बेहद शातिर हैं ये जालसाज, एटीएम कार्ड की क्लोनिंग कर 50 करोड़ से अधिक उड़ाए, चार धरे गए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एटीएम कार्ड का क्लोन तैयार कर उत्तर प्रदेश व अन्य राज्यों के लोगों के बैंक खातों से रकम उड़ाने वाले चार जालसाज मंगलवार को हजरतगंज पुलिस व साइबर सेल के हत्थे चढ़े हैं। पुलिस के मुताबिक अपराधियों ने लोगों के खातों से करीब 50 करोड़ से अधिक रुपये उड़ाए हैं।
गिरोह ने कुबूला है कि क्लोनिंग के लिए वे बैंक ऑफ बड़ौदा के चपरासी से ब्लैंक कार्ड खरीदते थे। पुलिस ने 22 ब्लैंक एटीएम कार्ड, 18 क्लोन एटीएम कार्ड, लैपटॉप, मिनी डी एक्स स्कीमर मशीन, दो कार व कैश बरामद किया है। चारों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया।
एएसपी पूर्वी सर्वेश मिश्रा ने बताया कि एटीएम कार्ड की क्लोनिंग की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। एसएसपी के निर्देश पर मामले की जांच शुरू हुई तो गिरोह का पर्दाफाश हुआ। हत्थे चढ़े जालसाजों में गांडा के टीकारा निवासी अनिल कुमार वर्मा, गोंडा माधवपुर का शुभम पांडेय, बनकसिया का अमित सिंह और लखनऊ डालीगंज निवासी हसन शाह शामिल हैं।
इस गिरोह ने राजधानी के 11 मामलों में हाथ होने की बात स्वीकार की है। इसमें ज्यादातर मामले महानगर कोतवाली के हैं। जालसाजों ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेन्द्र पांडेय की नौकरानी के खाते से भी 70 हजार रुपये एटीएम क्लोन कर निकाले जाने की बात स्वीकार की है।
जालसाजों ने कुबूल किया : बैंक ऑफ बड़ौदा से 50 रुपये में खरीदते थे ब्लैंक एटीएम
सीओ अभय मिश्रा ने बताया कि जालसाजों ने कुबूल किया कि उनके निशाने पर सबसे अधिक बैंक ऑफ बड़ौदा के एटीएम होते थे। इस बैंक का एक चपरासी उनको ब्लैंक एटीएम उपलब्ध कराता था। इसके लिए वह प्रतिकार्ड 50 रुपये लेता था। एक साथ 10 से 20 की संख्या में वह ब्लैंक एटीएम उपलब्ध कराता था। चपरासी गोंडा की मुख्य शाखा में तैनात है। पुलिस ने इस संबंध में बैंक अधिकारियों को जानकारी दी है। वही चपरासी को भी हिरासत में लेने की तैयारी चल रही है।
पहले मदद के बहाने कार्ड बदलते, फिर ऐसे तैयार करते क्लोनिंग
भीड़भाड़ वाले इलाकों के एटीएम पर ऐसे लोगों को शिकार बनाते थे, जो कार्ड का प्रयोग सही से नहीं कर पाते थे। मदद के बहाने उनके कार्ड बदल देते थे और क्लोन तैयार करते थे। सीओ ने बताया कि जालसाज एटीएम बूथ पर जाने के बाद अपना कार्ड उल्टा डाल देते थे। ऐसा कई बार करने पर मशीन कुछ देर काम करना बंद कर देती थी। इस बीच कोई आता तो मशीन खराब होने के बहाने उसकी मदद करते और एटीएम कार्ड बदल देते थे। तुरंत ही स्वाइप मशीन से डेटा चुरा लेते। कुछ समय बाद कार्ड मशीन में डालते तो काम कर जाता।
पासवार्ड चोरी से देख लेते और पॉकेट डायरी में नोट कर लेते थे, साथ ही इसे याद रखने को लिख लेते थे एटीएम नंबर के अंतिम चार अंक। इसके बाद लैपटॉप व मिनी टूल्स के जरिए आंकड़े को कॉपी कर सेव कर लेते। इसके बाद मिनी डी एक्स स्कीमर मशीन व राइटर मशीन से जोड़कर ब्लैंक कार्ड में पूरा डेटा फीड कर क्लोन एटीएम कार्ड तैयार कर लेते थे।
हड़पी रकम से खड़ा कर लिया एम्पायर
ये भी हुआ बरामद: एक कार शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के सगे भतीजे की
साइबर सेल के प्रभारी अरुण कुमार सिंह व विजय वीर सिंह सिरोही ने बताया कि गिरोह के पास से एटीएम कार्ड के अलावा एक लैपटॉप, तीन मिनी डी एक्स स्कीमर मशीन, एक राइटर मय डाटा केबिल, दो एम-स्वाइप मशीन, 15 हजार कैश, दो कारें बरामद हुई हैं। एक कार उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन के सगे भतीजे की है।
ये भी हुआ बरामद
- 22 ब्लैंक एटीएम बरामद
- 18 क्लोन एटीएम भी मिले