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सीपीएमटी काउंसलिंग से बाहर हुए ये कॉलेज
अमित यादव/लखनऊ
Updated Thu, 31 Oct 2013 12:15 AM IST
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सीपीएमटी-2013 में चयनित छात्र-छात्राएं इस साल सरकारी आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश नहीं ले पाएंगे।
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इस सत्र में चार मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों की सीटों को काउंसिलिंग में शामिल नहीं किया गया है।
यह फैसला 2011 के सत्र में अमान्य आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को प्रवेश देने के लिए किया गया है।
ऐसे में सीपीएमटी में चयनित छात्र-छात्राओं के पास निजी कॉलेजों में प्रवेश लेने का ही विकल्प बचा है।
जेईई एडवांस-2014 का कार्यक्रम हुआ जारी
बरेली, इलाहाबाद, लखनऊ और बांदा के राजकीय आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेजों को 2013-14 सत्र में बीएएमएस पाठ्यक्रम शुरू करने की इजाजत मिली थी।
लेकिन इन चारों ही मेडिकल कॉलेजों की सीटों पर काउंसलिंग नहीं कराई जा रही है।
आयुर्वेद निदेशालय के अधिकारियों का कहना है कि 2011 सत्र में अमान्य आयुर्वेद मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश लेने वाले सभी छात्र-छात्राओं को 2013 बैच में प्रवेश देना है।
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अगर नए को एडमिशन को दे दिया जाता है तो कोर्ट से आदेश होने पर पुराने छात्रों के प्रवेश के लिए सीटें नहीं बचेंगी।
गौरतलब है कि लखनऊ, बांदा, झांसी, पीलीभीत, मुजफ्फरनगर, इलाहाबाद, वाराणसी, बरेली में आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज हैं।
इनमें से झांसी, इलाहाबाद, अतर्रा बांदा, मुजफ्फरनगर और पीलीभीत के मेडिकल कॉलेजों को 2011 से मान्यता नहीं है।
इसके चलते लगभग 200 छात्र-छात्राओं की फर्स्ट प्रोफेशनल की परीक्षा अभी नहीं हो पाई। दो साल से परीक्षा की मांग करते-करते जब वे निराश हो गए तो कोर्ट चले गए।
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आयुर्वेद निदेशालय ने सभी छात्रों को 2013 के सत्र में प्रवेश देने का निर्देश दिया। 2011 बैच से ही एडमिशन की चाहत में वे डबल बेंच की शरण में गए।
अदालत ने शासन से जवाब मांगा गया है और अगली सुनवाई 11 नवंबर को होगी।
निजी कॉलेज नहीं दे रहे 50 फीसदी सीटें
शासन से मेडिकल कॉलेज चलाने की एनओसी लेने वाले प्रबंधक उसे 50 फीसदी सीटें नहीं दे रहे हैं।
यदि निजी कॉलेज शासन को 50 फीसदी सीटें दें दे तो सीपीएमटी से चयनित छात्र-छात्राओं को कुछ राहत मिल सकती है।
लेकिन चिकित्सा शिक्षा और आयुर्वेद निदेशालय में बैठे अधिकारियों की साठगांठ के चलते निजी कॉलेज एक-एक सीट लाखों रुपये में बेच रहे हैं।
हालत ये है कि अधिकारी न तो निजी कॉलेजों से सीपीएमटी से चयनित छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिला पा रहे हैं और न ही उनकी फीस निर्धारण कर रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो सिर्फ धन्वंतरि महाविद्यालय मथुरा ने ही अपनी 50 फीसदी सीटें सीपीएमटी काउंसिलिंग में दी हैं।
जबकि साईं आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज अलीगढ़, वैद्य यज्ञदत्त शर्मा आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज खुर्जा सहित छह अन्य ने सीपीएमटी काउंसिलिंग में 50 फीसदी सीटें भी नहीं दी और अपनी स्वयं की परीक्षा भी करा ली।
इस दौरान शासन और आयुर्वेद विभाग के अधिकारी आंखें मूंदे बैठे रहे। 31 अक्तूबर को बीएएमएस में प्रवेश की अंतिम तिथि है। ऐसे में वो कहीं भी प्रवेश लेने के लायक नहीं रह गए।
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