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'जिंदगी मास्टर क्लास' में कोरोना योद्धाओं ने साझा किए अनुभव, बोले- मानसिक मजबूती से मिलेगी जीत
Fri, 29 May 2020 11:05 AM IST
ishwar ashish
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 29 May 2020 11:05 AM IST
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जिंदगी मास्टर क्लास
- फोटो : amar ujala
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उनकी निष्ठा, संकल्प, नेक इरादे और मानसिक मजबूती एक मिसाल है, हर किसी के लिए। महामारी के इस दौर में जब हम छोटी-छोटी बातों से हिम्मत हार जाने की सोचने लग रहे हैं। दहशत के चलते अवसाद का शिकार हो जा रहे हैं, जरा सी बातों पर धैर्य खो दे रहे हैं, ऐसे में कोरोना की जंग लड़ने वाले कोविड योद्धाओं से हमें जिंदगी का फलसफा सीखना होगा।
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इसी उद्देश्य को लेकर यूनिसेफ ने गुरुवार को आयोजित जिंदगी मास्टरक्लास में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों की मुलाकात कराई कोविड योद्धाओं से। युवाओं और अभिभावकों के लिए शुरू की गई वेबिनार की इस शृंखला में अमर उजाला मीडिया पार्टनर है। वेबिनार का लाइव प्रसारण शाम 5.30 बजे से अमर उजाला लखनऊ के फेसबुक पेज पर भी किया गया। वेबिनार का संचालन संगीता आनंद ने किया।
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इस वेबिनार में शामिल होने वाले कोविड वॉरियर्स हैं डॉ. अंशुल पारीख, डॉ. शिवी अग्रवाल और डॉ. अशोक ताल्यान। डॉ. अंशुल कम्युनिटी मेडिसिन में विशेषज्ञ हैं और वर्तमान में आगरा में मेडिकल मोबाइल यूनिट और रैपिड रिस्पॉन्स टीम में नोडल अधिकारी हैं।
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डॉ. शिवी गाजियाबाद में डिस्ट्रिक्ट एपिडेमिओलाजिस्ट के पद पर कार्यरत हैं। जबकि अशोक तालियान यूपी सरकार में पब्लिक हेल्थ सेक्टर में कार्यरत हैं। वे मेरठ और सहारनपुर में डिविजनल सर्विलांस ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। इसके अलावा स्टाफ नर्स सल्तनत नफीस खां भी लोगों से रूबरू हुईं और कोरोना की जंग में अपने साहस के किस्से साझा किए।
बताया कि एक मुस्लिम परिवार की होने के कारण कई तरह की दिक्कतें झेलनी पड़ी, अंतत: उन्होंने दास्तां साझा की। बताया कि मुस्लिम परिवार की होने के कारण पढ़ाई से लेकर काम करने तक में बाधा ही बाधा झेली है। नौकरी में कोविड वार्ड में तैनाती, पीपीई किट पहनने से होने वाली दिक्कतें, असहनीय पीड़ादायक रहीं, लेकिन ड्यूटी ही सबकुछ है और थी।
आप मत घबराइए, हम सब डटे हैं जंग के मैदान में
दो बेटियों के पिता डॉ. अंशुल ने वेबिनार में अपनी कहानी साझा करते हुए हर देशवासी का हौसला बढ़ाया। बताया कि और लॉकडाउन के साथ ही बेटियों को जयपुर पत्नी संग भेज दिया था। आगरा के मुश्किल हालात को संभालना प्राथमिकता थी और काफी हद तक सफल रहे। मेडिकल मोबाइल यूनिट और रैपिड रिस्पॉन्स टीम का काम कभी न रुकने वाला है।
हमारी नजर हर पल इस बात पर रहती है कि हम कोरोना संक्रमण को किस हद तक रोक सकें। हमारे पास एक समर्पित टीम है। अन्य विभाग भी हमारे साथ जुटे हुए हैं। स्माल पॉक्स को जाने में तीन हजार साल लग गए, कोरोना आसानी से जाएगा नहीं। मैं भी अपने परिवार से मिलना चाहता हूं, जल्द से जल्द, लेकिन उससे पहले हमें कोरोना का डर, उसका खतरा खत्म करना है, आप डरें नहीं हम सब मैदान में डटे हैं।
ढाई साल की बेटी और पांच साल के बेटे को मिस कर रहा हूं
