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क्राइम कैपिटल: हर दूसरे दिन हो रहा एक कत्ल

Sat, 07 Dec 2013 12:08 PM IST
संजय त्रिपाठी/लखनऊ
संजय त्रिपाठी/लखनऊ Updated Sat, 07 Dec 2013 12:08 PM IST
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194 murders in 11 months in lucknow

सूबे की राजधानी में अपराधियों के हौसले इस कदर बुलंद हैं कि कत्ल जैसी जघन्य वारदात को अंजाम देने में नहीं हिचक रहे हैं।

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घर में घुसकर तो कभी सरेराह हत्या हो रही हैं। हत्या करके नदी, नहर और बाग में लाशें फेंकी जा रही हैं।

वारदात में किसी के नामजद होने पर तो आसानी से खुलासा हो जाता है लेकिन कातिल के अज्ञात होने पर पुलिस गुत्थी सुलझाने में पिछड़ रही है।

नहीं हो सका खुलासा

बाजार खाला में रिटायर्ड जेलर की पत्नी की हत्या, गुडंबा में रिटायर्ड शिक्षक श्याम सुंदर यादव हत्याकांड, चौक व गोमतीनगर में मासूम बच्चों की दुष्कर्म के बाद हत्या, पानमसाला व्यवसायी सतीश यादव हत्या व लूटकांड, पीजीआई क्षेत्र में रिटायर्ड सूबेदार मेजर देवता सिंह हत्याकांड का खुलासा नहीं हो सका है।

वर्ष 2013 में एक जनवरी से 30 नवंबर तक राजधानी के विभिन्न थानों में हत्या के 111 मामले दर्ज हुए। इनमें एक तेहरा व चार दोहरे हत्याकांड शामिल हैं। यानी 117 हत्या हुई।
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इसके अलावा 21 लोगों की गैर इरादतन हत्या हुई और 56 महिलाएं दहेज की खातिर मौत के घाट उतार दी गईं। यह आंकड़ा पुलिस रिकार्ड में दर्ज मामलों का है।

वाहन की टक्कर या रेलवे ट्रैक पर भी अनेक लोगों की मौत हुई, जिन्हें पुलिस ने एक ही नजर में हादसा करार दे दिया। पड़ताल नहीं की कि वह वास्तव में हादसे का शिकार बने या उन्हें कुचल कर मारा गया था।
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हर दूसरे दिन एक कत्ल

पुलिस के ही आंकड़े माने तो राजधानी में हर दूसरे दिन कत्ल हो रहा है। अपराधी जानते हैं कि कत्ल की सजा मौत या उम्र कैद है। इसके बावजूद वारदात अंजाम देने में नहीं हिचक रहे क्योंकि पुलिस की ढिलाई से अपराधियों में कानून का खौफ खत्म हो चला है।


पुलिस हत्या जैसे अपराध में भी आमतौर पर सच्चाई का पता लगाने के लिए गहन तफ्तीश के बजाय नामजद आरोपियों को जेल भेजने के ढर्रे पर चल रही है।

काकोरी का वीरेंद्र हत्याकांड ताजा मामला है। संपत्ति के झगड़े में मां-बाप ने हत्या करके उसके साले व दोस्त के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।

आरोपी छूटे, मां-बाप को जेल

पुलिस ने भी नामजद आरोपियों को दोषी मान कर ताबड़तोड़ दबिशें दीं और हिरासत में ले लिया। संयोग ही था कि एसएसपी को सच्चाई की भनक लग गई। उनकी सख्त हिदायत पर नामजद आरोपी थाने से छूटे और वीरेंद्र के मां-बाप की गिरफ्तारी हुई।

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