निकाय चुनाव: शादी-समारोह, दावत में 'खास' बने प्रत्याशी तो चुनाव खर्च में जुड़ेगा दावत का खर्चा
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यूपी में निकाय चुनाव के दौरान नाते-रिश्तेदार या मित्रों के यहां होने वाले शादी, मुंडन या जन्मदिन समारोह में ज्यादा खास मेहमान बनना चुनाव प्रत्याशियों के लिए भारी पड़ेगा। ऐसे आयोजनों में हिस्सेदारी के दौरान यदि जरा भी प्रचार का अंदेशा मिला तो दावत का खर्च चुनावी खर्च में जोड़ दिया जाएगा।
आदर्श आचार संहिता के अनुपालन के लिए निजी उत्सवों में प्रत्याशियों की भागीदारी पर नजर रखने के लिए वीडियोकैमरा युक्त सर्विलांस टीमें बनाई गई हैं।
उप जिला निर्वाचन अधिकारी एडीएम वित्त राजस्व शत्रुघ्न सिंह ने बताया कि निकाय चुनाव के दौरान ही सहालगों का दौर शुरू हो रहा है। शुभ दिनों के चलते मुंडन जैसे समारोहों की भी धूम रहेगी। समारोह का चुनावी फायदा उठाने की कोशिश की जा सकती है।
ऐसे समारोहों में समर्थकों की फौज के साथ पहुंचने वाले प्रत्याशियों पर सर्विलांस टीम नजर रखेगी। यदि प्रचार का शक हुआ तो दावत के खर्च को प्रत्याशी के चुनाव खर्च में शामिल मान लिया जाएगा। ऐसे प्रत्याशियों की विशेष निगरानी की जाएगी।
प्रशासन जुटाने लगा मांगलिक आयोजनों की जानकारी
प्रभारी अधिकारी ने बताया कि इसके लिए नगर निगम क्षेत्र में जोनवार और नगर पंचायत में तहसीलवार सर्विलांस टीमों का गठन कर निगरानी में लगाया जाएगा। छह सदस्यीय सर्विलांस टीम में शामिल मजिस्ट्रेट, सीओ सहित नामित सदस्य अपने-अपने जोन में प्रत्याशियों पर कड़ी नजर रखेंगे।
इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर एक नवबंर से 25 नवंबर तक हर जोन के प्रमुख गेस्ट हाउस, होटल व शादी लॉन में आयोजित होने वाले मांगलिक कार्यक्रमों की जानकारी जुटाई जा रही। प्रत्याशी सिर्फ घर परिवार के सदस्यों के साथ बिना चुनावी प्रचार के उद्देश्य के ऐसे आयोजनों में हिस्सेदारी कर सकता है।
लेखपाल, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता से लेंगे खुफिया जानकारी
शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू स्तर पर आयोजित होने वाले ऐसे पारिवारिक आयोजनों का फायदा चुनाव प्रचार के उद्देश्य से करने वाले प्रत्याशियों की निगरानी और धरपकड़ के लिए लेखपाल, संग्रह आमीन, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं व प्राइमरी स्कूलों के शिक्षकों की मदद ली जाएगी।
इस्तेमाल भी खुफिया जानकारी जुटाने में करेगा। इनके माध्यम से प्राप्त जानकारी के आधार पर ही आचार संहिता का उल्लंघन रोकने को गठित विडियो सर्विलॉस टीम अथवा स्टेटजिक दस्ता मौके पर त्वरित कार्रवाई तय करेगा।
धार्मिक आयोजनों की अनुमति लेना भी जरूरी
सार्वजनिक स्थल पर किसी भी तरह का धार्मिक आयोजन करने और इसमें भावी प्रत्याशियों को बुलाने के लिए भी आयोजकों को संबंधित जोन के आरओ से लिखित अनुमति लेना जरूरी होगा।
किसी मंदिर या पूजा स्थल पर अखंड रामायण पाठ, भंडारा, देवी जागरण, कव्वाली का आयोजन करने के लिए भी आयोजक को संबंधित आरओ से अनुमति लेनी होगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित करना होगा कि इस दौरान चुनाव मैदान में मौजूद प्रत्याशी या उसके समर्थक आयोजन का फायदा चुनाव प्रचार में न उठाने पाएं।