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आखिर गौरी की जांघों पर कैसे आई खरोंच

Thu, 12 Feb 2015 01:17 PM IST
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ
अमित यादव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Thu, 12 Feb 2015 01:17 PM IST
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Follow up of Gauri Srivastav murder case.

गौरी की हत्या में दूसरे हथियार के इस्तेमाल से इन्कार नहीं किया जा सकता है। इसकी आशंका पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पैदा हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गले के घाव को ‘शार्प एंड क्लियर कट’ के रूप में परिभाषित किया गया है। इसका मतलब है कि किसी तेज धारदार हथियार से काटा गया।

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जबकि हाथ और पैरों के घाव के बारे ‘लेसिरेटेड शार्प मार्जिन’ परिभाषित किया गया है। इस घाव को अन्य हथियार के कारण हुआ माना जा रहा है। इसी के आधार पर पुलिस ने आरी से काटने की थ्योरी को आगे बढ़ाया और हत्याकांड का खुलासा कर दिया। हालांकि, गले को धारदार हथियार से काटने की बात ने खुलासे पर सवालिया निशान लगा दिया है।
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गौरी हत्याकांड के पुलिसिया खुलासे पर सवालिया निशान लग रहे हैं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में घाव दो तरह के बताए गए हैं। जो अलग-अलग हथियारों के कारण बने। अगर पोस्टमार्टम रिपोर्ट को आधार बनाया जाए तो आरोपी ने पहले धारदार हथियार का इस्तेमाल किया। सिर को काटने के बाद गले पर जो घाव मिले हैं वो गौरी की मौत के पहले के हैं।
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ये घाव ‘शार्प क्लियर कट’ रिपोर्ट किए गए हैं। गर्दन को काटते समय हथियार गौरी की थुड्डी (चिन) को भी छूता हुआ गया है। इससे वहां भी हल्का सा छिलने का घाव है। घाव की वजह से उसकी सी-3 वर्टिब्रा भी कटी। ये घाव कान से छह इंच नीचे हैं।

जांघों पर कैसे बने खरोंच के निशान

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पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर और गले पर खून के थक्के जमे होने की भी बात कही गई है। जबकि हाथ को काटने से जो घाव बने हैं उनके लिए पोस्टमार्टम में ‘लेसिरेटेड शार्प मार्जिन’ रिपोर्ट किया गया है। ये घाव किसी अन्य हथियार से काटने के हैं। हाथों को काटने के दौरान धड़ में कहीं भी और घाव नहीं पाया गया।

इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि हाथों को पहले फैला लिया गया, इसके बाद काटा गया। इसी तरह पैरों को जांघ के पास से काटा गया। ये घाव सीधा न होकर तिरछा है। जैसे किसी पौधे की डाल की कलम लगाने के लिए काटा जाता है।

पोस्टमार्टम विशेषज्ञ भी आरोपी के इस व्यवहार से हैरान हैं कि किस तरह उसने शरीर के एक-एक अंग को अलग किया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में वेजाइना में किसी तरह की चोट न होने की बात लिखी गई है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गौरी की दोनों जांघों पर खरोंच के निशान मिले हैं। इसे ‘मल्टीपल इनसाइज वुंड’ बताया गया है। इसका मतलब धारदार हथियार से हुए घाव हैं। इस रिपोर्ट से कई विशेषज्ञ चौंक गए हैं। यदि मृत्यु का कारण गले का घाव है तो बाद में जांघों को काटते समय कैसे खरोंचे आईं? क्या जांघ को काटते समय गौरी में कुछ जान बाकी थी। जबकि बाकी पूरे शरीर पर एक भी खरोंच या घाव का नहीं मिला है।

आरी दुकानदार को बनाया सरकारी गवाह

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हत्याकांड में पुलिस अब आरोपी हिमांशु प्रजापति के खिलाफ पुख्ता सुबूत तैयार कर रही है। इसके चलते आरी दुकानदार को बुधवार सुबह पीजीआई थाने में तलब कर तहकीकात की गई। उसे सरकारी गवाह बनाने के लिए एसएसपी के सामने बयान दर्ज किए गए। इसके अलावा हिमांशु को बैग बेचने वाले दुकानदार को भी सरकारी गवाह बनाने की तैयारी है।

