खौफनाक: पंचायत चुनाव के लिए जिन जिलों में हो चुकी है वोटिंग, वहां 8% तक बढ़ा कोरोना संक्रमण
पटना एम्स के एमिडेमियोलॉजिस्ट एवं पूर्व निदेशक डॉ. जीके सिंह का कहना है कि पंचायत चुनाव स्थगित करने से सिर्फ यह होता कि संक्रमित होने वालों की संख्या कम रहती और समय बढ़ जाता। पर, इस चुनाव में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना नामुमकिन है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
दो चरणों में जिन जिलों में पंचायत चुनाव हो चुका है, वहां कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा है। पंचायत चुनाव के बाद प्रदेश भर में मिलने वाले कुल मरीजों में चुनाव वाले जिलों में औसतन 4 से 8 फीसदी अधिक केस मिल रहे हैं। अब स्वास्थ्य विभाग इन जिलों में विशेष निगरानी रखने की रणनीति बना रहा है।
पहले चरण में शामिल 18 जिलों में 15 अप्रैल को पंचायत चुनाव हो चुका है। चुनाव से पहले संक्रमित मरीजों में इन 18 जिलों के मरीजों की हिस्सेदारी 21.34 फीसदी थी। पंचायत चुनाव के 2 दिन बाद 17 अप्रैल को मिले कुल मरीजों में इन 18 जिलों की हिस्सेदारी लगभग 29 फीसदी हो गई। अब लगातार यही स्थिति बनी हुई है।
इसी तरह दूसरे चरण में शामिल 19 जिलों में 19 अप्रैल को चुनाव हो चुका है। चुनाव से पहले कुल मरीजों में इन जिलों की हिस्सेदारी लगभग 40 फीसदी थी। जो चुनाव के बाद 44 फीसदी तक पहुंच गई। दो चरणों में चुनाव में शामिल रहने वाले जिलों में संक्रमण बढ़ने की वजह सोशल डिस्टेंसिंग का पालन न होना माना जा रहा है। क्योंकि चुनाव प्रचार के दौरान ग्रामीण इलाके में लोगों ने न तो सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया और न ही मास्क लगाया।
स्वास्थ्य महानिदेशक डॉ. डीएस नेगी ने बताया कि जिन जिलों में संक्रमण बढ़ रहा है, वहां के लिए अलग से रणनीति बनाने का निर्देश दिए गए हैं। सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को अलर्ट कर दिया गया है, उन्हें बेड बढ़ाने और दवाओं समेत अन्य इंतजाम करने को कहा गया है। कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग का दायरा बढ़ा दिया गया है।
इस तरह हुई कोरोना संक्रमितों में वृद्धि
पहले चरण में शामिल कानपुर नगर में 13 अप्रैल को 716 मरीज मिले थे। वहां 19 अप्रैल को 1365 संक्रमित मिले। इसी तरह महोबा में 23 मरीज मिले थे, जो 19 अप्रैल को 41 पर पहुंच गए। हरदोई में 56 मरीज थे, यह संख्या 265 पर पहुंच गया।
वहीं, दूसरे चरण में शामिल गौतमबुद्ध नगर जिले में 17 अप्रैल को 402 मरीज मिले थे। वहां 24 अप्रैल को यह आंकड़ा 970 पर पहुंच गए। सुल्तानपुर में 293 मरीज मिले थे, जो 24 अप्रैल को 400 पर पहुंच गए। इसी तरह से सभी जिलों में बढ़ोतरी हुई।
ग्रामीण क्षेत्रों में वायरस का प्रभाव होगा और तेज
पटना एम्स के एमिडेमियोलॉजिस्ट एवं पूर्व निदेशक डॉ. जीके सिंह का कहना है कि पंचायत चुनाव स्थगित करने से सिर्फ यह होता कि संक्रमित होने वालों की संख्या कम रहती और समय बढ़ जाता। पर, इस चुनाव में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराना नामुमकिन है। गांव में लोग सैनिटाइजेशन और मास्क को लेकर जागरूक नहीं हैं। ऐसी स्थिति में चुनाव के बाद संबंधित जिलों में संक्रमण का बढ़ना स्वाभाविक है। अभी ग्रामीण इलाके में वायरस का प्रभाव और तेज होगा। हर घर और हर व्यक्ति इसकी चपेट में आएगा। -डॉ. जीके सिंह, एमिडेमियोलॉजिस्ट एवं पूर्व निदेशक एम्स पटना
नेताओं के अपने-अपने तर्क
भाजपा सह संयोजक पंचायत चुनाव काशी क्षेत्र सुभाष कुशवाहा का कहना है कि पार्टी नेताओं ने हर कार्यकर्ता को चुनाव में कोविड प्रोटोकॉल पालन करने के निर्देश दिए थे। चुनाव प्रचार के दौरान वोट मांगने का साथ लोगों को कोरोना से बचने के लिए भी जागरूक किया गया है।
बोर्ड परीक्षा स्थगित कर दिया, लेकिन मांग करने के बाद भी चुनाव नहीं रोका
प्रदेश महासचिव सपा व्यापार सभा अभिमन्यु गुप्ता का कहना है कि सरकार ने बोर्ड परीक्षा स्थगित कर दिया, लेकिन मांग करने के बाद भी चुनाव नहीं रोका। इसकी वजह से सोशल डिस्टेंसिंग तार-तार हुई। कोरोना सिर्फ शहरों तक सीमित था, लेकिन पंचायत चुनाव के बाद हर गांव में पहुंच गया है। अब वहां लोग तड़प रहे हैं, पर उन्हें न दवाई मिल रही है और न भर्ती करने की कोई व्यवस्था है।
इन जिलों में पहले व दूसरे चरण में हुए चुनाव
पहले चरण में सहारनपुर, गाजियाबाद, रामपुर, बरेली, हाथरस, आगरा, कानपुर नगर, झांसी, महोबा, प्रयागराज, रायबरेली, हरदोई, अयोध्या, श्रावस्ती, संतकबीर नगर, गोरखपुर, जौनपुर और भदोही शामिल थे। जबकि दूसरे चरण में मुजफ्फरनगर, बागपत, गौतम बुद्ध नगर, बिजनौर, अमरोहा, बदायूं, एटा, मैनपुरी, कन्नौज, इटावा, ललितपुर, चित्रकूट, प्रतापगढ़, लखनऊ, लखीमपुर खीरी, सुल्तानपुर, गोंडा, वाराणसी व आजमगढ़ शामिल थे।