑफिसर बताते हुए अंदर दाखिल हो गया। चारों युवक कंट्रोल रूम में ऑपरेटर से बड़ी स्क्रीन पर बड़ा चौराहा का सीन दिखाने को कहा।
ऑपरेटर ने इसकी सूचना एसपी पूर्वी प्रभाकर चौधरी को दी। थोड़ी देर बाद एसपी पूर्वी कंट्रोल रूम पहुंचे और खुद को रॉ ऑफिसर बता रहे शख्स से बातचीत की।
उसने खुद को 2006 बैच का आईआरएस अफसर आशुतोष त्रिपाठी उर्फ अखिल बताया। कहा कि प्रतिनियुक्ति पर वह इस समय रॉ में तैनात है।
वह कानपुर में खास मिशन पर काम कर रहा है। शक होने पर एसपी ने एसएसपी से मोबाइल पर उसकी बात कराई। एसएसपी ने उसे अपने कैंप ऑफिस बुलाया।
इसी बीच एसएसपी ने रॉ और सेल्स टैक्स, इनकम टैक्स, एक्साइज समेत रेवेन्यू से जुड़े विभागों के अफसरों से आशुतोष के बारे में जानकारी जुटा ली।