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LU के दीक्षांत समारोह में इस बार भी सबसे ज्यादा मेडल बेटियों को, राज्यपाल ने जताई खुशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
Updated Tue, 09 Oct 2018 04:54 PM IST
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दीक्षांत समारोह की एक तस्वीर।
- फोटो : amar ujala
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बहुत से विद्यार्थी मेधावी होते हैं, जबकि काफी विद्यार्थियों को लगता है कि उनमें प्रतिभा की कमी है। मेधावी होने से कहीं अधिक जरूरी है दृढ़ निश्चय वाला होना। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. डीपी सिंह ने मंगलवार को लखनऊ विश्वविद्यालय के 61वें दीक्षांत समारोह में विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए यह बातें कहीं।
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दीक्षांत समारोह में 31 हजार 793 डिग्री और 99 मेधावियों को 192 पदक दिए गए। प्रो. सिंह ने कहा कि अपने लक्ष्य को पाने के लिए आपको हार्ड वर्क और स्मार्ट वर्क में अंतर समझना होगा। पागलपन जैसे लगने वाले सपने पालिये, वह भी सच होंगे।
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किसने सोचा था कि मोबाइल जैसा यंत्र बनेगा, जिससे बिना तार के दूर-दूर तक बात हो जाएगी। यह ज्यादातर लोगों की कल्पना से परे है था कि एक हजार किलोग्राम की चीज आसमान में उड़ सकती है। अपने दीक्षांत भाषण के दौरान प्रो. सिंह ने लखनऊ के अंदाज और यहां की तहजीब की तारीफ की।
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उन्होंने यूजीसी के चेयरमैन पद पर रहते हुए देश की शैक्षिक समस्याओं के लिए काम करने का वादा भी किया। इस दौरान उन्होंने यूजीसी द्वारा विद्यार्थियों के लिए शुरू की गई नई योजनाओं की जानकारी भी दी। उन्होंने कहा किसी भी सूरत में मूल्यों से समझौता न करें तथा हमेशा सीखना जारी रखें।
यही हाल रहा तो छात्रों को देना पड़ेगा आरक्षण : रामनाईक
पदक दिखाती छात्रा
- फोटो : amar ujala
'हमारे विधार्थियों को पहली बार अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में प्लेसमेंट': लविवि कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने मुख्य अतिथि को बताया कि पेट्रोलियम पर आधारित शुरू हुए डिप्लोमा पाठ्यक्रम में इस साल पहली बार लविवि के विद्यार्थियों को अंतर्राष्ट्रीय कंपनियों में प्लेसमेंट मिला है। समारोह के दौरान अटलजी पर आधारित व्याख्यानमाला तथा कुलपति के दो साल के कार्यकाल पर आधारित दो पुस्तकों का विमोचन भी किया गया।
राज्यपाल रामनाईक ने छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में छात्रों को आरक्षण देना पड़ेगा। लविवि के दीक्षांत समारोह में इस साल 192 में से 159 पदक छात्राओं के हिस्से आए हैं। लविवि में इस साल 31 हजार 793 डिग्री दी गई हैं। इसमें भी 64 फीसदी डिग्री छात्राओं और केवल 36 फीसदी ही छात्रों के हिस्से आई हैं।
‘लविवि की अनुशासनहीनता पढ़ता हूं तो पीड़ा होती है’
राज्यपाल ने दीक्षांत भाषण के दौरान कहा कि समाचार पत्रों में रोज विवि में अनुशासनहीनता की खबरें पढ़ता हूं। ये खबरें सच भी होती हैं। इससे पीड़ा होती है। राज्यपाल ने कुलपति को अगले साल पदक की रिबन बड़ी कराने को कहा।
समारोह के दौरान राज्यपाल ने यूजीसी चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह से पारितोषिक की मांग कर डाली। राज्यपाल ने कहा कि पूरे देश में किसी राज्य में ऐसा नहीं होगा जहां सभी विवि के दीक्षांत समय से हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह इस साल नवंबर में समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में यह उनका पांचवां दीक्षांत समारोह है। इसके बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
