{"_id":"5b9958e1867a557e824cf5e7","slug":"91536776417-lucknow-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"गोंडा स्कूल गिराने का मामला - कोर्ट ने कहा दोषी अधिकारियों से हो वसूली","category":{"title":"Crime","title_hn":"क्राइम ","slug":"crime"}}
गोंडा स्कूल गिराने का मामला - कोर्ट ने कहा दोषी अधिकारियों से हो वसूली
Updated Thu, 13 Sep 2018 01:06 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
गोंडा में स्कूल की इमारत के विध्वंस का मामला
लखनऊ। गोंडा जिले में एक स्कूल की इमारत को ध्वस्त करे जाने के मामले में हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि अगर सरकारी खर्च से भवन का फिर निमार्ण कराया जाता है तो व्यय होने वाली राशि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों से वसूली जाए।
कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख 25 सितंबर नियत करते हुए गोंडा के डीएम को निर्देश दिए हैं कि इस मामले में की गई कार्रवाई का ब्यौरा हलफनामे के साथ पेश करें।
गोंडा जिले में यह विद्यालय एक सासंद के आवास के समीप है। इसे वहों से हटाने क कोशिश हो रही थी, जिसके तहत विद्यालय भवन को जर्जर ठहराते हुए उसे तोड़ कर दूसरे भूखंड पर निर्माण कराने की कवायद शुरू कर दी गई थी।
विज्ञापन
विद्यालय भवन को गिराने व उसे दूसरे भूखंड पर बनाने के खिलाफ रण प्रताप सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने इसे अनुचित मानते हुए यह आदेश लिए।
अदालत ने इस मामसे में पिछली सुनवाई पर भी विद्यालय भवन को उसके पूर्व स्थान पर बनाए जाने को कहा था। अदालत ने माना था कि निहित कारणों की वजह से षडयंत्र के तहत विद्यालय के भवन को गिराकर उसे अन्यत्र बनाए जाने की साजिश की गई है।
अदालत को राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर यह बताया गया था कि प्रकरण में कार्रवाई की जा रही है। इस पर अदालत कार्रवाई के लिए अतिरिक्त समय देने पर सहमत हो गई।
जिले के डीएम द्वारा अदालत को शपथ पत्र के जरिए बताया गया कि सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना अधिकारी को पत्र भेजकर विद्यालय भवन के निर्माण के लिए जरूरी धन मुहैया कराने का आग्रह किया है।
इस मामले में अदालत ने साफ कहा कि सर्व शिक्षा अभियान केराज्य परियोजना निदेशक द्वारा हासिल हो रहे धन से विद्यालय भवन का निर्माण किया जाए पर न्याय होने वाली सरकारी रकम को भवन ध्वस्त करने के दोषी अधिकारियों से वसूला जाए।
विज्ञापन
लखनऊ। गोंडा जिले में एक स्कूल की इमारत को ध्वस्त करे जाने के मामले में हाई कोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने कहा है कि अगर सरकारी खर्च से भवन का फिर निमार्ण कराया जाता है तो व्यय होने वाली राशि इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों से वसूली जाए।
कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख 25 सितंबर नियत करते हुए गोंडा के डीएम को निर्देश दिए हैं कि इस मामले में की गई कार्रवाई का ब्यौरा हलफनामे के साथ पेश करें।
विज्ञापन
गोंडा जिले में यह विद्यालय एक सासंद के आवास के समीप है। इसे वहों से हटाने क कोशिश हो रही थी, जिसके तहत विद्यालय भवन को जर्जर ठहराते हुए उसे तोड़ कर दूसरे भूखंड पर निर्माण कराने की कवायद शुरू कर दी गई थी।
विज्ञापन
विद्यालय भवन को गिराने व उसे दूसरे भूखंड पर बनाने के खिलाफ रण प्रताप सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विक्रम नाथ व न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान की खंडपीठ ने इसे अनुचित मानते हुए यह आदेश लिए।
अदालत ने इस मामसे में पिछली सुनवाई पर भी विद्यालय भवन को उसके पूर्व स्थान पर बनाए जाने को कहा था। अदालत ने माना था कि निहित कारणों की वजह से षडयंत्र के तहत विद्यालय के भवन को गिराकर उसे अन्यत्र बनाए जाने की साजिश की गई है।
अदालत को राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र दाखिल कर यह बताया गया था कि प्रकरण में कार्रवाई की जा रही है। इस पर अदालत कार्रवाई के लिए अतिरिक्त समय देने पर सहमत हो गई।
जिले के डीएम द्वारा अदालत को शपथ पत्र के जरिए बताया गया कि सर्व शिक्षा अभियान के राज्य परियोजना अधिकारी को पत्र भेजकर विद्यालय भवन के निर्माण के लिए जरूरी धन मुहैया कराने का आग्रह किया है।
इस मामले में अदालत ने साफ कहा कि सर्व शिक्षा अभियान केराज्य परियोजना निदेशक द्वारा हासिल हो रहे धन से विद्यालय भवन का निर्माण किया जाए पर न्याय होने वाली सरकारी रकम को भवन ध्वस्त करने के दोषी अधिकारियों से वसूला जाए।