फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Controversial statements of 2014.

2014 के वो बयान जिनसे यूपी में मचा बवाल!

Tue, 23 Dec 2014 09:48 AM IST
ईश्वर आशीष/अमर उजाला, लखनऊ
ईश्वर आशीष/अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 23 Dec 2014 09:48 AM IST
विज्ञापन
Controversial statements of  2014.

वैसे तो आरोप-प्रत्यारोप के बिना राजनीति के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता है, लेकिन जब बयान हदें पार कर जाएं तो राजनीति के गिरते स्तर की भी चर्चा शुरू हो जाती है। अगर यूपी की राजनीति की बात करें तो चाहे बयानबाज आजम खां हो या खुद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव सभी यह साबित करते हैं सियासत के मैदान में जीतने और अपना प्रभुत्व दिखाने के लिए सबकुछ जायज है।

विज्ञापन


सन 2014 की शुरूआत से ही लोकसभा चुनाव के कारण बयानों ने माहौल को गर्म रखा और आमचुनाव के प्रत्येक चरण के साथ बयानबाजी तीखी और शर्मनाक होती चली गई।

अगर हम सिर्फ यूपी की ही बात करें तो यहां जो बयानबाज चर्चा में रहे उनमें सपा के कैबिनेट मंत्री आजम खां, आमचुनाव के लिए यूपी के प्रभारी बनाए गए और अब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह,  मुलायम सिंह यादव, पूर्व केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा, महंत आदित्यनाथ, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मी कांत वाजपेयी, उन्नाव से भाजपा सांसद चुने गए साक्षी महाराज और नरेंद्र मोदी शामिल हैं।

विज्ञापन

इन बयानों ने पार की सारी हदें

Controversial statements of  2014.

सबसे विवादित बयानों की लिस्ट में हम सबसे पहले उन बयानों को लेते हैं जिनके कारण आम चुनाव में प्रचार के दौरान अमित शाह और आजम खां पर चुनाव आयोग को रैली और जनसभा से रोकने के लिए प्रतिबंध तक लगाना पड़ा।

अमित शाह ने एक जनसभा के दौरान कहा था कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में यह चुनाव सम्मान का चुनाव है। अपमान के बदले का चुनाव है। एक व्यक्ति भूखा-प्यासा और बिना सोए भी रह सकता है, लेकिन उसका अपमान हुआ हो तो वह जीवित नहीं रह सकता। अपमान का बदला लिया जाना चाहिए।

अमित यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा था हमारे साथ दूसरे दर्जे के नागरिकों की तरह बर्ताव किया गया। मुगलों के समय में तलवार से बदला लिया जाता था, अब आपको बटन दबाना है।

केंद्र में जिस दिन मोदी की सरकार बनती है, उसके दो दिनों के अंदर यूपी में मुल्ला मुलायम की सरकार गिर जाएगी। आपके एक वोट से दो काम हो रहे हैं। देश में मोदी की सरकार बनेगी और सपा सरकार भी चली जाएगी।

अमित शाह के इस बयान पर विपक्षियों ने जमकर हंगामा किया। मामले को संज्ञान में लेते हुए केंद्रीय चुनाव आयोग ने शाह पर आम चुनाव के दौरान रैली और जनसभा करने पर रोक लगा दी।

आजम ने चुनाव आयोग तक को दे दी धमकी

Controversial statements of  2014.

अमित शाह की तरह आजम खां पर भी रैली और जनसभा करने पर प्रतिबंध लगा दिया गया। आजम ने कहा था कि लोग मुसलमानों को कमजोर न समझें उन्हें याद रखना चाहिए कि भारत की कारगिल जीत मुस्लिम सैनिकों की बहादुरी के कारण संभव हो पाई थी।

बयान पर मचे बवाल के बाद आयोग ने कड़ी कार्रवाई की। वहीं, आजम यहीं नहीं रूके और आयोग को सुप्रीम कोर्ट जाने तक की धमकी दे दी।

लोकसभा चुनाव में सपा की हार के बाद तो जैसे उनका गुस्सा और बढ़ता चला गया। आजम एक के बाद एक विवादित बयान देकर लगातार चर्चा में बने रहे।

