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झूठा साबित हुआ कैंसर के इलाज का दावा, आप भी रहें सावधान!

Sun, 30 Nov 2014 02:12 PM IST
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ।
अतुल भारद्वाज/अमर उजाला, लखनऊ। Updated Sun, 30 Nov 2014 02:12 PM IST
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consumer forum case on lavanya ayurvedic centre.

उपभोक्ता फोरम ने लखनऊ स्थित लावण्य आयुर्वेदिक कायाकल्प अनुसंधान संस्थान को कैंसर के 100 प्रतिशत इलाज का भ्रामक दावा कर मरीजों को फंसाने का दोषी पाया है।

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फोरम ने एक मरीज की मौत के मामले में संस्थान पर 51,200 रुपये हर्जाना लगाते हुए उसे प्रचार करने पर रोक लगा दी। साथ ही पुराने भ्रामक और अवैज्ञानिक विज्ञापनों पर सुधारात्मक विज्ञापन करने का आदेश दिया है।
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इंदिरानगर बी ब्लॉक निवासी बालेंदु शेखर ने जिला उपभोक्ता फोरम प्रथम में शिकायत की थी कि इंदिरानगर के नीलगिरी तिराहा स्थित इस संस्थान के विज्ञापन को देखकर उन्होंने लिवर के कैंसर से पीड़ित अपनी सास किरनबाला जायसवाल के इलाज के लिए संस्थान के प्रबंध निदेशक से संपर्क किया।
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उन्होंने भरोसा दिलाया कि कैंसर शरीर के किसी भी हिस्से में या पूरे शरीर में फैला हो, संस्थान में उसका इलाज 100 प्रतिशत सफलतापूर्वक हो जाएगा।

लगातार गुमराह होती रही कैंसर की मरीज

consumer forum case on lavanya ayurvedic centre.

तीन दिसंबर 2004 को बालेंदु ने वाराणसी निवासी अपनी सास को संस्थान में दिखाया। पहले ही दिन उन्होंने 8000 रुपये की दवा खरीदी। एक सप्ताह बाद फिर से 15,000 रुपये की दवा खरीदी।

तीन जनवरी 2005 को संस्थान के कहने पर उन्होंने फिर 15,000 रुपये की दवा खरीदी। इस दौरान संस्थान का स्टाफ मरीज के परिवारीजनों को गुमराह करता रहा।

संस्थान की ओर से बताए गए परहेज और जड़ी-बूटी से बनी दवाएं खाने के बाद भी बालेंदु की सास के स्वास्थ्य में लगातार गिरावट आती रही।

करीब डेढ़ महीने बाद खराब होती तबीयत के बीच 15 जनवरी 2005 को उनकी सास की मौत हो गई। शिकायत के बाद फोरम के नोटिस का भी संस्थान की तरफ से कोई जबाव नहीं दिया गया।

इससे पहले वाराणसी में डॉक्टरों ने लिवर में फैल चुके कैंसर की जांच के बाद किरनबाला के तीन महीने से ज्यादा जीवित नहीं रहने की बात कही थी।

लावण्य संस्थान के विज्ञापनों के बहकावे में आकर बालेंदु सास का इलाज कराने के लिए उन्हें लखनऊ ले आए। यहां करीब एक महीने में उन्होंने संस्थान से 38,200 रुपये की जड़ी-बूटी खरीदी।

देश-विदेश में फैला नेटवर्क

consumer forum case on lavanya ayurvedic centre.

उपभोक्ता फोरम के वकील एलपी यादव के मुताबिक लावण्य संस्थान का नेटवर्क देश और देश से बाहर भी फैला हुआ है।
संस्थान के विज्ञापनों में किसी भी प्रकार के और हर स्टेज के कैंसर को जड़ी-बूटी के इलाज से नियंत्रित कर लेने का दावा किया जाता था।

संस्थान 3-4 महीने में कैंसर को गला कर खत्म कर देने का दावा करता था। हड्डी के ट्यूमर को भी 8 से12 महीने में ठीक करने का दावा था। उपभोक्ता फोरम ने इन दावों को गलत, अवैज्ञानिक और भ्रामक पाया।

पहले भी जिला उपभोक्ता फोरम द्वितीय में 18 मई 2012 को हुए आदेश के मुताबिक राजेंद्र प्रसाद श्रीवास्तव की शिकायत पर लावण्य संस्थान को सेवा में कमी का दोषी पाया गया था। इसमें भ्रामक प्रचार कर मरीजों से पैसा उगाहने का दोषी होने पर हर्जाना दिलाया गया था।

फोरम के अध्यक्ष विजय वर्मा ने अपने आदेश में दवाओं पर 38,200 रुपये खर्च के साथ ही 10,000 रुपये मानसिक और शारीरिक कष्ट तथा 3,000 रुपये विधिक व्यय के रूप में नुकसान की भरपाई के लिए देने को कहा है।

51,200 रुपये के हर्जाना के साथ ही फोरम ने लावण्य संस्थान को तुरंत अपने किसी भी माध्यम से अवैज्ञानिक और आधारहीन प्रचार को बंद करने और पुराने भ्रामक प्रचार को निष्प्रभावी करने के लिए सुधारात्मक विज्ञापन जारी करने का आदेश दिया।

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