यहां 11 बरस से नहीं बंटे पुरस्कार
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भारतेंदु
अकादमी की स्थापना के बाद यह दूसरा मौका था, जब समारोह कराया गया। इसके बाद पिछले 13 सालों में एक भी दीक्षांत समारोह नहीं कराया गया।
इस दौरान करीब दौ सो छात्र अकादमी से पास होकर अभिनय और धारावाहिक निर्माण के क्षेत्र में नाम रोशन कर रहे हैं। इनमें राजपाल यादव, अनुपम श्याम और नवाजुद्दीन सिद्दीकी जैसे नाम भी शामिल हैं।
दीक्षांत समारोह आयोजित कर इन्हें आमंत्रित करना और ठहराने की व्यवस्था के लिए बजट की जरूरत है, जो अकादमी के पास नहीं है।
सूत्र बताते हैं कि बजट का प्रस्ताव तो अकादमी की तरफ से भेज दिया जाता है, लेकिन शासन स्तर पर संस्कृति विभाग के आला अधिकारी अकादमी की समस्याओं और जरूरतों के बारे मेें वित्त विभाग से बातचीत नहीं करते, जिससे हर बार बजट का मसला अटक जाता है।
11 वर्षों से बिगड़े हैं सुर, लय और ताल
एसएनए
की सुर-लय-ताल तो वर्ष 2002 से ही बिगड़ी हुई है। जब अंतिम बार यहां
पुरस्कारों का वितरण हुआ था। इसके बाद 11 वर्षों से पुरस्कारों का वितरण
नहीं हुआ है।
बिरजू महराज, लच्छू महराज, गिरिजा देवी और ऐसी ही तमाम
शख्सियत अकादमी से पुरस्कृत की जा चुकी हैं। सूत्र बताते हैं कि एक समारोह
आयोजित कराने पर तीन से चार लाख रुपये का खर्च आता है।
इस लिहाज से पिछले
कई वर्षों के पुरस्कारों पर अधिकतम 40 लाख रुपये का खर्च आएगा, लेकिन इतना
पैसा अकादमी के पास नहीं हैं। हालांकि, उपाय यह भी है कि एक बार में अकादमी
दो-दो वर्षों के पुरस्कारों का वितरण भी कर सकती है।
अकादमी की ओर से
कलाकारों को चार मुख्य श्रेणियों में करीब 14 पुरस्कारों का वितरण होता है,
जिसमें सर्वोच्च पुरस्कार अद्यतन अकादमी पुरस्कार (अकादमी रत्न) है।
इसके
बाद गायन, वादन, नृत्य व रंगमंच की श्रेणी में अकादमी पुरस्कार, बीएम शाह
और सफदर हाशमी पुरस्कार दिए जाते हैं।