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Loksabha Election 2024: क्षेत्रीय दलों की चली तो यूपी में सिर्फ चार सीटों पर लड़ सकेगी कांग्रेस
Sun, 16 Apr 2023 11:01 AM IST
ishwar ashish
अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
अजित बिसारिया, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Sun, 16 Apr 2023 11:01 AM IST
सार
यूपी में विपक्षी दल कांग्रेस को सिर्फ वो ही सीटें देना चाहते हैं जहां कांग्रेस 2019 में जीती या फिर दूसरे नंबर पर रही है। ऐसे में कांग्रेस को सिर्फ चार सीटें मिलने की ही संभावना है। हालांकि, कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि सीटों के बंटवारे पर अभी कोई सर्वमान्य फॉर्मूला तैयार नहीं हुआ है।
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कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पक्ष-विपक्ष अभी से लोकसभा चुनाव की बिसात बिछाने में लगे हैं। एक ओर भाजपा व सहयोगी दल हैं तो दूसरी ओर कद्दावर क्षेत्रीय दल और कांग्रेस। सीटों के बंटवारे को लेकर क्षेत्रीय दलों का फॉर्मूला माना गया तो यूपी में कांग्रेस सिर्फ चार सीटों पर ही चुनाव लड़ सकेगी। हालांकि, कांग्रेस नेतृत्व का कहना है कि फिलहाल सीटों के बंटवारे को लेकर कोई सर्वमान्य फॉर्मूला तय नहीं हुआ है।
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एनसीपी नेता शरद पवार और जदयू नेता व बिहार के सीएम नीतीश कुमार के कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व से मिलने के बाद इस फॉर्मूले की चर्चा तेज है। क्षेत्रीय दलों के फॉर्मूले के अनुसार, कांग्रेस उन्हीं सीटों पर चुनाव लड़े, जहां 2019 के लोकसभा चुनाव में वह या तो जीती या फिर दूसरे स्थान पर रही। पिछले चुनाव में देश में इस तरह की कुल 262 सीटें रही थीं। यूपी में देखें तो कांग्रेस ने सिर्फ रायबरेली सीट जीती थी, जहां से सोनिया गांधी सांसद हैं। इसके अलावा तीन सीटों अमेठी, फतेहपुर सीकरी और कानपुर सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी।
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यहां से क्रमशः राहुल गांधी, राजबब्बर और श्रीप्रकाश जायसवाल चुनाव लड़े थे। इस तरह उसके हिस्से में चार सीटें ही आ रही हैं। हालांकि, प्रदेश कांग्रेस कमेटी इस फॉर्मूले पर तैयार नहीं है। उसके नेताओं का कहना है कि लोकसभा की सीटों के लिहाज से हम मुख्य विपक्षी दल हैं और सबसे बड़े राज्य यूपी में इतनी कम सीटें लेकर किसी गठबंधन में जाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। हाईकमान भी इस पर कभी तैयार नहीं होगा। कांग्रेसियों का कहना है कि भाजपा को हराने के लिए शीर्ष नेतृत्व ने समान विचार वाले दलों से चर्चा जरूर की है, पर अभी सीटों के बंटवारे को लेकर कोई निश्चित मत नहीं बना है।
क्षेत्रीय दलों का साथ दे कांग्रेस : अखिलेश
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव केंद्र की सत्ता से भाजपा को हटाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर कॉमन प्लेटफार्म तैयार करने का लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके लिए डीएमके नेता व तमिलनाडु के सीएम एमके स्टालिन, भारत राष्ट्र समिति के नेता व तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव व तृणमूल कांग्रेस की नेता व पश्चिमी बंगाल की सीएम ममता बनर्जी समेत कई राज्यों के क्षत्रपों के लगातार संपर्क में हैं। लोकसभा चुनाव को लेकर विपक्ष की रणनीति के सवाल पर अखिलेश कहते हैं कि कई राज्यों में क्षेत्रीय दल काफी मजबूत हैं। कांग्रेस को उनका साथ देने और उन्हें और मजबूत करने का काम करना चाहिए, ताकि भाजपा को सत्ता से बेदखल किया जा सके।
अभी बातचीत सिर्फ सैद्धांतिक स्तर पर : प्रमोद
राज्यसभा में कांग्रेस के उप नेता प्रमोद तिवारी लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सीटों के बंटवारे के किसी फॉर्मूले के अभी तय होने से इनकार करते हैं। तिवारी कहते हैं कि अभी तो भाजपा को हराने के लिए विपक्षी दलों के नेताओं के साथ बैठक करके सैद्धांतिक सहमति बनी है। इसी का परिणाम है कि संसद के मौजूदा घटनाक्रम से 20-21 दल एक साथ आए। जब भी सीटों के बंटवारे का कोई सर्वमान्य फॉर्मूला तय होगा, उसे बताया जाएगा।