अभी हाल में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को हत्यारा बनाकर उन्हें पीएम बनाने का दोष मीडिया पर मढ़ा तो आरएसएस की तुलना तालिबान से की। आजम के अनुसार संघी तालिबानी ही देश के सबसे बड़े दुश्मन हैं।

सबसे पहले इन संघी तालिबानियों को रोकिये। उन्होंने कहा कि देश के बादशाह (प्रधानमंत्री) पूरी दुनिया में इंसानियत का संदेश देते हैं जबकि यहां आपने खुली छूट दे रखी है हमें जलील करने की। चाहे वह साध्वी हों, आदित्यनाथ हों, साक्षी महाराज हो या फिर गवर्नर कल्याण सिंह हों।

अगर ये कहा जाए कि मोदी, भाजपा और आरएसएस पर विवादित बयान देना आजम का शगल है तो यह गलत न होगा।

विज्ञापन

छप्पन इंच का सीना और फिर नीची जाति के बोल

Controversial statements of  2014.

यह तो सर्वविदित है कि केंद्र की सत्ता का रास्ता यूपी से ही होकर जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए सूबे में अधिक से अधिक सीटें जीतने के लिए भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी।

गोरखपुर रैली में मोदी ने मुलायम को ललकारते हुए गुजरात के कथित विकास की गाथा गाई और सपा सुप्रीमो पर निशाना साधते हुए कहा कि 'नेता जी यूपी को गुजरात बनाने के लिए 56 इंच का सीना चाहिए।' चुनाव परिणाम आने के कई महीनों बाद भी अब मोदी पर हमला करने के लिए सपाई 56 इंच का सीना जुमले का प्रयोग कर रहे हैं।

वहीं, जब कांग्रेस के लिए अमेठी और रायबरेली में प्रचार करने वाली प्रियंका गांधी ने मोदी पर नीच राजनीति करने का आरोप लगाया तो मोदी उनके इस बयान को नीची जाति से जोड़कर चुनावी लाभ लेने की कोशिश की और कहा, ‘मैं नीच जाति का हूं मगर मेरी राजनीति नीच नहीं है। मेरे ऊपर गंदा आरोप लगाया गया। क्या नीच जाति में पैदा होना अपराध है। मुझे गालियां देनी हैं तो दीजिए, मैं झेलने को तैयार हूं मगर जाति का अपमान मत कीजिए।’मलतब प्रियंका के बयान के सहारे मोदी ने 'कास्ट कार्ड' खेला।

सपा सुप्रीमो ने दिया सबसे शर्मनाक बयान

Controversial statements of  2014.

इतने बड़े राजनेता से इस तरह के बयान की उम्मीद नहीं की जा सकती। लेकिन, एक रैली के दौरान मुलायम ने जो कहा उसने उनकी छवि ही बदल दी।

प्रदेश में दुष्कर्म के आरोपों पर उन्होंने कहा, 'लड़कियां पहले दोस्ती करती हैं। लड़के-लड़की में मतभेद हो जाता है। मतभेद होने के बाद उसे रेप का नाम दे देती हैं। लड़कों से ग‌लतियां हो जाती हैं। क्या रेप केस में फांसी दी जाएगी?'

मुलायम ने कहा, 'हमारी सरकार आएगी तो कानून बदलेंगे। ऐसे कानूनों को बदलने की कोशिश की जाएगी। दुरुपयोग करने पर सजा दी जाएगी और झूठ बोलने वालों को भी सजा मिलेगी। लड़कों से गलतियां हो जाती हैं। रेप के लिए फांसी दी जाएगी। बंबई में भी रेप के लिए फांसी दी गई है।'

सिर्फ मुलायम ही नहीं सपा के राज्यसभा सदस्य नरेश अग्रवाल ने प्रदेश में अपहरण और रेप की घटनाओं पर कहा, 'एक गाय के बछड़े को भी जबरदस्ती नहीं ले जाया जा सकता।'

बेनी बाबू तो बयानबाजी में चैम्पियन निकले

Controversial statements of  2014.

