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एकेटीयू में 811 करोड़ से बनेगी कंपनी, इनोवेशन को लगेंगे पंख
Fri, 17 Jul 2020 04:07 PM IST
ishwar ashish
अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ
अक्षय कुमार, अमर उजाला, लखनऊ
Published by: ishwar ashish
Updated Fri, 17 Jul 2020 04:07 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
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प्रदेश में स्टार्टअप और इनोवेशन को पंख लगाने के लिए सरकार व डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एकेटीयू) की संयुक्त पहल पर कवायद शुरू हो गई है। इसके लिए एक डेडिकेटेड कंपनी होगी, जो किसी भी व्यक्ति के अच्छे आइडिया को लेने, उसका मॉडल डिजाइन करने, प्रोटोटाइप बनाने, टेस्टिंग व आर्थिक सहयोग कर बाजार तक पहुंचाने का काम करेगी। इस पर पांच साल में 811.52 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने व उनके अच्छे विचारों को मूर्त रूप देकर बाजार तक पहुंचाने की कवायद चल रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भी यह काफी महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में प्रदेश में इनोवेशन, इन्क्यूबेशन व स्टार्टअप को गति देने की कवायद तेज हुई है।
हाल में एकेटीयू ने आईआईटी कानपुर के सहयोग से इसका प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसे कार्य परिषद से एप्रूवल के बाद शासन के पास कंपनी गठन की औपचारिकता के लिए भेजा गया है। इसके नोडल इंचार्ज प्रो. मनीष गौड़ ने बताया कि स्पेशल परपज व्हीकल के तहत हम एक कंपनी का गठन करेंगे। जिसे सेंटर फॉर एक्सीलेंस : इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड स्टार्टअप नाम दिया गया है।
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युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने व उनके अच्छे विचारों को मूर्त रूप देकर बाजार तक पहुंचाने की कवायद चल रही है। आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत भी यह काफी महत्वपूर्ण है। इसी क्रम में प्रदेश में इनोवेशन, इन्क्यूबेशन व स्टार्टअप को गति देने की कवायद तेज हुई है।
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हाल में एकेटीयू ने आईआईटी कानपुर के सहयोग से इसका प्रोजेक्ट तैयार किया है, जिसे कार्य परिषद से एप्रूवल के बाद शासन के पास कंपनी गठन की औपचारिकता के लिए भेजा गया है। इसके नोडल इंचार्ज प्रो. मनीष गौड़ ने बताया कि स्पेशल परपज व्हीकल के तहत हम एक कंपनी का गठन करेंगे। जिसे सेंटर फॉर एक्सीलेंस : इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड स्टार्टअप नाम दिया गया है।
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देश-विदेश के भी देख रखे हैं मॉडल
सेक्शन आठ में खुलने वाली इस कंपनी का अपना एक सीईओ होगा। इसकी अपनी सेप्रेट बिल्डिंग होगी, जहां इससे जुड़ी अत्याधुनिक तकनीक, सुविधा होगी। किसी भी व्यक्ति के विचार को एकत्र करके विशेषज्ञ उसकी मार्केट वैल्यू देखेंगे। उसी के हिसाब से उसे डिजाइन करने, उसका प्रोटोटाइप मॉडल बनाने का काम होगा। फिर उसको आर्थिक सहयोग कर बाजार उपलब्ध कराएंगे। जरूरत पड़ने पर उस व्यक्ति के विचार या मॉडल पर पेटेंट कराने में भी सहयोग करेंगे।
पांच साल में इसमें लगेंगे 811 करोड़ रुपये
प्रो. गौड़ ने बताया कि यह पूरा प्रोजेक्ट पांच साल का 811.52 करोड़ का है। इसमें एकेटीयू 500 करोड़ लगाएगा। जबकि 311 करोड़ इस कंपनी की अपनी कमाई होगी। छह साल में यह कंपनी आत्मनिर्भर होगी। इसमें ओडीओपी को एक क्लस्टर के रूप में जोड़ा जाएगा। साथ ही कालीन, टेराकोटा, एमएसएमई को भी गति देने का काम करेंगे।
एकेटीयू इनोवेशन, इन्क्यूबेशन पर काफी समय से काम कर रहा है, लेकिन अब वह इसे बहुत व्यापक रूप देने में जुट गया है। यही वजह है कि इस कंपनी के गठन से पहले उसने न सिर्फ अपने देश बल्कि स्टैनफोर्ड, तेलंगाना आदि प्रदेश के मॉडल को भी देखा है। उनकी जो भी अच्छी प्रैक्टिस है, एकेटीयू उसे लेने का प्रयास करेगा।
आइडिया लेने को चलेगी वैन
प्रो. गौड़ ने बताया कि जिस तरह अभी एकेटीयू अपने स्टूडेंट्स के अच्छे विचार एकत्र करने के लिए स्टार्टअप परिक्रमा का आयोजन करता है, उसी तरह इस कवायद में बाकायदा एक मोबाइल वैन चलाई जाएगी, जो जगह-जगह जाकर लोगों के अच्छे विचार एकत्र करेगी। इसके बाद एक्सपर्ट की कमेटी इन विचारों का परीक्षण करेगी। चयनित अच्छे विचारों को फिर बाजार तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।
पांच साल में इसमें लगेंगे 811 करोड़ रुपये
प्रो. गौड़ ने बताया कि यह पूरा प्रोजेक्ट पांच साल का 811.52 करोड़ का है। इसमें एकेटीयू 500 करोड़ लगाएगा। जबकि 311 करोड़ इस कंपनी की अपनी कमाई होगी। छह साल में यह कंपनी आत्मनिर्भर होगी। इसमें ओडीओपी को एक क्लस्टर के रूप में जोड़ा जाएगा। साथ ही कालीन, टेराकोटा, एमएसएमई को भी गति देने का काम करेंगे।
एकेटीयू इनोवेशन, इन्क्यूबेशन पर काफी समय से काम कर रहा है, लेकिन अब वह इसे बहुत व्यापक रूप देने में जुट गया है। यही वजह है कि इस कंपनी के गठन से पहले उसने न सिर्फ अपने देश बल्कि स्टैनफोर्ड, तेलंगाना आदि प्रदेश के मॉडल को भी देखा है। उनकी जो भी अच्छी प्रैक्टिस है, एकेटीयू उसे लेने का प्रयास करेगा।
आइडिया लेने को चलेगी वैन
प्रो. गौड़ ने बताया कि जिस तरह अभी एकेटीयू अपने स्टूडेंट्स के अच्छे विचार एकत्र करने के लिए स्टार्टअप परिक्रमा का आयोजन करता है, उसी तरह इस कवायद में बाकायदा एक मोबाइल वैन चलाई जाएगी, जो जगह-जगह जाकर लोगों के अच्छे विचार एकत्र करेगी। इसके बाद एक्सपर्ट की कमेटी इन विचारों का परीक्षण करेगी। चयनित अच्छे विचारों को फिर बाजार तक पहुंचाने का काम किया जाएगा।