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डरे नहीं लड़ें: परिवार के उदास चेहरों को देखा तो खुद को मजबूत किया, हौसला रखें...प्रसन्न रहें, आप जरूर जीतेंगे

Sun, 12 Apr 2020 09:11 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ
अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ Published by: शाहरुख खान Updated Sun, 12 Apr 2020 09:11 AM IST
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coronavirus up This disease will definitely be defeated
तौसीफ खान - फोटो : अमर उजाला
केजीएमयू में कोरोना पीड़ित मरीजों का इलाज करते वक्त खुद बीमार होने वाले केजीएमयू के रेजीडेंट डॉक्टर तौसीफ खान करीब 22 दिन बाद डिस्चार्ज हो गए हैं। वह कोरोना की चपेट मे आने वाले प्रदेश के पहले डॉक्टर हैं। डॉ. तौसीफ खान के चपेट में आने के बाद उनके परिवार के तीन सदस्य भी पॉजीटिव पाए गए। 
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अभी इनका इलाज चल रहा है। यह परिवार के लिए बड़ा सदमा था। लेकिन खुद वार्ड में भर्ती होने के बाद भी तौसीफ ने हिम्मत नहीं हारी। वह एक डॉक्टर की तरह परिवार के अन्य सदस्यों को समझाते रहे। यह भी समझाया कि जो चूक उनसे हुई वह दूसरों से न होने पाए। 
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डॉ. तौसीफ बताते हैं कि उन्हें बीमारी से डर नहीं लगा, लेकिन परिवार के लोगों को समझाना काफी मुश्किल भरा था। धीरे- धीरे हालात सामान्य होने लगे। उन्होंने कहा कि खुद के बीमार होने के बाद भी कभी हौंसला टूटा नहीं था। जो लोग बीमार हैं, उन्हें भी हौंसला रखना चाहिए। पानी खूब पीएं। पौष्टिक भोजन लेते रहें। 
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मन को प्रसन्न रखने वाली बातों को सोचें। अच्छी किताबें पढ़ें। पिछले दिनों अचानक बढ़ी जमातियों की संख्या पर वह कहते हैं कि छोटी सी चूक ने बड़ी समस्या खड़ी कर दी है। हदीस में इस बात का जिक्र है कि महामारी के वक्त शारीरिक दूरी रखना चाहिए। यह वक्त महामारी का है। ऐसे में लोगों को घरों में नमाज पढ़नी चाहिए और एक-दूसरे से दूरी बनाकर रखना चाहिए।

टिप्स- परिवार में किसी भी व्यक्ति को लक्षण हैं, तो छुपाएं नहीं, तत्काल जांच कराएं। साकारात्मक काम करें। किताबें पढ़ें, खूब पानी पीएं और पौष्टिक भोजन लें।

coronavirus up This disease will definitely be defeated
मो. असहद जौनपुर - फोटो : अमर उजाला
परिवार के उदास चेहरों को देखा तो खुद को मजबूत किया
कोरोना से डरने वाले जौनपुर के मोहम्मद असहद से सबक ले सकते हैं। संयम, सतर्कता और सकारात्मकता जैसे हथियारों के बूते करीब 17 दिनों तक जंग लड़ने के बाद वह कोरोना को मात देने में सफल रहे हैं। फिरोसेपुर मोहल्ला निवासी 34 वर्षीय मोहम्मद असहद फरवरी में उमरा करने सऊदी गए थे। 

वहां से 15 मार्च को लौटे। कोरोना पॉजीटिव की रिपोर्ट आई तो असहद और उनका परिवार सन्न रह गया। बकौल असहद, एकबारगी तो आंखों के सामने अंधेरा छा गया। लगा कि अब जिंदगी खत्म हो जाएगी। पत्नी, बच्चे, माता-पिता के चेहरे एक-एक कर सामने आने लगे थे। 

उनके उदास चेहरों को देखकर खुद को संभाला। ठान लिया कि अब इस बीमारी से लड़ना है। डॉक्टरों की टीम ने हिम्मत दी तो जोश दोगुना हो गया। आइसोलेशन वार्ड में अपने पास मौजूद मोबाइल फोन से कोरोना के बारे में जानकारियां जुटाई। चीन में उन मरीजों की हिस्ट्री देखी, जो कोरोना से ठीक हो चुके थे। यहीं से जीत का मंत्र मिला।
मो. असहद जौनपुर
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