बेअसर रहे यूपी कांग्रेसी, पूरा प्रदर्शन हुआ सुपर फ्लॉप
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लोकसभा में कांग्रेस के 25 सांसदों को सस्पेंड करने के विरोध में मंगलवार को यूपी कांग्रेस का प्रदर्शन रस्म अदायगी बनकर रह गया। कांग्रेसियों ने ऐलान तो राजभवन घेरने का किया था लेकिन ऐन मौके पर कार्यक्रम बदल दिया।
इसकी जानकारी आम कांग्रेसी नेताओं को भी नहीं दी गई। सुबह पौने दस बजे जीपीओ पहुंचे कुछ नेताओं ने भाजपा कार्यालय के घेराव का कार्यक्रम बना डाला।
गिनती के कांग्रेसी नेता जीपीओ से निकले और भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ गए। कैपिटल तिराहे के पास पुलिस ने बैरीकेडिंग की थी। कांग्रेसियों ने यहां पुलिस के साथ हल्की धक्का-मुक्की कर फोटो खिंचाई और कुछ ही देर में वापस जीपीओ लौट गए।
बमुश्किल 20 मिनट में विरोध-प्रदर्शन का यह पूरा कार्यक्रम निपट गया। विरोध की औपचारिकता निभाने के बाद कांग्रेसी वापस प्रदेश कांग्रेस दफ्तर पहुंचे। प्रदर्शन में मुख्य रूप से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री, विधायक रीता बहुगुणा जोशी, सत्यदेव त्रिपाठी, वीरेन्द्र मदान आदि शामिल रहे।
तय कुछ होता है हो कुछ जाता है
कांग्रेस के कार्यक्रमों की जानकारी उनके प्रवक्ताओं तक को नहीं रहती। तय कुछ होता है और बाद में बदल दिया जाता है। मंगलवार को भी यही हुआ। सोमवार की रात कांग्रेस मीडिया कमेटी के चेयरमैन सत्यदेव त्रिपाठी व प्रवक्ता वीरेन्द्र मदान ने बताया कि मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे कांग्रेसी प्रदेश कार्यालय से राजभवन की ओर कूच करेंगे।
राजभवन गेट पर ही कांग्रेसी बैठ जाएंगे। लेकिन सुबह कुछ कांग्रेसियों ने भाजपा कार्यालय जाने का कार्यक्रम बना लिया लेकिन इसकी जानकारी आम कार्यकर्ताओं को नहीं दी। इस कारण प्रदर्शन में मुट्ठी भर लोग ही पहुंचे। सत्यदेव त्रिपाठी ने कहा, उन्हें भी कार्यक्रम में बदलाव की जानकारी मंगलवार सुबह साढ़े नौ बजे तब मिली जब वे कांग्रेस दफ्तर पहुंचे।
हाईकमान को दिखाने के लिए हो रहे प्रदर्शन
कांग्रेस के धरना प्रदर्शन केवल हाईकमान को दिखाने के लिए हो रहे हैं। हाईकमान के निर्देश पर प्रदर्शन करना यूपी के नेताओं की मजबूरी है। इसलिए वे प्रदर्शन तो करते हैं लेकिन रस्म अदायगी बनकर रह जाते हैं। इससे पहले रेल रोको अभियान में भी प्रदेश कांग्रेस नेताओं ने औपचारिकता ही निभाई। यही हाल मोदी के खिलाफ निकाली गई झांकी का भी रहा।