बीवी की नौकरी के लिए रची खुद की हत्या की साजिश, बॉस को फंसाया, खुलासा
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फर्जी गोदनामा के जरिये मृतक आश्रित कोटे में नौकरी हासिल की। पोल खुली और जांच में तेजी आई तो बॉस को फंसाने के लिए खुद के अपहरण की साजिश रच डाली।
कहानी को और पुख्ता करने के लिए अपनी ही हत्या की कहानी गढ़ डाली। तय स्क्रिप्ट पर उसकी शातिर बीवी रोल प्ले करती रही। सरोजनीनगर में मिली गुमनाम लाश को अपने पति का बताते हुए पति के बॉस पर हत्या का आरोप जड़ दिया।
कर्मचारी से लेकर अफसर तक चीखते रहे कि वह जिसे अपने पति की लाश बता रही है, वह किसी दूसरे की है। पर निशाना सटीक बैठा। उसने बीवी के जरिये अपने अफसर को फंसा दिया और बीवी को मृतक आश्रित कोटे में नौकरी दिला दी।
यह सनसनीखेज स्क्रिप्ट किसी मंझे हुए अपराधी ने नहीं बल्कि अलीगंज से पांच महीने पहले गायब पीडब्ल्यूडी के बाबू संजय सिंह ने तैयार की थी। बहरहाल उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जबकि उसकी पत्नी सुषमा की तलाश में दबिश दी जा रही है।
इस तरह पूरी कहानी को दिया अंजाम
एएसपी ट्रांस गोमती दुर्गेश कुमार ने बताया कि सेक्टर एन निवासी संजय पीडब्ल्यूडी फैजाबाद में कनिष्ठ लिपिक पद पर तैनात था। उसका अधिशासी अभियंता सतीश रावत से विवाद चल रहा था।
अधिशासी अभियंता को पुलिस के झमेले में फंसाने और अपनी जगह मृतक आश्रित कोटे में पत्नी को नौकरी दिलाने के लिए साजिश के तहत वह पिछले साल 30 सितंबर को घर से गायब हो गया। पत्नी सुषमा का कहना था कि संजय महाराजगंज के नौतनवां जाने की बात कहकर कार से निकला था।
काफी खोजबीन के बाद भी कुछ पता न लगने पर सुषमा ने पांच अक्तूबर को विकासनगर थाना में अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई। उसने अधिशासी अभियंता सतीश रावत पर अपहरण का आरोप लगाया। इस बीच संजय की कार बहराइच सीमा पर लावारिस खड़ी मिल गई।
...और दूसरे की लाश की पति के रूप में की शिनाख्त
सरोजनीनगर इलाके में 16 अक्तूबर को एक अज्ञात शव मिला जिसकी पहचान सुषमा ने पति संजय के रूप में की। उसने विभागीय अधिकारियों पर अपहरण और हत्या का आरोप लगा सनसनी मचा दी।
सही निशाने पर लगा तीर और बीवी पा गई नौकरी
संजय की मौत की खबर ने अधिशासी अभियंता सतीश रावत व अन्य अधिकारियों के हाथ-पैर फुला दिए। मामला मैनेज करने के लिए उन्होंने आनन-फानन मृतक आश्रित कोटे में सुषमा को नौकरी दिला दी। इस मामले की जांच के दौरान सुषमा के मोबाइल नंबर सर्विलांस पर लिए गए तो साजिश की परतें खुलती चली गईं।
नेपाल में ढाई महीने छिपा रहा, लौटने पर बदला वेश
संजय ने बताया कि पत्नी के साथ अपनी मौत की साजिश रचने के बाद वह बहराइच पहुंचा और लावारिस कार छोड़कर सड़क मार्ग से नेपाल चला गया। वहां ढाई महीने तक वह होटलों और धर्मशालाओं में छिपकर रहता रहा। इस बीच उसकी पत्नी को नौकरी मिल गई।
मामला ठंडा होने पर वह लखनऊ लौट आया और किराये का मकान लेकर रहने लगा। उसने अपनी वेशभूषा और बालों का स्टाइल बदल दिया था। घर से बहुत ही कम निकलता था।
अपना मकान होने के बावजूद किराए के मकान में रहता
