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पांच कम्युनिटी सेंटर सौंपे इनके हाथ
ऋषि मिश्र/अमर उजाला, लखनऊ
Updated Thu, 06 Feb 2014 08:20 AM IST
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एलडीए ने कानपुर रोड के पांच कम्युनिटी सेंटरों को 30 लाख रुपये सालाना के एवज में ठेकेदारों के हवाले कर दिया है। वह भी एक-दो साल नहीं पूरे 10 साल के लिए।
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यही नहीं ठेकेदार लोगों से कितना किराया वसूलेगा इसकी सीमा भी नहीं तय की गई। एलडीए कर्मचारी यूनियन ने इस कदम को ठेकेदारों को खुली लूट की छूट देने वाला करार देते हुए इसके जोरदार विरोध का फैसला किया है।
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अभी एक ही साल बीता है जब कम्युनिटी सेंटरों को निजी हाथों से वापस लिया गया था। तब भी ठेकेदार लोगाें से तय शुल्क से ज्यादा वसूल रहे थे।
यहां तक कि लोगों को कैटरिंग और टेंट हाउस का काम भी ठेकेदार की बताई हुई जगहों से कराना पड़ता था।
एलडीए ने 20 दिन पहले ही इसके लिए निविदा मांगी थी।
तेजी के साथ इस पूरी टेंडर प्रक्रिया को निपटाकर कानपुर रोड सेक्टर डी, एफ, जी, एच और मानसरोवर सेक्टर ओ के कम्युनिटी सेंटरों को निजी हाथों को सौैंप दिया गया।
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इसका प्रस्ताव अधिशासी अभियंता संजीव सिन्हा की ओर से रखा गया था। प्रस्ताव में कहा गया था कि, इन कम्युनिटी सेंटरों की हालत ठीक नहीं है। इसलिए इनको संचालन के लिए निजी हाथों में दे देना चाहिए।
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ताकि, प्राधिकरण को एक तय रकम मिलती रहे। एलडीए कर्मचारी यूनियन के संरक्षक अवधेश प्रताप सिंह, अध्यक्ष शिवप्रताव सिंह और महामंत्री दिनेश शुक्ला ने एलडीए के इस कदम पर कड़ा विरोध जताया है।
उनका कहना है कि, प्राधिकरण के कर्मचारी इन कम्युनिटी सेंटरों को संभालने में सक्षम हैं। ठेकेदार तय किराए से अधिक की वसूली करते हैं।
जबकि, बुकिंग पर 80 फीसदी की जो छूट कर्मचारियों को मिलती है, वह भी नहीं दी जाती। जब भी कर्मचारी अपने लिए कम्युनिटी सेंटर मांगते हैं, तो उनको बुकिंग बता दी जाती है।
अवधेश प्रताप सिंह का कहना है, जब कोई किराया एलडीए की ओर से नहीं तय किया जाएगा तो ठेकेदार और भी मनमानी करेगा। इससे जनता और कर्मचारियों दोनों को भारी नुकसान उठाना पड़ेगा।