कंप्यूटरजी बताएंगे एलडीए ने कहां, कैसे और कितना काम किया

ऋषि मिश्र/लखनऊ Updated Wed, 27 Nov 2013 01:51 AM IST
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प्राधिकरण की ओर से जनता के लिए सालाना किए जा रहे 2000 करोड़ रुपये के कार्यों में कोई घालमेल न किया जा सके।
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इसे लेकर पहल की जा रही है। प्राधिकरण ने यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के जरिए एक सॉफ्टवेयर डवलप कराया है।
इसके माध्यम से किसी भी परियोजना का ठेका उठाने से पहले उसका एस्टीमेट (कुल बजट),एप्रूवल और काम के पेमेंट होने तक तमाम स्वीकृति प्राधिकरण के अधिकारी ऑनलाइन करेंगे।
इससे गड़बड़ी की आशंका न के बराबर हो जाएगी। यहां तक अवैध निर्माण नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण जैसी तमाम जानकारियों को भी ऑनलाइन किया जाएगा।

शुरुआत में यह व्यवस्था केवल प्राधिकरण के अंतर्गत होगी और कुछ समय बाद प्राधिकरण की वेबसाइट के माध्यम से इसको आम लोगों के लिए भी खोल दिया जाएगा।

गुणवत्ता और अन्य मामलों से जुड़ी शिकायतें भी परियोजनावार लोग कर सकेंगे। यह व्यवस्था लागू होने में अभी करीब दो महीने का समय लगेगा।

लखनऊ विकास प्राधिकरण इन दिनों खुद को तकनीकी रूप से और सक्षम करने में लगा हुआ है।इसमें उसकी मदद यूपी इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड कर रहा है। इसमें दो कामों की घोषणा

एलडीए पहले ही कर चुका है। एक दिसंबर से ई-टेंडरिंग को लागू किया जा रहा है।जबकि,ऑनलाइन किस्तों के भुगतान की व्यवस्था भी बहुत जल्द शुरू की जाएगी।अब

तीसरी पहल इंजीनियरिंग विभाग की सारी प्रक्रिया ऑनलाइन करने की है।इसके लिए सिस्टम प्रबंधक सुनील भटनागर के नेतृत्व में एक कमेटी का गठन किया गया है,जबकि,तकनीकी रूप से सक्षम इंजीनियरों की एक टीम उनके साथ लगाई गई है।

यह सॉफ्टवेयर बनाया जा चुका है। इसको लेकर सुनील भटनागर बुधवार को संबंधित अधिकारियों की बैठक भी लेंगे।

यह होगा नए सिस्टम मेकिसी भी परियोजना का एस्टीमेट का प्रस्ताव ऑनलाइन फारमेट के जरिए अधिकारियों को मिलेगा।

ऑनलाइन एस्टीमेट स्वीकृत या अस्वीकृत किया जाएगा। स्वीकृति के बाद ऑनलाइन ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के जरिए ठेकेदार तय होगा।

कितना काम हुआ,इसे समय-समय पर अपडेट किया जाएगा। इस दौरान पेमेंट की स्वीकृति भी ऑनलाइन होगी।

बैंकिंग आरटीजीएस के जरिए ठेकेदार को पेमेंट अब सीधे एलडीए से होगा। परियोजना की पूरी जानकारी,बजट और उसके निर्माण के प्रतिशत के बारे में वेबसाइट पर सूचना होगी।

आम लोग अपने इलाके के निर्माण गुणवत्ता और देरी संबंधित शिकायतें भी कर सकेंगे। अवैध निर्माणों की जानकारी होगी
डिटेल कितने नोटिस,कितनी सील और कितने ध्वस्तीकरण की होंगी। लोग अवैध निर्माण संबंधी शिकायतें भी वेबसाइट के माध्यम से कर सकेंगे।

यह फर्क पड़ेगा
फिलहाल फाइलों के माध्यम से जो काम होता है, उसमें कई बार एक ही एस्टीमेट की कई फाइलें बना दी जाती हैं,जिसको बोगस एस्टीमेट कहा जाता है। ऐसे बोगस एस्टीमेट नहीं बनाए जा सकेंगे।

ठेकेदारों को पेमेंट में होने वाले गड़बड़ घोटालों पर लगाम लगेगी।आम लोगों के लिए मौका होगा कि,वे अपने इलाके के निर्माण में गुणवत्ता को लेकर एलडीए पर दबाव बना सके।अवैध निर्माण की शिकायतों और कार्रवाई दबाई नहीं जा सकेंगी।
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