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अपने गढ़ अमेठी-रायबरेली में हार गई कांग्रेस, वोटों में भी पिछड़े

Sun, 12 Mar 2017 09:32 PM IST
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ
शोभित श्रीवास्तव/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sun, 12 Mar 2017 09:32 PM IST
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 congress performance in UP election.
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी चुनाव प्रचार के दौरान

यूपी विधानसभा चुनाव के नतीजों से साफ है कि जनता को अखिलेश व राहुल का ‘यह साथ’ पसंद नहीं आया। दोनों के साथ को जनता ने सिरे से नकार दिया। अविभाजित यूपी में 1951 में 388 सीट जीतने वाली कांग्रेस इस बार साइकिल की सवारी करने के बावजूद सिर्फ सात सीटों पर ही सिमट गई।

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पहले से ही सूबे में हिचकोले खा रही कांग्रेस की नाव को गठबंधन ने और डुबो दिया है। खास बात यह है कि सपा के साथ मिलकर भी कांग्रेस अपने गढ़ रायबरेली व अमेठी तक को नहीं बचा पाई। दोनों ही जिलों में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है।
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कांग्रेस की स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वर्ष 2012 के चुनाव में जहां 11.63 प्रतिशत वोट मिले थे इस बार उसे महज 6.2 फीसदी वोट ही मिले हैं। साफ है कि कांग्रेस को सपा के साथ दोस्ती का कोई फायदा नहीं मिला।

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अपने ही वोट बैंक को नहीं सहेज पाई कांग्रेस

 congress performance in UP election.

कांग्रेस प्रत्याशियों को सपा के वोट मिलना तो दूर, वह खुद अपना वोट बैंक भी नहीं सहेज पाई। कांग्रेस के जो सात विधायक जीते हैं, उनमें पार्टी से ज्यादा उनकी खुद की मेहनत है।

यदि 2012 के चुनाव से तुलना की जाए तो तब कांग्रेस ने रालोद के साथ चुनाव लड़ा था। उस समय कांग्रेस को 28 सीटें मिली थीं, जबकि इस बार उसकी हालत यूपी के इतिहास में सबसे ज्यादा 'पतली' हो गई है। सपा के साथ गठबंधन में कांग्रेस ने सूबे में 114 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। इनमें से 107 प्रत्याशियों को जनता ने नकार दिया।

मोदी की सुनामी में उड़े कांग्रेस के दिग्गज
मोदी की सुनामी में कांग्रेस के बड़े-बड़े दिग्गज उड़ गए। कांग्रेस विधानमंडल दल के नेता प्रदीप माथुर, पूर्व केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद वाराणसी की पिंडरा सीट से चार बार के विधायक अजय राय, मड़िहान से विधायक ल‌लितेश पति त्रिपाठी समेत गई दिग्गज भी चुनाव हार गए।

अमेठी में चारों सीटें हारी कांग्रेस

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राहुल गांधी अमेठी तक को नहीं बचा पाए। यहां की जगदीशपुर, गौरीगंज, तिलोई व अमेठी चारों ही विधानसभा सीटों पर कांग्रेस को करारी हार मिली है। सांसद संजय सिंह लाख कोशिशों के बावजूद अमेठी सीट पर अपनी दूसरी पत्नी अमीता सिंह को नहीं जिता पाए।

सोनिया गांधी की रायबरेली की छह में से चार सीटों पर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा है। केवल रायबरेली व हरचंदपुर सीट ही कांग्रेस की इज्जत बचा पाए हैं।

...पर बेटियों ने बचा ली अपनी विरासत
कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा उर्फ मोना अपने पिता की विरासत बचाने में कामयाब रहीं। वे रामपुर खास सीट से चुनाव जीत गई हैं। रायबरेली से अखिलेश सिंह की बेटी अदिति सिंह चुनाव जीत गई हैं। अदिति 89 हजार से अधिक वोटों से चुनाव जीती हैं।

अकेले लड़ते तो बेहतर रहती तस्वीर
कांग्रेस ने जब-जब किसी के साथ गठबंधन किया, उसकी स्थिति बदतर होती गई। पहली बार 1996 में बसपा के साथ समझौता किया और 126 सीटों पर चुनाव लड़ी। तब उसे 28 सीटें मिलीं। इस गठबंधन से कांग्रेस को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई आज तक नहीं हो पाई।

27 साल यूपी बेहाल नारे से पलटना पड़ा भारी

 congress performance in UP election.
राहुल गांधी - फोटो : amar ujala

कांग्रेस ने सूबे में ‘27 साल यूपी बेहाल’ नारे के साथ चुनाव प्रचार अभियान की शुरुआत की थी। राहुल गांधी ने इसी नारे के साथ सूबे की दुर्दशा को फोकस करते हुए चुनाव प्रचार अभियान शुरू किया था।

किसानों का कर्ज माफ व बिजली बिल हाफ मुद्दे को लेकर राहुल ने सूबे में किसान यात्रा निकाली। लेकिन चुनाव घोषित होने के साथ ही कांग्रेस ने सपा का दामन थाम लिया। इसके बाद कांग्रेस ने अपना नारा 27 साल यूपी बेहाल वापस ले लिया। सूबे की जनता को कांग्रेस का पलटना पसंद नहीं आया।

पीके की रणनीति हुई फेल
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी को जीत दिलाने के बाद बिहार में नीतीश कुमार को सत्ता की चाबी सौंपने के बाद इस बार पीके को कांग्रेस ने यूपी के लिए अपना चुनाव रणनीतिकार बनाया था। पीके ने समाजवादी पार्टी से गठबंधन भी कराया। पर मोदी की रणनीति के आगे न सिर्फ सपा ढेर हुई बल्कि कांग्रेस का भी सूबे से सूपड़ा साफ हो गया।

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