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जमीन के बारे में सही जानकारी चाहते हैं तो इस पोर्टल को करें डाउनलोड
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Fri, 29 Jun 2018 02:28 PM IST
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- फोटो : डेमो
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जमीन साफ-सुथरी है या अवैध कब्जे में फंसी है, अब इसका पता भूलेख पोर्टल पर चल जाएगा। क्योंकि प्रशासन ने अवैध कब्जे में फंसी जमीन का गाटा संख्या के आधार पर विवरण 31 जुलाई तक पोर्टल पर अपडेट करने के निर्देश दिए हैं।
इससे ग्राम पंचायत स्तर पर अवैध कब्जे में फंसी जमीन को गाटा संख्या के आधार पर खतौनी कॉलम में जाकर पहचाना जा सकेगा। नई व्यवस्था से सरकारी जमीन को कब्जा कर बेचने और स्वामित्व से जुड़े फर्जी दस्तावेज बनाने पर रोक लगेगी। साथ ही एंटी भू माफिया टॉस्क फोर्स की कार्रवाई भी प्रभावी बनेगी।
प्रभारी अधिकारी व एडीएम प्रशासन एसपी गुप्ता ने बताया कि सभी लेखपालों व नायब तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अवैध कब्जे में फंसी जमीनों को चिह्नित कर ग्राम पंचायतवार इनकी रिपोर्ट तैयार करें। इसी के आधार पर सरकारी व निजी जमीनों का विवरण व डेटा बेस तैयार कराया गया है।
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तहसीलवार तैयार होने वाली इस भू-अभिलेख रिपोर्ट की फीडिंग को 31 जुलाई तक राजस्व विभाग के भूलेख पोर्टल के खतौनी कॉलम में दर्ज कराया जाएगा। इसकी फीडिंग के बाद पोर्टल पर खतौनी कालम में जमीन की गाटा संख्या लिखकर क्लिक करते ही लेखपाल रिपोर्ट खुल जाएगी, जिससे यह पता लग सकेगा कि उक्त जमीन अवैध कब्जेदारी में फंसी है या नहीं।
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इससे ग्राम पंचायत स्तर पर अवैध कब्जे में फंसी जमीन को गाटा संख्या के आधार पर खतौनी कॉलम में जाकर पहचाना जा सकेगा। नई व्यवस्था से सरकारी जमीन को कब्जा कर बेचने और स्वामित्व से जुड़े फर्जी दस्तावेज बनाने पर रोक लगेगी। साथ ही एंटी भू माफिया टॉस्क फोर्स की कार्रवाई भी प्रभावी बनेगी।
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प्रभारी अधिकारी व एडीएम प्रशासन एसपी गुप्ता ने बताया कि सभी लेखपालों व नायब तहसीलदारों को निर्देश दिए गए हैं कि वह अवैध कब्जे में फंसी जमीनों को चिह्नित कर ग्राम पंचायतवार इनकी रिपोर्ट तैयार करें। इसी के आधार पर सरकारी व निजी जमीनों का विवरण व डेटा बेस तैयार कराया गया है।
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तहसीलवार तैयार होने वाली इस भू-अभिलेख रिपोर्ट की फीडिंग को 31 जुलाई तक राजस्व विभाग के भूलेख पोर्टल के खतौनी कॉलम में दर्ज कराया जाएगा। इसकी फीडिंग के बाद पोर्टल पर खतौनी कालम में जमीन की गाटा संख्या लिखकर क्लिक करते ही लेखपाल रिपोर्ट खुल जाएगी, जिससे यह पता लग सकेगा कि उक्त जमीन अवैध कब्जेदारी में फंसी है या नहीं।
खरीददार खुद जानेगा जमीन की स्टेटस रिपोर्ट
उन्होंने बताया कि अगर पोर्टल में दर्ज विवरण के अतिरिक्त किसी अन्य गाटा संख्या की जमीन के अवैध कब्जे में फंसे होने की शिकायत मिलती है तो तो तत्काल नायब तहसीलदार की अगुवाई में स्थलीय सत्यापन से इसकी जांच करायी जाएगी। शिकायत सही पाए जाने पर पोर्टल में गलत फीडिंग के आरोप में संबंधित हलके के लेखपाल व कानूनगो के खिलाफ कार्रवाई होगी।
पोर्टल पर दर्ज सर्वे रिपोर्ट की पोर्टल पर फीडिंग से पहले हर लेखपाल व संबंधित कानूनगो से शपथ पत्र भरवाया जाएगा कि तैयार रिपोर्ट के अतिरिक्त उसके कार्यक्षेत्र की किसी अन्य गाटा संख्या में दर्ज जमीन पर अवैध कब्जा नहीं है। रिपोर्ट में किसी भी तरह की खामी पर इन्हें कार्रवाई के घेरे में लाया जा सकेगा।
एडीएम प्रशासन ने भरोसा जताया है कि भूलेख पोर्टल पर गाटावार अवैध कब्जेदारी में फंसी जमीन की फीडिंग से खाली पड़ी सरकारी अथवा निजी जमीन को फर्जी दस्तावेज के आधार पर बेचना खरीदना भी चुनौती बनेगा। खरीददार अपनी संतुष्टि के लिए खरीदी जाने वाली जमीन की स्टेटस रिपोर्ट भूलेख पोर्टल के खतौनी कॉलम में जमीन की गाटा संख्या दर्ज कर खुद ही उसके स्वामित्व जानकारी प्राप्त कर सकेगा।
पोर्टल पर दर्ज सर्वे रिपोर्ट की पोर्टल पर फीडिंग से पहले हर लेखपाल व संबंधित कानूनगो से शपथ पत्र भरवाया जाएगा कि तैयार रिपोर्ट के अतिरिक्त उसके कार्यक्षेत्र की किसी अन्य गाटा संख्या में दर्ज जमीन पर अवैध कब्जा नहीं है। रिपोर्ट में किसी भी तरह की खामी पर इन्हें कार्रवाई के घेरे में लाया जा सकेगा।
एडीएम प्रशासन ने भरोसा जताया है कि भूलेख पोर्टल पर गाटावार अवैध कब्जेदारी में फंसी जमीन की फीडिंग से खाली पड़ी सरकारी अथवा निजी जमीन को फर्जी दस्तावेज के आधार पर बेचना खरीदना भी चुनौती बनेगा। खरीददार अपनी संतुष्टि के लिए खरीदी जाने वाली जमीन की स्टेटस रिपोर्ट भूलेख पोर्टल के खतौनी कॉलम में जमीन की गाटा संख्या दर्ज कर खुद ही उसके स्वामित्व जानकारी प्राप्त कर सकेगा।