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कोरोना इफेक्ट : फ्लैट से मोहभंग, भूखंड और विला की चाह
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कोरोना काल ने अपार्टमेंट में फ्लैट लेकर रहने वालों को मुश्किलों में डाल दिया था। ज्यादातर अपार्टमेंट में लोग संक्रमण से परेशान हुए। इस मुश्किल ने अपना आशियाना की चाह रखने वालों की सोच बदल दी है।
फ्लैट की जगह इनका रुझान वापस विला या भूखंड खरीद कर मकान बनाने की ओर बढ़ा है। रीयल एस्टेट कंपनियों से ऑनलाइन संपर्क कर रहे लोगों में ज्यादातर लोग अधिकांश विला या आवासीय भूखंड की जानकारी ले रहे हैं।
ऐसे में संभावना है कि आने वाले दिनों में कंपनियां भी बहुमंजिला प्रोजेक्टों की जगह विला या भूखंड के ले-आउट पर काम करें। कम पूंजी वाली बिल्डर कंपनियां पहले ही भूखंड के अलावा रो-हाउस या विला के प्रोजेक्ट कर रही हैं।
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रीयल एस्टेट के जानकारों का कहना है कि लोगों को अपार्टमेंट में संक्रमण का खतरा अधिक होने की आशंका है। इसकी वजह वहां कॉमन एरिया जैसे लिफ्ट, प्रवेश-निकास द्वार के सार्वजनिक उपयोग हैं।
लखनऊ में ही कई अपार्टमेंट में बड़ी संख्या में केस सामने आए। इसके उलट एकल आवासीय घरों या विला में संक्रमण से खुद को बचाने में मदद मिली। यही वजह हो सकती है कि लोग भूखंड लेकर खुद मकान बनाने या पूर्व निर्मित रेडी टू मूव विला, रो-हाउस लेने की इच्छा दिखा रहे हैं।
इस तरह से बदली कोरोना ने सोच
जो परिवार अभी किराए पर रह रहे हैं, उन्हें कोरोना ने अब खुद के घर की जरूरत अब महसूस कराई है। वर्क फ्रॉम होम जैसी शुरुआत ने भी अतिरिक्त जगह की जरूरत को बढ़ा दिया है। ऐसे में लोगों को बड़े घर की आवश्यकता है और वह छोटे घर की जगह बड़े घर में शिफ्ट होना चाहते हैं।
मांग तो पूरी करनी होगी
लखनऊ में पिछले दिनों में बहुमंजिला प्रोजेक्ट निर्माण में तेजी आई थी, लेकिन कोरोना के आने के बाद नए प्रोजेक्ट लॉन्च होने बंद हो गए। अब एलडीए, आवास विकास परिषद सहित निजी बिल्डर्स को भी लोगों की मांग के मुताबिक भूखंड या मकान उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा। एक आकलन के मुताबिक हर साल लखनऊ में 20 हजार आवास की जरूरत बनी हुई है। नियोजित कॉलोनियों में इसका एक चौथाई भी अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अनियोजित कालोनियों में विकास शुरू हो जाता है। लोगों को अच्छी लोकेशन के साथ जरूरी अवस्थापना सुविधा के साथ मकान मिले, यह भी जरूरी है।
संक्रमण से सुरक्षा संग कीमत भी बड़ी वजह
लखनऊ में विला या भूखंड लेकर मकान बनाना आर्थिक रूप से भी लोगों को पसंद आ रहा है। इसकी वजह यह है कि फ्लैटों की कीमतें लखनऊ में मकान बनाने की तुलना में अधिक हैं। एक विकसित एरिया में फ्लैट जहां 5000 रुपये प्रति वर्गफीट से अधिक कीमत में मिल रहा है, वहीं 1500 वर्गफीट कवर्ड एरिया एरिया का ड्यूपलेक्स बनाने में कम खर्च आता है। इसकी वजह यह है कि अभी भी अधिकांश विकसित हो रहे इलाकों में जमीनों की कीमतें कम हैं।
कोरोना ने लोगों की पसंद को बदला
वाइस प्रेसिडेंट, पार्थ समूह, विवेक मिश्रा का कहना है कि कोरोना ने लोगों की पसंद को बदलने का काम किया है। जो लोग अभी तक किराए के घर में रहना पसंद करते थे, वह भी नया मकान खरीदना चाहते हैं। कुछ को बड़े मकान चाहिए। फ्लैट खरीदने की तुलना में लोग इस समय विला या भूखंड खरीदना भी पसंद कर रहे हैं। उम्मीद है कि कोरोना कर्फ्यू खत्म होते ही बुकिंग शुरू हो जाएगी।
मकान के लिए लोग ऑनलाइन सर्च कर रहे
सीईओ, एल्डिको समूह, एसके जग्गी का कहना है कि मकान के लिए लोग ऑनलाइन सर्च कर रहे हैं। हमारे पास सबसे अधिक पड़ताल विला और भूखंड की आ रही है। हमारे प्रोजेक्टों में विला की सबसे अधिक मांग है। लोग भूखंड की भी मांग कर रहे हैं। ऐसा कोरोना की वजह से भी हो सकता है। आने वाले दिनों में रीयल एस्टेट में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।
