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लखनऊ के दरोगा ने मां को घर में बनाया बंधक

Sun, 13 Mar 2016 01:53 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी
ब्यूरो/अमर उजाला, वाराणसी Updated Sun, 13 Mar 2016 01:53 PM IST
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constable hostage old mother in house
बूढ़ी मां - फोटो : demo pic

जिस कोख से जन्म लिया उसी मां को एक दरोगा ने छह घंटे तक ‘कैद’ में रखा। वृद्धा के कराहने की आवाज पर पड़ोसी इकट्ठा हुए और शोर शराबा किया। मंडुवाडीह पुलिस को भी इत्तला की गई।

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तब जाकर वृद्धा पुत्र की कैद से आजाद हुई। हंगामे की सूचना पर घर लौटे दरोगा ने पड़ोसियों से बदसलूकी की। मौके पर पहुंची पुलिस और लोगों को सफाई दी कि वह मां को घर में बंद कर दर्शन करने गया था।
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तीन दिनों में यह तीसरा मौका है जब एक और दरोगा की हरकतों के चलते खाकी वर्दी पर लोगों को अंगुली उठाने का मौका मिला है। भुल्लनपुर की शिवनगर कॉलोनी में रहने वाले दरोगा की तैनाती लखनऊ पुलिस लाइन में है।

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बूढ़ी मां की कराहने की आवाज आई तो इकट्ठे हुए पड़ोसी

constable hostage old mother in house
बूढ़ी मां - फोटो : demo pic

कुछ दिन पहले वह 70 वर्षीय मां, पत्नी समेत लखनऊ से वाराणसी आया था। मोहल्ले के लोगों का कहना है कि शनिवार की भोर में वह मां को घर में कैद कर कहीं चला गया। सुबह करीब छह बजे पड़ोस के एक युवक को दरोगा के घर से किसी महिला के कराहने की आवाज आई।

उसने देखा तो घर में ताला बंद था। बाउंड्री पर चढ़ने के बाद उसने खिड़की से देखा तो एक कमरे के अंदर दरोगा की मां थीं। कुछ ही देर में मौके पर लोगों की भीड़ लग गई। सुबह करीब दस बजे मंडुवाडीह पुलिस भी पहुंची। पुलिस ने दरवाजा तोड़कर महिला को बाहर निकाला। उन्हें एक पड़ोसी के घर भेजा गया।

इसी बीच दोपहर बाद करीब एक बजे दरोगा अपनी पत्नी के साथ पहुंचा और पड़ोसियों से भिड़ गया। उसने लोगों से गाली गलौज भी की। उसका कहना था कि वह लखनऊ नहीं बल्कि दर्शन करने गया था। हंगामा बढ़ता देख वह दो बजे मां को लेकर कहीं चला गया।

एसओ मंडुवाडीह फरीद अहमद का कहना है कि दरोगा के अपनी मां को घर में कैद करने की सूचना पर पुलिस मौके पर गई थी। हालांकि बाद में दरोगा घर पहुंच गया था। किसी पक्ष की ओर से तहरीर नहीं दी गई है।

मृतक आश्रित कोटे से मिली है नौकरी

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यूपी पु‌लिस - फोटो : demo pic

दरोगा के पिता पीएसी में हवलदार थे। नौकरी में रहते हुए उनकी मौत हो गई थी। उनके बेटे को मृतक आश्रित कोटे से पुलिस की नौकरी मिली। आरोपी दरोगा की मां को पेंशन भी मिलती है।

मोहल्ले के लोगों का कहना है कि दरोगा और उसके परिवार के लोग मां से अच्छा व्यवहार नहीं करते। उनका ठीक से इलाज भी नहीं कराते। पेंशन मिलने के दिन ही दरोगा उन्हें अपने साथ बैंक ले जाते हैं।

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