माया के स्मारकों पर कोर्ट को जवाब देगी सरकार
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हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के कार्यकाल में लखनऊ व नोएडा में बनवाए गए स्मारकों व उद्यानों में जनधन की कथित धांधली पर राज्य सरकार को जांच के निर्देश देने के आग्रह वाली एक पीआईएल पर सरकार व कुछ अन्य पक्षकारों को जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का वक्त दिया है। अदालत ने अगली सुनवाई 15 जनवरी 2015 को नियत की है।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति डॉ. धनंजय यशवंत चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की खंडपीठ ने बुधवार को यह आदेश स्थानीय निवासी और शिवसेना के उपप्रमुख व प्रवक्ता भारत नाथ शुक्ल की पीआईएल पर दिया।
याची का आरोप है कि लोकायुक्त व कैग रिपोर्ट के मुताबिक 2007-2012 के बीच मायावती के शासन में लखनऊ व नोएडा में बनवाए गए स्मारकों व उद्यानों में बड़े पैमाने पर जनता की गाढ़ी कमाई का दुरुपयोग व धांधली का मामला प्रकाश में आया है।
जांच की मांग को लेकर की गई याचिका
याची ने याचिका में अदालत से गुजारिश की है कि इस प्रकरण में पूर्व सीएम मायावती व अन्य संबंधित विभागों के अफसरों, लोकसेवकों समेत कर्मचारियों के खिलाफ जांच करवाने के निर्देश यूपी सरकार को दिए जाएं।
याची के अधिवक्ता हरिशंकर जैन की दलील थी कि उक्त दोनों रिपोर्ट के बावजूद प्रदेश सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है जबकि इन रिपोर्टों के अनुसार संबंधित लोगों के खिलाफ विवेचना करवाने का केस बनता है।
याचिका में राज्य सरकार समेत यूपी राजकीय निर्माण निगम, लखनऊ विकास प्राधिकरण, न्यू ओखला इंडस्ट्रियल डवलपमेंट अथॉरिटी गौतमबुद्ध नगर समेत अन्य को पक्षकार बनाया गया है।
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार व कुछ अन्य पक्षकारों की तरफ से भी अधिवक्ता पेश हुए। कोर्ट ने राज्य सरकार समेत अन्य पक्षकारों को मामले में जवाबी हलफनामा दाखिल करने के लिए छह हफ्ते का समय देकर अगली सुनवाई 15 जनवरी को रखी है।