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प्रमोशन में तथ्य छिपाने पर केंद्र, सेनाध्यक्ष व सैन्य सचिव पर 50 लाख का हर्जाना

Sat, 14 May 2016 09:04 AM IST
मनोज कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ
मनोज कुमार सिंह/अमर उजाला, लखनऊ Updated Sat, 14 May 2016 09:04 AM IST
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- फोटो : Demo

सशस्त्र सैन्य बल अधिकरण की लखनऊ क्षेत्रीय बेंच ने प्रमोशन के मामले में मिलीभगत कर तथ्यों को छिपाने को लेकर केंद्र सरकार, चीफ ऑफ द आर्मी स्टाफ तथा सैन्य सचिव पर 50 लाख रुपये का हर्जाना ठोका है। हर्जाने की यह रकम इस पूरे प्रकरण में जांच के बाद जवाबदेह पाए जाने वालोक वेतन या पेंशन से वसूली जाएगी।

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यही नहीं, अपने प्रमोशन के मामले में अर्जी दाखिल करने वाले ब्रिगेडियर एनके मेहता पर भी अधिकरण ने 5 लाख का हर्जाना लगाया है। हर्जाने की यह रकम दो माह में जमा करनी होगी। हर्जाने के कुल 55 लाख रुपये सेना के केंद्रीय कल्याण कोष को दिए जाएंगे।
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अधिकरण ने यह भी निर्देश दिया कि इस आदेश की कॉपी प्रधानमंत्री व रक्षामंत्री के दफ्तरों समेत रक्षा सचिव को तीन दिन में भिजवाई जाए, जिससे वे इसके आलोक में जरूरी कार्रवाई कर सकें।
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साथ ही, अधिकरण ने अर्जीदाता की ओर से इस मामले में मांगी गई राहत मंजूर करने से इन्कार करते हुए इसे खारिज कर दिया। साथ ही कहा कि वह राहत पाने का हकदार नहीं है और मूल पद पर वापस भेजे जाने लायक है।

2012 में दायर हुई थी याचिका, मिलीभगत ने सिस्टम को कर दिया फेल

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अधिकरण के न्यायिक सदस्य न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह और प्रशासनिक सदस्य एयर मार्शल अनिल चोपड़ा की खंडपीठ ने शुक्रवार को ब्रिगेडियर एनके मेहता की ओर से वर्ष 2012 में दायर अर्जी का निपटारा करते हुए यह अहम फैसला सुनाया।

अर्जीदाता ने खुद को मेजर जनरल रैंक पर प्रमोशन के लिए यह अर्जी दायर की थी। इसमें चयन बोर्ड संख्या-एक के 13/14 अक्तूबर 2011 के परिणाम को चुनौती दी गई थी, जिसमें इस मामले के प्रतिपक्षी मेजर जनरल आरएस राठौर की उक्त पद पर तैनाती के लिए सिफारिश की गई थी।

मिलीभगत ने सिस्टम को कर दिया फेल
अधिकरण ने कहा कि अर्जीदाता और पक्षकारों केंद्र सरकार, सेनाध्यक्ष व सैन्य सचिव ने तथ्यों को छिपाया। उनकी सक्रिय सहभागिता की वजह से चयन प्रक्रिया के मानक बनाए रखने में पूरा सिस्टम फेल हो गया।

अधिकरण ने इस टिप्पणी के साथ हर्जाना भरने के आदेश दिए। साथ ही सरकार को छूट दी है कि  सेना या रक्षा मंत्रालय में ऐसे अनुचित आचरण के जिम्मेदार लोगों के खिलाफ जांच करवाकर कानून के तहत कार्यवाही की जा सकेगी।

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