कनिष्ठ लिपिक भर्ती घोटाले में तत्कालीन सचिव सिंचाई दीपक सिंघल तलब, सुनवाई 16 मार्च को
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वर्ष 2008-09 में सिंचाई विभाग में कनिष्ठ लिपिकों के 282 पदों में नियुक्ति में घोटाला मामले में सीजेएम आनंद प्रकाश सिंह ने तत्कालीन सचिव सिंचाई व जल संसाधन दीपक सिंघल को तलब किया है।
इनके साथ ही तत्कालीन प्रमुख अभियंता (परिकल्प एवं नियोजन) सिंचाई व जल संसाधन विभाग अवध नरेश गुप्ता, तत्कालीन मुख्य अभियंता (शारदा) मुकेश शर्मा, तत्कालीन सहायक अभियंता शारदा (नहर खंड 2) श्याम मोहन उपाध्याय, तत्कालीन सहायक अभियंता शारदा नहर (उपखंड-2) अंजनी पांडेय, तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारी (मुख्य अभियंता) (शारदा) महाराज दीन चौधरी, वरिष्ठ सहायक (मुख्य अभियंता) शारदा राजेश कुमार, तत्कालीन वरिष्ठ सहायक (कार्यालय अधिशासी अभियंता) फहीम अहमद खान और वरिष्ठ सहायक (कार्यालय द्वितीय खंड शारदा नहर) राजेश कुमार को भी बतौर आरोपी तलब किया गया है। इस मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
कोर्ट में इंदु यादव ने परिवाद दायर कर तत्कालीन प्रमुख सचिव दीपक सिंघल समेत 7 को आरोपी बनाया था। इसमें बताया गया था कि 19 नवंबर 2008 को कनिष्ठ लिपिक के 282 खाली पदों पर भर्ती के लिए विज्ञापन जारी हुआ था। लेकिन भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार और अनियमितताएं हुईं थीं। परिवादिनी ने इसकी शिकायत 18 अप्रैल 2012 को मुख्यमंत्री से की। इसके बाद विभागीय जांच कराई गई। इसकी रिपोर्ट जांच अधिकारी ने 11 अक्तूबर 2012 को शासन को सौंप दी। इसमें परिवादिनी की शिकायत को सही पाया गया था।
ये पाई गई थीं अनियमितताएं
बताया गया कि कनिष्ठ लिपिक के पद पर अजीत कुमार श्रीवास्तव, सर्वेश कुमार सक्सेना और विनोद उपाध्याय को अनुत्तीर्ण पाया गया था और इन तीनों की टाइपिंग स्पीड परिवादिनी से कम थी। इसके बावजूद उन्हें नियुक्ति दे दी गई और परिवादिनी को अनुत्तीर्ण कर दिया गया था।
कहा गया कि आरोपियों ने मिलीभगत कर अपात्र अभ्यर्थियों को चयनित कर लिया और पात्र अभ्यर्थियों को अनुत्तीर्ण कर दिया था।