इंस्पेक्टर अतुल कुमार तिवारी ने बताया कि छानबीन में खुलासा हुआ कि संजय जिंदा है। किसी को शक न हो इसलिए वह अपना मकान किराए पर उठाकर पत्नी के साथ जानकीपुरम के साठ फिटा रोड स्थित किराये के मकान में रह रहा है।
बृहस्पतिवार रात करीब नौ बजे पुलिस टीम ने संजय के किराये के मकान पर दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। सुषमा उस वक्त घर पर मौजूद नहीं थी। उसकी तलाश में पुलिस टीम पूर्वांचल के जनपदों में भेजी गई हैं।
दुबई में बसाने जा रहा था अपनी नई दुनिया
इंस्पेक्टर ने बताया कि संजय लखनऊ में अपनी संपत्ति बेचकर दुबई में नई दुनिया बसाने की साजिश रच रहा था। उसने फर्जी नाम से पासपोर्ट बनवाने के लिए भी एक दलाल से बातचीत कर ली थी। पुलिस हिरासत में संजय ने बताया कि दुबई में वह नौकरी करता और कुछ समय बाद पत्नी को भी वहीं बुला लेता।
...तो फिर किसका था सरोजनीनगर में मिला शव
संजय की पोल खुलने के बाद सरोजनीनगर में मिला शव पुलिस के लिए सिरदर्द बन गया है। पुलिस मृतक को संजय मानकर कार्रवाई कर चुकी थी। अब मरने वाले शख्स की शिनाख्त पुलिस के लिए मुसीबत से कम नहीं होगी।
एएसपी ट्रांस गोमती ने बताया कि शव 16 अक्तूबर को मिला था जिसे शिनाख्त न होने पर मॉर्च्युरी में रखवा दिया गया था। मृतक के हाथ में जगदीश-सरिता नाम का टैटू बना था। 20 अक्तूबर को सुषमा ने अचानक मॉर्च्युरी पहुंचकर शव की शिनाख्त पति संजय के रूप में की थी।
हालांकि, संजय के भाई अलीगंज निवासी मनोज और बेटे विशाल, राज्यवर्द्धन व कीर्तिवर्द्धन ने शव पहचानने से इन्कार कर दिया था। पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों का भी कहना था कि शव संजय का नहीं है लेकिन सुषमा के आगे किसी की नहीं चली। इस विवाद के चलते पोस्टमॉर्टम छह घंटे विलंब से हुआ था और शव का डीएनए सैंपल सुरक्षित रखा गया था।
चाचा का फर्जी गोदनामा बनवाकर मृतक आश्रित कोटे में पाई थी नौकरी
संजय मूलरूप से उन्नाव के अजगैन चंदेसुआ स्थित नई सराय गांव का है। उसने पिता के दोस्त व पीडब्ल्यूडी के चौकीदार राम अवध मौर्या का दत्तक पुत्र बनकर उनकी जगह पर मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाई थी। उसके पिता राजेंद्र सिंह पीडब्ल्यूडी में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे।
रिटायरमेंट के बाद उनकी मौत हो गई जबकि राम अवध का ड्यूटी के दौरान निधन हुआ था। संजय ने राम अवध का फर्जी गोदनामा बनाकर खुद को दत्तक पुत्र घोषित किया और 1997 में अनुकंपा के आधार पर नौकरी पा ली। उसकी पहली नियुक्ति रायबरेली में हुई थी। कुछ दिन बाद गोंडा और फिर फैजाबाद ट्रांसफर हो गया।
वर्ष 2002 में एक शिकायत के बाद उसका फर्जीवाड़ा खुला और विभागीय जांच शुरू हुई। कई साल तक संजय जांच को मैनेज करता रहा। बीते डेढ़ साल के दौरान जांच में तेजी आई और उसकी नौकरी जाने की नौबत आ गई। बर्खास्ती की तलवार सिर पर लटकते देखकर उसने अपने अपहरण, मौत और पत्नी को नौकरी दिलाने की साजिश रची।
धोखाधड़ी में गोंडा से जेल जा चुके हैं दंपती
संजय और उसकी पत्नी ने फर्जीवाड़े की घटना पहली बार नहीं की है। इससे पूर्व गोंडा की नगर कोतवाली में वर्ष 2008 में दोनों के खिलाफ धोखाधड़ी की धाराओं में एफआईआर दर्ज हुई थी। दोनों को गिरफ्तार करके जेल भी भेजा गया था। फिलहाल दोनों जमानत पर बाहर चल रहे थे।