राज्यपाल रामनाईक ने छात्राओं को बधाई देते हुए कहा कि यही हाल रहा तो आने वाले दिनों में छात्रों को आरक्षण देना पड़ेगा। लविवि के दीक्षांत समारोह में इस साल 192 में से 159 पदक छात्राओं के हिस्से आए हैं। लविवि में इस साल 31 हजार 793 डिग्री दी गई हैं। इसमें भी 64 फीसदी डिग्री छात्राओं और केवल 36 फीसदी ही छात्रों के हिस्से आई हैं।
‘लविवि की अनुशासनहीनता पढ़ता हूं तो पीड़ा होती है’
राज्यपाल ने दीक्षांत भाषण के दौरान कहा कि समाचार पत्रों में रोज विवि में अनुशासनहीनता की खबरें पढ़ता हूं। ये खबरें सच भी होती हैं। इससे पीड़ा होती है। राज्यपाल ने कुलपति को अगले साल पदक की रिबन बड़ी कराने को कहा।
समारोह के दौरान राज्यपाल ने यूजीसी चेयरमैन प्रो. डीपी सिंह से पारितोषिक की मांग कर डाली। राज्यपाल ने कहा कि पूरे देश में किसी राज्य में ऐसा नहीं होगा जहां सभी विवि के दीक्षांत समय से हो रहे हैं। उत्तर प्रदेश के सभी राज्य विश्वविद्यालयों के दीक्षांत समारोह इस साल नवंबर में समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में यह उनका पांचवां दीक्षांत समारोह है। इसके बाद उनका कार्यकाल समाप्त हो जाएगा।
मेधावी बोले, छात्रसंघ चुनाव हो
खुशी से झूमती छात्राएं
- फोटो : amar ujala
मेधावी बोले, छात्रसंघ चुनाव होः पढ़ने-लिखने वाले विद्यार्थी छात्र राजनीति से दूर रहते हैं। इस धारणा को लविवि के पदक विजेता सिरे से नकार रहे हैं। रक्षा और टी. महाश्वेता रैना का मानना है कि लविवि में छात्रसंघ चुनाव जरूर होने चाहिए।
चर्चा का विषय बन गया अंतिम डिग्री का वितरण
दीक्षांत समारोह के दौरान 99 मेधावियों को मंच से 192 पदक दिए जाने थे। मगर आखिर में अदिबा रिजवी को 100वें विद्यार्थी के रूप में मंच से डिग्री दी गई। विवि के अधिकारी भी इस पर कुछ बोलने से बचते रहे।
लविवि दीक्षांत समारोह में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज टूड़ियागंज में चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र को भी पीएचडी की उपाधि दी गई। उन्होंने डॉ. कमल सचदेव के निर्देशन व डॉ. रेखा बाजपेई, डॉ. अंतकृष्ण के सह निर्देशन में शोध किया है।
उन्होंने प्रधानाचार्य प्रो. एसएस बेदार का आभार जताया है। डॉ. धर्मेंद्र ने अम्लपित्त रोग पर शोध किया है, जिसमें मुलैठी चूर्ण से रैनीटिडीन दवा का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है, जिससे कई रोगियों को बिना साइड इफेक्ट अच्छा परिणाम मिला है।
चर्चा का विषय बन गया अंतिम डिग्री का वितरण
दीक्षांत समारोह के दौरान 99 मेधावियों को मंच से 192 पदक दिए जाने थे। मगर आखिर में अदिबा रिजवी को 100वें विद्यार्थी के रूप में मंच से डिग्री दी गई। विवि के अधिकारी भी इस पर कुछ बोलने से बचते रहे।
लविवि दीक्षांत समारोह में राजकीय आयुर्वेदिक कॉलेज टूड़ियागंज में चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेंद्र को भी पीएचडी की उपाधि दी गई। उन्होंने डॉ. कमल सचदेव के निर्देशन व डॉ. रेखा बाजपेई, डॉ. अंतकृष्ण के सह निर्देशन में शोध किया है।
उन्होंने प्रधानाचार्य प्रो. एसएस बेदार का आभार जताया है। डॉ. धर्मेंद्र ने अम्लपित्त रोग पर शोध किया है, जिसमें मुलैठी चूर्ण से रैनीटिडीन दवा का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है, जिससे कई रोगियों को बिना साइड इफेक्ट अच्छा परिणाम मिला है।