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चपरासी अशरफी लाल ने तो गुरुजी को भी पढ़ा दिया
विवेक त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 21 Feb 2014 09:35 AM IST
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सचिवालय में नौकरी का झांसा देकर वहीं के चपरासी अशरफी लाल ने हरदोई के उर्दू शिक्षक उस्मान से साढ़े नौ लाख रुपये ठग लिए।
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मंत्रियों और सचिवालय अधिकारियों से करीबी संबंध का झांसा देने वाले अशरफी ने उसे कई दिन अपने साथ सचिवालय में भी बैठाया।
नौकरी की उम्मीद न देख रुपये मांगने पर धमकाते हुए भगा दिया। पीड़ित ने आलमबाग थाना में सचिवालय के चपरासी के खिलाफ ठगी की एफआईआर लिखाई है।
हरदोई के विहानी थाना क्षेत्र के मोहसिनपुरवा निवासी उस्मान निगोहां के नीयतनगर स्थित एक मदरसे में पढ़ाते थे।
करीब दो वर्ष पहले मोहनलालगंज में उनकी सुनील नामक युवक से मुलाकात हुई।
बातचीत के दौरान उसने सचिवालय में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। बातों में आए उस्मान ने 80,000 रुपये दे दिए। इसके बाद कॉल लेटर के लिए महीनों दौड़ाता रहा।
जून 2013 में नौकरी का मामला सचिवालय के चपरासी अशरफी लाल के पास होने की बात कही और आलमबाग के गढ़ी कनौरा निवासी अशरफी से मिलाया।
इसके बाद अशरफी ने सचिवालय प्रशासन के अलावा पीडब्ल्यूडी, ग्राम पंचायत में नौकरी का झांसा देकर वसूली शुरू कर दी।
नौकरी के लालच में उस्मान किसी तरह व्यवस्था कर उसे रुपये देता रहा। धीरे-धीरे साढ़े नौ लाख रुपये दे दिए। यहां तक कि नौकरी के लालच में मदरसे में पढ़ाना भी छोड़ दिया। करीब छह महीने तक अशरफी ने ड्यूटी के दौरान उसे अपने साथ सचिवालय में भी रखा।
काफी समय बीतने के बावजूद उम्मीद न देख उसने रुपये मांगना शुरू कर दिया।
इस पर अशरफी ने मिलना तो दूर फोन तक उठाना बंद कर दिया। आरोप है कि रुपया लौटाने का दबाव डालने पर धमकाना शुरू कर दिया। ठगे जाने का अहसास होने पर अशरफी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है।
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ठगों का सेफ हाउस बना सचिवालय
सचिवालय ठगों के लिए सेफ हाउस बन गया है। यहां घुसपैठ कर ठगों ने लाखों के वारे-न्यारे किए।
बीते वर्ष सितंबर में मो.साहिल उर्फ निस्सू व उसका गैंग पुलिस के हत्थे चढ़ा थ। जबकि कई ठग ऐसे हैं जिन्होंने लाखों रुपये इधर से उधर किए,लेकिन पुलिस उन तक नहीं पहुंच सकी है।
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करीब एक वर्ष पूर्व फर्जी समीक्षा अधिकारी अंबेडकरनगर के हरीश चंद्र पांडे ने भी नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी का मामला पकड़ा गया था। पांडे के पास सचिवालय का पास मिला था जो उसने सचिवालय के अफसरों व कर्मचारियों की मिलीभगत से बनवाया था।
पास बनवाने में तत्कालीन मुख्य स्वागताधिकारी केशव प्रसाद का नाम आया। पुलिस अब तक उनसे पूछताछ की हिम्मत नहीं जुटा सकी है।
दिसंबर में सपा सुप्रीमो के करीबी फर्रुखाबाद के डलमंजन सिंह यादव के रिश्तेदारों को सचिवालय में नौकरी का झांसा देकर 20 लाख रुपये ठग लिए गए थे।