कांग्रेस से गोंडा सांसद और केंद्रीय मंत्री रहे बेनी प्रसाद वर्मा को अगर बयानबाजी में चैंपियन कहा जाए तो गलत न होगा। मोदी, अमित शाह मुलायम और शशि थरूर उन्होंने किसी को भी नहीं बख्‍शा।

उनके सबसे बड़े बयान की बात करें तो बेनी के अनुसार, 'मोदी जब 18 साल के थे तब घर से खून कर के भागे थे। हालांकि बाद में उन्होंने यह कहकर भी खुद का बचाव किया था कि उनके पास कोई सुबूत नहीं हैं और तर्क दिया कि मोदी कई साल से गुजरात के सीएम हैं और उन्होंने सारे सुबूत मिटा दिए होंगे।'

वहीं, उन्होंने मोदी के विकास दावों पर बयान दिया था कि गुजरात में शराब की स्मगलिंग होती है जिसका प्रतिमाह 100 करोड़ रुपये भाजपा नेताओं को मिलता है। बेनी ने कहा कि, चुनाव आयोग पर आज तक देश के किसी नेता ने अंगुली नहीं उठाई।

उन्होंने मोदी को आदमखोर तक करार दिया और कहा कि हमें हमें प्रधानमंत्री पद के लिए गुजरात का आदमखोर नहीं इनसान चाहिए।

इसके अलावा उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर के बारे में कहा, 'वह तो पागल है, उसका कोई इलाज नहीं है।' बेनी लगातार अपने बयानों से चर्चा में बने हुए हैं।

मदरसा देते हैं आतंकवाद की शिक्षा

Controversial statements of  2014.

भाजपा की तरफ से उन्नाव से सांसद साक्षी महाराज ने मदरसों पर बयान देकर विवाद खड़ा कर दिया। साक्षी ने कहा, 'मदरसों में आतंकवाद और लव जेहाद की शिक्षा दी जाती है। हम चाहते हैं कि मदरसों से इस्लामीकरण, लव जेहाद की बात न हो। उन्हें आधुनिक शिक्षा दी जाए ताकि मुसलमानों का भी भला हो।' उनके इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया हुई।

वहीं आजम ने साक्षी पर हमला करते हुए कहा,  'शिष्या का रेप करने वाले संसद में पहुंच रहे हैं।' इसके अलावा भाजपा के अन्य फायरब्रांड नेता महंत आदित्यनाथ भी उपचुनाव से पहले अपने बयान के कारण खासा चर्चा बटोरी। आदित्यनाथ ने कहा था कि मुसलमानों की संख्या जहां भी 10 फीसदी से ज्यादा है, वहीं दंगे होते हैं।

जहां इनकी संख्या 35 फीसदी से ज्यादा है वहां गैर मुस्लिमों के लिए कोई जगह नहीं है। अगर वह हममें से एक को मारेंगे तो यह उम्मीद रखना छोड़ दें कि वह सुरक्षित रहेंगे। अगर वह शांति से नहीं रहते हैं तो हम उन्हें सिखाएंगे कि शांति से कैसे रहा जाता है।

उन्होंने एक अन्य बयान में कहा था कि जिन्हें पाकिस्तान पसंद है, वे वहीं चले जाएं, अगर किराया न हो तो हमसे ले जाएं। भारत में रहकर किसी को राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त होने की छूट नहीं दी जा सकती। यहां संविधान विरोधी गतिविधियों को सहन नहीं किया जाएगा।

भाजपा अध्यक्ष ने दिया विध्वंसक बयान

Controversial statements of  2014.

मुरादाबाद के कांठ में हुए विवाद पर भाजपा कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष ने बयान दिया था कि बीजेपी ने उन्हें (मुरादाबाद के एसएसपी को) नागिन की तरह आंखों में उतार लिया है और उनसे दुश्मनी को दूर तक निभाया जाएगा।

उन्होंने कहा था, 'कप्तान साहब को ध्यान देने चाहिए कि वह मतांध न हों। यूपी में एसपी की सरकार अधिकतम तीन साल रहेगी... भगवान की मार धीरे से चिपकती है... पता नहीं परिवार में किस पर चिपक जाए। हम कोई असंवैधानिक काम नहीं करेंगे। एसएसपी को समाजवादी पार्टी की चाकरी करनी हो तो करें।'

वाजपेयी ने एसएसपी की योग्यता पर सवाल उठाते हुए कहा था‌ कि एसएसपी मुरादाबाद जनता की सेवा के लिए फिट नहीं हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उन्हें अपने बंगले पर तैनात कर देना चाहिए। उनके इस बयान पर विपक्ष ने जमकर हल्ला मचाया और इसे नफरत फैलाने वाला करार दिया।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed