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कोरोना संक्रमण ने भी फेरा पंचायत चुनाव में भाजपा की योजना पर पानी, ग्रामीण क्षेत्रों में मौतें नाराजगी की वजह

Tue, 04 May 2021 12:24 AM IST
पंकज श्रीवास्‍तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: पंकज श्रीवास्‍तव Updated Tue, 04 May 2021 12:24 AM IST
सार

जिला पंचायत चुनाव के मैदान में उतरी भाजपा की रणनीति और मेहनत पर कोरोना संक्रमण ने पानी फेर दिया। पंचायत चुनाव के बीच ग्रामीण इलाकों में फैले कोरोना संक्रमण से ग्रसित ग्रामीणों को समय पर इलाज और दवाइयां मुहैया नहीं होना चुनावी मुद्दे बने।

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Corona infection also caused water on BJP's plan in Phera Panchayat elections, deaths in rural areas due to resentment

विस्तार

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाने के लिए पूरी ताकत के साथ जिला पंचायत चुनाव के मैदान में उतरी भाजपा की रणनीति और मेहनत पर कोरोना संक्रमण ने पानी फेर दिया। पंचायत चुनाव के बीच ग्रामीण इलाकों में फैले कोरोना संक्रमण से ग्रसित ग्रामीणों को समय पर इलाज और दवाइयां मुहैया नहीं होना चुनावी मुद्दे बने। 

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पंचायत चुनाव की घोषणा के साथ ही प्रदेश में कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर बहने लगी थी। पहले चरण के मतदान के दिन 15 अप्रैल से कोरोना ने प्रदेश में अपना प्रकोप दिखाना शुरू कर दिया था। चौथे चरण के मतदान के दिन 29 अप्रैल तक कोरोना ने पश्चिम से पूर्व और अवध से बुंदेलखंड तक के गांवों को चपेट में ले लिया था। कोरोना काल में पंचायत चुनाव के प्रचार प्रसार, रैलियों, बैठकों और जनसंपर्क के कारण गांवों में कोरोना तेजी से फैला। उसके बाद संक्रमित मरीजों को अस्पतालों में बैड नहीं मिलने, आक्सीजन नहीं मिलने, जीवन रक्षक दवाइयां और इंजेक्शन नहीं मिलने से बिगड़े हालत ने गांवों में भाजपा के प्रति नाराजगी को बढ़ा दिया। ग्रामीणों में भाजपा के खिलाफ बने माहौल का असर जिला पंचायत सदस्य के चुनाव नतीजों में दिख रहा है। 
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भाजपा ने जिला पंचायत चुनाव की तैयारियां करीब एक साल पहले से शुरू की थी। प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों के साथ प्रदेश पदाधिकारियों, विधायकों और सांसदों को चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी थी। जिला पंचायत के हर वार्ड में महिला, युवा, अनुसूचित जाति, किसान, पिछड़े वर्ग के सम्मेलन कराने के साथ बूथ से लेकर जिला स्तर तक मजबूत रणनीति भी बनाई गई। राजनीति के जानकारों का मानना है कि कोरोना संक्रमण के कारण ग्रामीणों का जनाक्रोश चुनाव परिणाम के रूप में सामने आया है। जहां सरकार और संगठन की पूरी ताकत के बाद भी भाजपा को 50 फीसदी जिला पंचायतों में भी स्पष्ट बहुमत मिलता नहीं दिख रहा है। 
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भीतरघात ने भी कमजोर किया 
भाजपा ने जिला पंचायत सदस्य के चुनाव में किसी भी सांसद, विधायक, मंत्री और पार्टी पदाधिकारी के परिवारजन को टिकट नहीं देने का फैसला सख्ती से लागू किया। चुनाव लड़ने वाले कई प्रदेश, क्षेत्र व जिला पदाधिकारियों से इस्तीफे भी लिए गए। भाजपा के इस निर्णय से जिला पंचायत में वर्षों से अपना वर्चस्व कायम रखने वाले प्रदेश के कई प्रभावशाली नेताओं की भी जमीन हिली। पार्टी के निर्णय के आगे उन्होंने भले खुद या परिवारजन को चुनाव नहीं लड़ाया, लेकिन क्षेत्र में पार्टी की नई लीडरशिप विकसित होने से रोकने के लिए जमकर भीतरघात भी किया। 

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