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केजीएमयू-एसजीपीजीआई में नौकरी का झांसा दे 7.45 लाख रुपये ठगे
Thu, 28 Feb 2019 01:21 AM IST
सौरभ दिक्षित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: सौरभ दिक्षित
Updated Thu, 28 Feb 2019 01:21 AM IST
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पीजीआई थानाक्षेत्र में केजीएमयू और एसजीपीजीआई में नौकरी का झांसा देकर ठगी का मामला सामने आया है। जौनपुर के गौरा बादशाहपुर के उमरी स्थित पौनी गांव निवासी सचिन कुमार तिवारी ने हरदोई के बधौली बभनाखेड़ा में रहने वाले संदीप शुक्ला पर 7.45 लाख रुपये हड़पने का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई है।
प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सरोज ने बताया कि सचिन ने जौनपुर से मैकेनिकल से आईटीआई किया है और फिलहाल एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी कर रहा है। करीब दो साल पहले वह नौकरी की तलाश में लखनऊ आया और यहां वृंदावन योजना में आसरा एन्क्लेव में किराये का कमरा लेकर रहने लगा।
उसके परिचित विनय सिंह ने संदीप शुक्ला से मुलाकात कराई। संदीप भी लखनऊ में रहकर नौकरी की तलाश कर रहा था। दोनों एक साथ ही रहने लगे। इस बीच संदीप ने स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों से सेटिंग करके सचिन को केजीएमयू और एसजीपीजीआई में नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
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उसने सचिन से कुछ रुपये खर्च करने की बात कही, जिस पर वह तैयार हो गया। उसने अपने तीन परिचितों को भी रुपया देकर नौकरी के लिए राजी कर लिया। बकौल सचिन, शातिर ने उससे व अन्य साथियों से कई किस्तों में कुल 7.45 लाख रुपया लिया, लेकिन नौकरी नहीं लगी।
इस बीच पत्नी की डिलीवरी के लिए वह कुछ दिन के लिए गांव चला गया। लखनऊ लौटने पर पता चला कि संदीप शुक्ला कमरे से अपना सामान लेकर भाग गया है। उसने संदीप को ढूंढकर अपना रुपया वापस मांगा तो उसने सौ रुपये के स्टांप पेपर पर दो महीने में रुपया लौटाने की बात लिखकर दी।
हालांकि, इसके बाद उसने सचिन से मिलना और उसकी फोन कॉल रिसीव करना बंद कर दिया। पीड़ित ने क्षेत्राधिकारी कैंट से शिकायत की, जिसकी जांच में मामला सही पाया गया। इसके बाद संदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
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प्रभारी निरीक्षक अशोक कुमार सरोज ने बताया कि सचिन ने जौनपुर से मैकेनिकल से आईटीआई किया है और फिलहाल एक कंस्ट्रक्शन कंपनी में नौकरी कर रहा है। करीब दो साल पहले वह नौकरी की तलाश में लखनऊ आया और यहां वृंदावन योजना में आसरा एन्क्लेव में किराये का कमरा लेकर रहने लगा।
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उसके परिचित विनय सिंह ने संदीप शुक्ला से मुलाकात कराई। संदीप भी लखनऊ में रहकर नौकरी की तलाश कर रहा था। दोनों एक साथ ही रहने लगे। इस बीच संदीप ने स्वास्थ्य विभाग में अधिकारियों से सेटिंग करके सचिन को केजीएमयू और एसजीपीजीआई में नौकरी लगवाने का झांसा दिया।
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उसने सचिन से कुछ रुपये खर्च करने की बात कही, जिस पर वह तैयार हो गया। उसने अपने तीन परिचितों को भी रुपया देकर नौकरी के लिए राजी कर लिया। बकौल सचिन, शातिर ने उससे व अन्य साथियों से कई किस्तों में कुल 7.45 लाख रुपया लिया, लेकिन नौकरी नहीं लगी।
इस बीच पत्नी की डिलीवरी के लिए वह कुछ दिन के लिए गांव चला गया। लखनऊ लौटने पर पता चला कि संदीप शुक्ला कमरे से अपना सामान लेकर भाग गया है। उसने संदीप को ढूंढकर अपना रुपया वापस मांगा तो उसने सौ रुपये के स्टांप पेपर पर दो महीने में रुपया लौटाने की बात लिखकर दी।
हालांकि, इसके बाद उसने सचिन से मिलना और उसकी फोन कॉल रिसीव करना बंद कर दिया। पीड़ित ने क्षेत्राधिकारी कैंट से शिकायत की, जिसकी जांच में मामला सही पाया गया। इसके बाद संदीप के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।