बागी विधायकों पर भाजपा नरम तो कांग्रेस ने दायर की याचिका, सदस्यता खत्म करने की मांग
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपने दलों से बगावत करके दूसरे दलों से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले विधायकों पर जहां भाजपा नरम बनी हुई है वहीं कांग्रेस ने सदस्यता समाप्त करने के लिए याचिका दाखिल कर दी है। इसमें मुजफ्फरनगर की मीरापुर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अवतार सिंह भड़ाना ने फरीदाबाद से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा तो कांग्रेस एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह ने भाजपा उम्मीदवार के रूप में रायबरेली से सोनिया गांधी के खिलाफ ताल ठोंकी। हालांकि, दोनों को ही हार का सामना करना पड़ा।
दलबदल विरोधी कानून के अनुसार किसी दल का कोई सदस्य यदि स्वत: पार्टी का त्याग कर देता है तो भी उसकी विधानमंडल या संसद की सदस्यता रद्द हो सकती है। इस आधार पर भड़ाना व दिनेश प्रताप की सदस्यता समाप्त हो सकती है। उन्होंने न केवल दलबदल किया बल्कि दूसरे दलों के चुनाव चिह्न पर चुनाव भी लड़ा।
वहीं चुनाव नतीजे घोषित हुए भी एक महीना बीतने को है लेकिन न तो भड़ाना ने ही नैतिकता के नाते विधानसभा की सदस्यता से त्यागपत्र दिया और न ही भाजपा ने ही उनके खिलाफ दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की पहल की है। कांग्रेस में शामिल होने के बावजूद उन्हें पार्टी से निलंबित तक नहीं किया गया। भाजपा की चुप्पी कई सवाल खडे़ कर रही है।
कभी सोनिया के करीबी रहे दिनेश ने उन्हीं के खिलाफ लड़ा चुनाव
वहीं कभी सोनिया के करीबी रहे दिनेश प्रताप सिंह कांग्रसे से विधान परिषद सदस्य चुने गए। उनके भाई राकेश सिंह कांग्रेस के टिकट पर ही हरचंदपुर से विधायक हैं। बड़े भाई अवधेश सिंह रायबरेली जिला पंचायत के अध्यक्ष हैं।
दिनेश प्रताप सिंह ने कांग्रेस छोड़कर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ग्रहण की। भाजपा ने उन्हें सोनिया गांधी के खिलाफ रायबरेली से उम्मीदवार बनाया। इस पर कांग्रसे ने दिनेश प्रताप के खिलाफ कार्रवाई के लिए विधान परिषद के सभापति के समक्ष याचिका दाखिल कर रखी है।
क्या है वजह
सूत्रों का कहना है कि शुरू में तो भाजपा ने चुनावी समीकरणों के नाते भड़ाना के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। इसकी बड़ी वजह गुर्जरों की नाराजगी का डर था। कांग्रेस में शामिल होने से कुछ दिन पहले ही भड़ाना ने भाजपा के सामाजिक प्रतिनिधि सम्मेलन में प्रदेश सरकार में गुर्जरों के प्रतिनिधित्व का सवाल उठाया था। कहा था कि गुर्जर समाज को मंत्रिमंडल में जगह मिलनी चाहिए। ऐसे में यदि भड़ाना के खिलाफ उस समय कार्रवाई होती तो पार्टी को नुकसान होने का डर था।
जिले से रिपोर्ट मांगी : सत्यदेव
भड़ाना के खिलाफ अब तक याचिका दायर न करने के सवाल पर भाजपा की प्रदेश अनुशासन समिति के अध्यक्ष सत्यदेव सिंह कहते हैं कि पार्टी के जो लोग भी दूसरी पार्टियों से चुनाव लड़े हैं, उनके बारे में जिलों से रिपोर्ट मांगी गई है। रिपोर्ट आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधानसभा में पार्टी के नेता होने के नाते याचिका दाखिल करने पर फैसला करेंगे।
सभापति व अध्यक्ष करेंगे फैसला
कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता अजय कुमार लल्लू का कहना है कि दिनेश प्रताप सिंह पर दलबदल विरोधी कानून लागू होता है। वह विधान परिषद की सदस्यता से इस्तीफा दिए बिना कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस ने उनकी सदस्यता समाप्त कराने के लिए विधान परिषद के सभापति को याचिका दी है। सभापति को इस पर सुनवाई कर फैसला लेना है। हरचंदपुर से विधायक राकेश सिंह के मामले में भी याचिका पर विधानसभा अध्यक्ष को फैसला करना है।