डॉ. शिवी अग्रवाल कहते हैं कि निश्चित तौर पर ड्यूटी पहले हैं। मैं अपनी 2.5 साल की बेटी को सबसे ज्यादा मिस करता हूं। पांच साल का बेटा भी है। दोनों की शरारतें देखने को आंखें तरस गई हैं। पत्नी, माता-पिता वीडियो और फोटो भेजते रहते हैं। रही बात कोरोना से डरने की तो, यहां मुद्दा दहशत या घबराने का नहीं है।
हमें सावधान रहते हुए हालात को नियंत्रित करना है, वो हम सब कर भी रहे हैं। हमारा फोकस मरीज के संपर्क में आए लोगों को ट्रेस करना, मरीज के ठीक होने के बाद उसका, घर का, आसपास रहने वालों का फॉलोअप लेना, रेड जोन वाले एरिया में सर्विलांस एक्टिविटी पर नजर और प्रभावित इलाकों का सैनिटाइजेशन करना है।
हमारी नजर हर पल इस बात पर रहती है कि हम कोरोना संक्रमण को किस हद तक रोक सकें। हमारे पास एक समर्पित टीम है। अन्य विभाग भी हमारे साथ जुटे हुए हैं। स्माल पॉक्स को जाने में तीन हजार साल लग गए, कोरोना आसानी से जाएगा नहीं। मैं भी अपने परिवार से मिलना चाहता हूं, जल्द से जल्द, लेकिन उससे पहले हमें कोरोना का डर, उसका खतरा खत्म करना है, आप डरें नहीं हम सब मैदान में डटे हैं।
ढाई साल की बेटी और पांच साल के बेटे को मिस कर रहा हूं
डॉ. शिवी अग्रवाल कहते हैं कि निश्चित तौर पर ड्यूटी पहले हैं। मैं अपनी 2.5 साल की बेटी को सबसे ज्यादा मिस करता हूं। पांच साल का बेटा भी है। दोनों की शरारतें देखने को आंखें तरस गई हैं। पत्नी, माता-पिता वीडियो और फोटो भेजते रहते हैं। रही बात कोरोना से डरने की तो, यहां मुद्दा दहशत या घबराने का नहीं है।
हमें सावधान रहते हुए हालात को नियंत्रित करना है, वो हम सब कर भी रहे हैं। हमारा फोकस मरीज के संपर्क में आए लोगों को ट्रेस करना, मरीज के ठीक होने के बाद उसका, घर का, आसपास रहने वालों का फॉलोअप लेना, रेड जोन वाले एरिया में सर्विलांस एक्टिविटी पर नजर और प्रभावित इलाकों का सैनिटाइजेशन करना है।
माता-पिता की 50वीं शादी की सालगिरह नहीं मना पाया
इन बिंदुओं पर जानने की थी जिज्ञासा
एक प्रतिभागी ने पूछा कि हम मेंटली स्ट्रॉन्ग कैसे बना सकते हैं। g मन उदास होता है तो क्या करें। g घर पर ही कैसे ठीकहो जा रहे हैं मरीजg नर्स, डाक्टर कोक्या मरीज के बीच रहते डर नही लगता क्या g जरा सी सर्दी हो जाए तो लोग कोरोना-कोरोना चिल्लाने लगते हैं।
अशोक ताल्यान कहते हैं कि सर्विलांस एक महत्वपूर्ण कार्य है। डाटाकलेक्शन का काम हमारा हैं। कोरोना की जंगलड़ते-लड़ते परिवार को मिस कर रहे हैं, कई चीजें छूट रही हैं। इनमें से एक है मेरे माता-पिता की 50वीं शादी का सालगिरह। हालांकि इस दौरान हमारी सतर्क टीम का नतीजा था कि कोरोना पॉजिटिव मरीज के सब्जी विक्रेता से लिंक का पता लगाकर 70 लोगो की जांच कराई और इनमें से 35 पॉजिटिव पाए गए। सामने आने पर कोरोना की चेन तोड़ने में बड़ी सफलता मिली।
एक प्रतिभागी ने पूछा कि हम मेंटली स्ट्रॉन्ग कैसे बना सकते हैं। g मन उदास होता है तो क्या करें। g घर पर ही कैसे ठीकहो जा रहे हैं मरीजg नर्स, डाक्टर कोक्या मरीज के बीच रहते डर नही लगता क्या g जरा सी सर्दी हो जाए तो लोग कोरोना-कोरोना चिल्लाने लगते हैं।
अशोक ताल्यान कहते हैं कि सर्विलांस एक महत्वपूर्ण कार्य है। डाटाकलेक्शन का काम हमारा हैं। कोरोना की जंगलड़ते-लड़ते परिवार को मिस कर रहे हैं, कई चीजें छूट रही हैं। इनमें से एक है मेरे माता-पिता की 50वीं शादी का सालगिरह। हालांकि इस दौरान हमारी सतर्क टीम का नतीजा था कि कोरोना पॉजिटिव मरीज के सब्जी विक्रेता से लिंक का पता लगाकर 70 लोगो की जांच कराई और इनमें से 35 पॉजिटिव पाए गए। सामने आने पर कोरोना की चेन तोड़ने में बड़ी सफलता मिली।