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टूटेगा 50 हजार लोगों का आशियाने का सपना
ऋषि मिश्र/लखनऊ
Updated Sat, 09 Nov 2013 01:03 AM IST
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प्रबंध नगर योजना में 850 एकड़ भूमि में ग्रीनलैंड के साथ ही साथ 30 फीसदी रिहायशी लैंडयूज की भूमि भी अर्जन से छोड़ने की तैयारी की जा रही है।
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यह भूमि 255 एकड़ है। इस जमीन पर अगर ग्रुप हाउसिंग निर्माण भी किया जाए तो करीब 50 हजार लोगों को आवास दिया जा सकेगा।
मगर एलडीए की इस योजना का अधिग्रहण छोड़ कर प्राधिकरण आम लोगों से उनके आशियाने का हक भी छीनने जा रहा है।
कर्मचारी यूनियन का कहना है कि इससे 30 फीसदी भूमि का अर्जन तो एलडीए के हाथ से जाएगा साथ ही अच्छे और सस्ते मकान पाने से हजारों लोग वंचित रह जाएंगे।
मगर बिल्डरों और भूमाफिया के दबाव में ग्रीनलैंड होने का बहाना किया जा रहा है। प्रबंध नगर योजना में कुल 850 एकड़ भूमि के लिए अर्जन की धारा-6 और 4 तामील किए सालों बीत चुके हैं।
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यहां मुआवजा वितरण के लिए करीब 450 करोड़ रुपये भी एलडीए जिला प्रशासन को दे चुका है। 150 करोड़ रुपये का बांध बना कर इस भूमि को बाढ़ के पानी से बचाने की कवायद भी की जा चुकी है।
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यह भूमि बेशकीमती है। मगर केवल इस बात पर कि महायोजना के हिसाब से 850 एकड़ भूमि में से 70फीसदी ग्रीन लैंड है,उसको प्राधिकरण और जिला प्रशासन अर्जन मुक्त करने की तैयारी कर रहा है।
बन सकती हैं 35 ग्रुप हाउसिंग
850 एकड़ में से जो 255 एकड़ भूमि प्राधिकरण को बतौर रिहायशी लैंडयूज के मिलेगी, उसका नियोजन करने के बाद कम से कम 35 ग्रुप हाउसिंग बिल्डिंग प्राधिकरण बना सकेगा।
नियोजन के बाद 255 एकड़ के 30 फीसदी का इस्तेमाल इमारतें बनाने के लिए किया जा सकता है। करीब 50 हजार फ्लैट इसमें बनाए जा सकेंगे।
इसमें10 हजार फ्लैट ईडब्ल्यूएस और एलआईजी सरकार की नीति के हिसाब से बनेंगे। मगर माना जा रहा है कि यह सबकुछ कागजी होगा,अगर एलडीए यह भूमि अर्जन से छोड़ देगा।