बेटियां फिर आगे, हासिल किए 53 में से 38 मेडल, राज्यपाल बोले- उच्च शिक्षा पटरी पर
बेटियों ने एक बार फिर अपनी मेधा का परचम लहराया है। डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में कुल 53 में से 38 पदकों पर बेटियों ने बाजी मारी है। वहीं, 436 में से 233 डिग्रियों पर भी छात्राओं ने कब्जा जमाया है।
विश्वविद्यालय प्रेक्षागृह में आयोजित समारोह में जब मेडल पाने वाले विद्यार्थियों के नाम की घोषणा की गई तो एक-एक कर छात्राएं ही सामने आ रही थी। इसे देख समारोह की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल राम नाईक ने भी मंच से खुलकर बेटियों के आगे रहने की तारीफ की और छात्राओं को बधाई दी।
उन्होंने जब आंकड़ों से इसको और स्पष्ट किया तो हाल काफी देर तक तालियों से गूंजता रहा। वहीं, बेटियों की सफलता को देख अभिभावक भी गौरवान्वित महसूस कर रहे थे। उनके चेहरे खिल उठे थे।
दीक्षांत समारोह में बीए की रंजना राव को कुलाध्यक्ष स्वर्ण पदक, मुख्यमंत्री स्वर्ण पदक, कुलपति स्वर्ण पदक पदक मिले। एमए हिंदी के दिव्यांग छात्र मो. अकरम को आलोक तोमर स्मृति स्वर्ण पदक, डॉ. शकुंतला मिश्रा स्मृति स्वर्ण पदक, अमित मित्तल स्मृति स्वर्ण पदक तथा कुलपति स्वर्ण पदक के साथ कुलाध्यक्ष और मुख्यमंत्री कांस्य पदक भी मिला।
इन्हें भी मिले स्वर्ण पदक
इसी क्रम में एमए राजनीति विज्ञान की छात्रा सफलता सैनी को मुलायम सिंह यादव व कुलपति स्वर्ण पदक, बीकॉम की मानसी गुप्ता को मुख्यमंत्री व कुलपति स्वर्ण पदक, बीए की अर्चना निषाद को कुलाध्यक्ष, मुख्यमंत्री व कुलपति रजत पदक, पूनम यादव, गरिमा मिश्रा, श्रुति श्रीवास्तव, रूबी यादव, श्रीमती कुमारी व पूनम सूद को कुलपति स्वर्ण पदक दिया गया।
एलएलएम के छात्र अभिषेक द्विवेदी को कुलाध्यक्ष व कुलपति स्वर्ण पदक और बीए के दिव्यांग छात्र जनार्दन को रोहित मित्तल स्मृति स्वर्ण पदक दिया गया।
समारोह में मुख्य अतिथि मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडेकर, विशिष्ट अतिथि कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर, अतिथि लखनऊ यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. एसपी सिंह थे और अध्यक्षता राज्यपाल राम नाईक ने की।
इस अवसर पर आईआईएम डायरेक्टर डॉ. अजीत प्रसाद, डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम प्राविधिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक, प्रमुख सचिव विशेष शिक्षा महेश गुप्ता, प्रमुख सचिव जितेंद्र कुमार, पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन उपस्थित थे।
प्रेक्षागृह का नाम अटल प्रेक्षागृह
जिस प्रेक्षागृह में दीक्षांत समारोह चल रहा था, कार्यक्रम में उसका नाम पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई के नाम पर अटल प्रेक्षागृह करने की घोषणा की गई।
अतिथियों ने संयुक्त रूप से इसके शिलापट्ट का अनावरण किया। 1500 की क्षमता वाला यह प्रेक्षागृह पूरी तरह वातानुकूलित है।
‘दिव्यांग’ ऑनलाइन न्यूज लेटर का विमोचन
समारोह में अतिथियों ने ‘दिव्यांग’ ऑनलाइन न्यूज लेटर का भी विमोचन किया। इसमें दिव्यांगों से जुड़ी देशभर की जानकारियां उपलब्ध होंगी।
डीन विशेष शिक्षा प्रो. रजनी रंजन सिंह इसके समन्वयक हैं। कार्यक्रम में ‘संबल’ स्मारिका का विमोचन भी किया गया। डॉ. अवधेश मिश्र इसके समन्वयक हैं।
राज्यपाल ने कहा- पटरी पर आ रही उच्च शिक्षा की गाड़ी
दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता कर रहे राज्यपाल राम नाईक ने कहा कि पुनर्वास विवि का पहला दीक्षांत बाहर पंडाल में हुआ था, आज तीसरा अटल प्रेक्षागृह में। यह विवि की प्रगति को बयां करता है। विवि के कैलेंडर में पढ़ाई के साथ दीक्षांत भी महत्वपूर्ण है।
मेरे आने के बाद सूबे के विवि में समय पर दीक्षांत होने लगे हैं। पूर्व में ऐसा नहीं होता था। इससे पता चलता है कि उच्च शिक्षा की गाड़ी पटरी पर आई है। यूपी में विश्वविद्यालयों की शिक्षा व्यवस्था विकास के रास्ते पर चलना शुरू हुई है।
उन्होंने मेडल और पदकों की संख्या बताते हुए कहा कि यहां महिला दिव्यांग का भी सशक्तीकरण हो रहा है। यह देश के लिए शुभ संकेत है। यहां लड़कियां आगे बढ़ रही हैं और दिव्यांग भी बराबरी के आधार पर आगे बढ़ने जा रहे हैं। यह विवि दिव्यांगों के लिए मॉडल विवि बनेगा। उन्होंने कहा कि दीक्षांत छात्र जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां से आगे खुली दुनिया मिलेगी। कई नए चित्र दिखेंगे, लेकिन स्पर्धा कड़ी होगी।
आपको प्रमाणिकता और कठोर मेहनत से ही सफलता मिलेगी। किताबी शिक्षा खत्म हो रही है, लेकिन ज्ञान अर्जन आगे भी जारी रहे। राज्यपाल ने प्रेक्षागृह का नाम अटल प्रेक्षागृह रखे जाने पर खुशी जताते हुए कहा कि पूर्व पीएम का व्यक्तित्व-कृतित्व महामानव का है। एक स्मृति का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने मुझे समाज सेवा का संदेश दिया था। हम सभी को इसके लिए प्रयास करना चाहिए।