यूपी: भावनात्मक मुद्दों पर फोकस करेगी कांग्रेस, अधिक से अधिक संघर्ष करने की बनाई रणनीति
कांग्रेस यूपी में अपनी जगह बनाने के लिए अधिक से अधिक संघर्ष करेगी साथ ही संगठन की मजबूती पर भी काम करेगी। इस दौरान पार्टी नेता पूरी तरह सक्रिय रहेंगे।
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कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का यूपी में एक के बाद एक मुद्दों पर जुझारू संघर्ष यूं ही नहीं है। वह पार्टी हाईकमान की खास रणनीति पर अमल कर रही हैं। इसके तहत उन्हें कानून-व्यवस्था से जुड़े या भावनात्मक मुद्दों पर अधिकाधिक संघर्ष करना है। राहुल गांधी समेत पार्टी के सभी प्रमुख वरिष्ठ नेता भी प्रियंका का साथ देंगे।
पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि महंगाई और बेरोजगारी पर संघर्ष जरूरी है, पर इस पर पूरी तरह से फोकस जनाधार बढ़ाने में उतना फायदेमंद साबित नहीं होगा। इन मुद्दों को उठाने से जनता में जो नाराजगी पैदा होती है, उसका फायदा क्षेत्रीय दल ज्यादा उठा लेते हैं। वहीं, सोनभद्र के उभ्भा कांड, हाथरस और उन्नाव के रेप पीड़िता कांड जैसे मुद्दों पर संघर्ष से जनता के एक बड़े तबके और खासकर उस समुदाय विशेष से भावनात्मक रूप से जुड़ने का मौका मिलता है। यह जुड़ाव पार्टी के बारे में जहां सकारात्मक दृष्टिकोण और जुझारू छवि विकसित करता है, वहीं मतदाताओं को करीब लाने का लक्ष्य भी हासिल होता है।
लखीमपुर खीरी में किसानों को गाड़ी से कुचलने की घटना पर कांग्रेस का मुखर विरोध और प्रियंका के तेवर इसी रणनीति का हिस्सा हैं। प्रदेश में महज तीन-चार महीने बाद ही चुनाव होने हैं। पार्टी के भरोसेमंद सूत्र बताते हैं कि कानून-व्यवस्था पर सवाल खड़ा करने वालीं आपराधिक वारदातें और जुल्म व अत्याचार के मामले जहां भी सामने आएंगे, प्रियंका के नेतृत्व में कांग्रेस अपनी पूरे जज्बे के साथ मैदान में उतरकर विरोध के स्वर बुलंद करेगी। महंगाई और बेरोजगारी सरीखे मुद्दों पर विरोध करने के लिए ब्लॉक-तहसील से लेकर जिलास्तर तक के कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों को अधिकाधिक लगाया जाएगा।
आंदोलन से ब्रेक मिलने पर नहीं बैठना है घरों में
कांग्रेस के रणनीतिकारों ने अपने पदाधिकारियों को स्पष्ट कहा है कि संघर्ष से पैदा हुई सहानुभूति पार्टी के पक्ष में हवा बनती हुई तभी दिखेगी, जब हर गांव और मोहल्ले में हमारा संगठन होगा। अनियोजित या निष्क्रिय संगठन चुनाव में सफलता नहीं दिला सकता। इसलिए एक आंदोलन से दूसरे आंदोलन के बीच मिलने पर ब्रेक में घर पर नहीं बैठना है। बल्कि, ग्राम स्तर पर संगठन को मजबूत करना है। न सिर्फ टीम खड़ी करनी है, बल्कि उसे सक्रिय भी करना है।