मदरसों के लिए बड़े बदलाव करेंगे मुख्यमंत्री अखिलेश
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प्रदेश सरकार अब मदरसों को अनुदान देने के लिए मानकों को घटाने जा रही है। इसके लिए एक प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। इसे कैबिनेट से मंजूरी दिलाई जाएगी। यह सारी कवायद इसलिए हो रही है ताकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की घोषणा पूरी की जा सके।
दरअसल, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वर्ष 2012 में सरकार बनाने के तत्काल बाद प्रदेश के 146 मदरसों को अनुदान देने का ऐलान किया था। उस समय तय हुआ था कि वर्ष 1998 तक स्थापित मदरसों को ही इसमें लिया जाएगा।
लेकिन जब प्रस्ताव मांगे गए तो वर्ष 1998 तक स्थापित होने की शर्त के कारण काफी कम मदरसे ही अनुदान के दायरे में आ रहे थे। लिहाजा सरकार ने वर्ष 2003 तक स्थापित मदरसों से प्रस्ताव देने को कहा।
इसके बाद 194 प्रस्ताव मिल तो गए लेकिन इनमें से करीब एक दर्जन ही ऐसे मिले जो सभी मानकों को पूरा करते हैं। एक तरफ नियम आड़े आ रहे हैं तो दूसरी तरफ अनुदान सूची में शामिल करने की मांग को लेकर आए-दिन धरना प्रदर्शन हो रहे हैं।
इसलिए डर रही है सरकार
सरकार को भी यह डर सता रहा है कि कहीं उसका मुस्लिम वोटर नाराज होकर खिसक न जाए। इन सभी को देखते हुए सरकार ने अब मानकों को शिथिल करने अनुदान देने का रास्ता निकाला है।
क्या कर सकती है सरकार
सरकार पहले चरण में उन मदरसों को अनुदान देने की तैयारी कर रही है जिनके सारे मानक पूरे हैं। इसके साथ ही उन मदरसों को सारे मानक पूरे करने को कहा जा सकता है जो उस पर खरे नहीं उतर रहे हैं। इसके लिए मदरसा संचालकों को समय दिया जा सकता है।
साथ ही उन्हें भी आवेदन का मौका दिया जा सकता है जिन्होंने उस समय मानक पूरे न होने के कारण अपने मदरसों को अनुदान दिलवाने के लिए आवेदन नहीं किया था। सरकार इसमें फूंक-फूंक कर इसलिए भी कदम रख रही है ताकि बाद में कोई न्यायालय की शरण में न चला जाए।
अनुदान के लिए यहां दी जा सकती है छूट
-मदरसों में छात्र संख्या 100 होनी चाहिए। सरकार इसमें छूट दे सकती है।
-तय संख्या में निर्धारित योग्यता रखने वाले अध्यापक नियुक्त होने चाहिए। सरकार शिक्षकों की संख्या भी कम कर सकती है।
-मदरसों का अपना निजी भवन होना चाहिए, साथ ही पर्याप्त शिक्षण कक्ष मौजूद हों। इसमें भी सरकार ढिलाई दे सकती है।