एसएसपी यशस्वी यादव ने बताया कि गौरी हत्याकांड के मुख्य आरोपी हिमांशु प्रजापति ने वीडियो कैमरे के सामने जुर्म कुबूलने के साथ बयान दिया था कि उसने एक फरवरी को तेलीबाग क्षेत्र में अपने घर में गौरी की गला दबाकर हत्या की थी और शाम को काका मार्केट के सामने चावला आयरन एवं सीमेंट स्टोर से 50 रुपये में आरी खरीदी थी और उससे गौरी के शरीर के टुकड़े किए थे। इसी तरह टुकड़े ठिकाने लगाने के लिए संजय स्टेशनर्स एंड बुक स्टोर से तीन बैग खरीदे थे।

हिमांशु के बयान की तस्दीक के लिए 8 फरवरी को सुबह 11 बजे पुलिस टीम ने उसी दुकान से वैसी ही आरी खरीदी। हिमांशु के घर से बरामद आरी से मिलान के बाद पुलिस ने दुकानदार पवन चावला से पूछताछ व पुख्ता सुबूत जुटाने के लिए उसकी दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर कब्जे में लिया था।

ली जा रही है विशेषज्ञों की मदद

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हत्याकांड के अहम गवाह पंकज चावला को बुलाकर सुरक्षा के प्रति आश्वस्त करने के साथ बयान दर्ज किए गए हैं। दूसरे दुकानदार को भी सरकारी गवाह के रूप में पेश किया जाएगा।

इसके अलावा पवन चावला की दुकान से सीसीटीवी कैमरे का डीवीआर से एक फरवरी की शाम के फुटेज एकत्र करने के प्रयास किए जा रहे हैं। डीवीआर में सिर्फ एक हफ्ते का बैकअप होने की वजह से एक फरवरी के फुटेज रिकवर कराने विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

पुलिस ने किया परीक्षण
एसएसपी ने बताया कि गौरी का शरीर आरी से काटने के बयान की तस्दीक के लिए पुलिस ने भी उसी दुकान से नई आरी खरीदकर सामान्य व्यक्ति से मृत भैंसा की टांग कटवाकर परीक्षण किया था। उसे काटने में एक मिनट लगा जबकि, महिला की हड्डियां काफी मुलायम होती हैं।

डीएनए टेस्ट की कार्रवाई शुरू
विवेचक को हिमांशु प्रजापति के कब्जे से बरामद आरी, उस पर चिपके बाल और पोस्टमार्टम के बाद सुरक्षित रखे गौरी के अवशेष का डीएनए टेस्ट कराने आदेश दिए गए हैं। रिपोर्ट तैयार करके विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजी जा रही है। आरी पर खून के धब्बे थे और उस पर चिपके बालों को गौरी के रोयें माना जा रहा है।

खुद आईपीएस अफसर भी सहमत नहीं

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राजधानी पुलिस सामान्य आरी से गौरी के शरीर को काटने की बात कह रही है। जबकि, इस थ्योरी से खुद आईपीएस अफसर सहमत नहीं हैं। इसी के चलते आईपीएस अफसर अभिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी व आरटीआई एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर ने पूरे मामले पर कई प्रमुख तथ्यों को उठाया।

उनका कहना है कि पुलिस की तफ्तीश से गौरी के मां-बाप कतई संतुष्ट नहीं हैं। छानबीन के दौरान ठाकुर दंपति ने घटनास्थल की छानबीन के साथ ही आरोपी की बहन डॉली व चावला बंधुओं से भी बातचीत की। पूरी पड़ताल के आधार पर कहा कि पुलिस ने घरवालों को तफ्तीश से पूरी तरह अलग रखा है।

ऐसे में अपनी पड़ताल में सामने आए सभी बिंदुओं पर गहराई से छानबीन की डीजीपी से मांग की है। उन्होंने गौरी के परिवार को विश्वास में लेने और अपराध स्थल से मिले खून के नमूनों से गौरी के खून से मिलान कराने सहित आधुनिक विधि से जांच की मांग उठाई। ठाकुर दंपति ने भ्रम की स्थित खत्म करने के लिए जांच के दौरान सामने आ रहे प्रमाणिक तथ्यों को सार्वजनिक करने की भी बात कही है।

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