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फ्रेंडशिप फ्रॉड में फंसने वाले नहीं पहुंचते पुलिस के पास
अतुल भारद्वाज/अमल उजाला, लखनऊ
Updated Sun, 02 Mar 2014 09:05 AM IST
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दोस्ती के नाम पर फ्रॉड के मामले कई हैं। बदनामी के डर से फ्रॉड का शिकार होने के बाद ज्यादातर लोग चुप बैठ जाते हैं।
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पुलिस के पास जो इक्का-दुक्का मामले पहुंच भी जाते हैं। उन्हें सामान्य तौर पर बैंक के जरिये हुई धोखाधड़ी के तौर पर निबटाया जाता है।
ऐसे मामले साइबर सेल तक नहीं पहुंच पाते। आलम यह है कि दो बरसों में इस तरह का एक भी केस साइबर सेल तक नहीं पहुंचा।
झांसेबाज इसी सबका फायदा उठा रहे हैं। 2012 में खुली साइबर सेल के अफसरों का कहना है कि फ्रेंडशिप के नाम पर होने वाले फ्रॉड की कोई शिकायत उनके पास नहीं आई।
अगर आती तो उस तरह से इसका निस्तारण किया जाता। अफसरों का कहना है कि फ्रेंडशिप के नाम पर हो रहे फ्रॉड का नेटवर्क मोबाइल की मदद से चलता है।
इसका जाल इंटरनेट और अखबारों के क्लासीफाइड विज्ञापनों की शक्ल में फैला हुआ है। 90 प्रतिशत मामलों में बदनामी के डर से शिकायत नहीं होती।