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फ्लैट की जगह इनका रुझान वापस विला या भूखंड खरीद कर मकान बनाने की ओर बढ़ा है। रीयल एस्टेट कंपनियों से ऑनलाइन संपर्क कर रहे लोगों में ज्यादातर लोग अधिकांश विला या आवासीय भूखंड की जानकारी ले रहे हैं।
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ऐसे में संभावना है कि आने वाले दिनों में कंपनियां भी बहुमंजिला प्रोजेक्टों की जगह विला या भूखंड के ले-आउट पर काम करें। कम पूंजी वाली बिल्डर कंपनियां पहले ही भूखंड के अलावा रो-हाउस या विला के प्रोजेक्ट कर रही हैं।
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रीयल एस्टेट के जानकारों का कहना है कि लोगों को अपार्टमेंट में संक्रमण का खतरा अधिक होने की आशंका है। इसकी वजह वहां कॉमन एरिया जैसे लिफ्ट, प्रवेश-निकास द्वार के सार्वजनिक उपयोग हैं।
लखनऊ में ही कई अपार्टमेंट में बड़ी संख्या में केस सामने आए। इसके उलट एकल आवासीय घरों या विला में संक्रमण से खुद को बचाने में मदद मिली। यही वजह हो सकती है कि लोग भूखंड लेकर खुद मकान बनाने या पूर्व निर्मित रेडी टू मूव विला, रो-हाउस लेने की इच्छा दिखा रहे हैं।
इस तरह से बदली कोरोना ने सोच
जो परिवार अभी किराए पर रह रहे हैं, उन्हें कोरोना ने अब खुद के घर की जरूरत अब महसूस कराई है। वर्क फ्रॉम होम जैसी शुरुआत ने भी अतिरिक्त जगह की जरूरत को बढ़ा दिया है। ऐसे में लोगों को बड़े घर की आवश्यकता है और वह छोटे घर की जगह बड़े घर में शिफ्ट होना चाहते हैं।
मांग तो पूरी करनी होगी
लखनऊ में पिछले दिनों में बहुमंजिला प्रोजेक्ट निर्माण में तेजी आई थी, लेकिन कोरोना के आने के बाद नए प्रोजेक्ट लॉन्च होने बंद हो गए। अब एलडीए, आवास विकास परिषद सहित निजी बिल्डर्स को भी लोगों की मांग के मुताबिक भूखंड या मकान उपलब्ध कराने पर ध्यान देना होगा। एक आकलन के मुताबिक हर साल लखनऊ में 20 हजार आवास की जरूरत बनी हुई है। नियोजित कॉलोनियों में इसका एक चौथाई भी अभी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में अनियोजित कालोनियों में विकास शुरू हो जाता है। लोगों को अच्छी लोकेशन के साथ जरूरी अवस्थापना सुविधा के साथ मकान मिले, यह भी जरूरी है।
संक्रमण से सुरक्षा संग कीमत भी बड़ी वजह
लखनऊ में विला या भूखंड लेकर मकान बनाना आर्थिक रूप से भी लोगों को पसंद आ रहा है। इसकी वजह यह है कि फ्लैटों की कीमतें लखनऊ में मकान बनाने की तुलना में अधिक हैं। एक विकसित एरिया में फ्लैट जहां 5000 रुपये प्रति वर्गफीट से अधिक कीमत में मिल रहा है, वहीं 1500 वर्गफीट कवर्ड एरिया एरिया का ड्यूपलेक्स बनाने में कम खर्च आता है। इसकी वजह यह है कि अभी भी अधिकांश विकसित हो रहे इलाकों में जमीनों की कीमतें कम हैं।
कोरोना ने लोगों की पसंद को बदला
वाइस प्रेसिडेंट, पार्थ समूह, विवेक मिश्रा का कहना है कि कोरोना ने लोगों की पसंद को बदलने का काम किया है। जो लोग अभी तक किराए के घर में रहना पसंद करते थे, वह भी नया मकान खरीदना चाहते हैं। कुछ को बड़े मकान चाहिए। फ्लैट खरीदने की तुलना में लोग इस समय विला या भूखंड खरीदना भी पसंद कर रहे हैं। उम्मीद है कि कोरोना कर्फ्यू खत्म होते ही बुकिंग शुरू हो जाएगी।
मकान के लिए लोग ऑनलाइन सर्च कर रहे
सीईओ, एल्डिको समूह, एसके जग्गी का कहना है कि मकान के लिए लोग ऑनलाइन सर्च कर रहे हैं। हमारे पास सबसे अधिक पड़ताल विला और भूखंड की आ रही है। हमारे प्रोजेक्टों में विला की सबसे अधिक मांग है। लोग भूखंड की भी मांग कर रहे हैं। ऐसा कोरोना की वजह से भी हो सकता है। आने वाले दिनों में रीयल एस्टेट में बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।