फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lucknow News ›   Colonies of beggers in city and every colony have one leader

राजधानी में भिखारियों की बसि्तयां... सभी का एक दादा, करता है वसूली और रखता है हिसाब

Tue, 09 Feb 2021 01:50 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 01:50 AM IST
विज्ञापन
Colonies of beggers in city and every colony have one leader
कैंट की डेरा बस्ती में नशा करता दादा। - फोटो : ??? ????? ??????
सुधांशु सक्सेना
विज्ञापन

राजधानी के प्रमुख चौराहों से लेकर मॉल्स व पार्कों के बाहर हाथ फैलाकर दो निवालों के लिए चंद पैसे मांगने वाले भिखारियों की एक अजब दुनिया है।
असंगठित दिखने वाले इन भिखारियों की अपनी बस्ती है और खास नियम-कानून भी। कहीं इनके मुखिया को दादा तो कहीं कप्तान कहा जाता है। बस्तियां अपने मुखिया के इशारे पर ही चलती हैं।
इनकी बस्तियां चिनहट की बलरामनगर, अलीगंज, निशातगंज और सदर की डेरा बस्ती के अलावा शहर के कई अन्य स्थानों पर भी हैं। यही दादा भिखारियों की टोलियां और शिफ्ट बनाते हैं।
विज्ञापन

खास बात यह कि टोलियों का निर्धारण जगह देखकर किया जाता है। जैसे कि धार्मिक स्थल के बाहर महिलाओं व बच्चों की संख्या बढ़ा दी जाती है जबकि पर्यटन स्थलों पर अंग्रेजी बोलने वालों को भेजा जाता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

यही दादा पिक एंड ड्रॉप सर्विस भी संभालते हैं। हर टोली के लिए एक ई-रिक्शा या टेंपो होता है। जब शाम को टोलियां लौटती हैं तो दादा वसूली करते हैं और पूरा ध्यान रखते हैं। पेश है भिखारियों के ‘कारपोरेट कल्चर’ की एक खास रिपोर्ट...
सुबह सात बजते ही निकल पड़ते हैं भिखारी
बलरामनगर स्थित भिखारियों की बस्ती के संकरे रास्ते के मुहाने पर सुबह छह बजते ही टैंपो व ई-रिक्शा खड़े दिखाई देते हैं। पता चला कि ये वाहन भिखारियों को दूरदराज चौराहों तक ले जाने के लिए आए हैं। इसी तरह से अलग-अलग बस्तियों से प्रमुख चौराहों तक भिखारी पहुंचाए जाते हैं और शाम को वापसी भी करते हैं।
अंग्रेजी दिलाती है भीख की मोटी रकम
बलरामनगर बस्ती के भिखारी अतर सिंह ने बताया कि कुछ एनजीओ वाले पढ़ाने आते हैं, उनसे बच्चों को अंग्रेजी सीखने पर जोर दिया जाता है। उनकी बस्ती में करीब 50 घर हैं और आबादी करीब 500 है। इनमें करीब 200 महिलाएं, 150 बच्चे व शेष पुरुष हैं। पुरुष शहर के अलावा अयोध्या, मथुरा, काशी और आगरा जैसे उन शहरों में भी जाते हैं, जहां विदेशी पर्यटकों से मोटी भीख मिलने की उम्मीद रहती है। यहां अंग्रेजी की जरूरत पड़ती है। वहीं, दूसरे भिखारी गोरखनाथ ने बताया कि बस्ती के ज्यादातर पुरुष बाहर गए हैं और दिनभर पर्यटन व धार्मिक स्थलों पर भीख मांगते हैं। सभी त्योहार में लौटेंगे और तब हिसाब होगा। वहीं, शहर में भीख का हिसाब रोज होता है।
हर 15 दिन में बदलती है शिफ्ट
फूलमती ने बताया कि वो पहले पॉलीटेक्निक पर भीख मांगती थीं, अब बटलर चौराहे पर घूम-घूमकर भीख मांगती हैं। बस्ती के बड़े लोग ऐसा करने को कहते हैं क्योंकि एक बार लोग पहचान जाएं तो भीख नहीं देते। वह निशातगंज से बच्चे के साथ ही आती हैं। उसके बेटे ने बताया कि वह सुबह टैंपो से मां संग निकलता है और शाम को बस्ती लौटता है।
कलर टीवी-कूलर व अन्य सामान
सदर इलाके की डेरा बस्ती में इतनी संकरी गलियां हैं कि पैदल चलकर ही निकला जा सकता है। इन गलियों में दिन में नशे करते युवा, बुजुर्ग और ताश खेलते बच्चे दिखे। पूछने पर एक बच्चे ने बताया कि घर भले ही छोटा है, लेकिन कलर टीवी और कूलर है। यही हाल भिखारियों की हर बस्ती का है।
नशे की गिरफ्त में भिखारी
कैंट के सदर इलाके में भिखारियों के मुखिया खुलेआम नशा करते हैं। पुल के नीचे, रेल पटरी के किनारे इन्हें नशे में धुत देखा जा सकता है। ये ज्यादा कमाई के लिए नशे के सौदागरों से भी हाथ मिला लेते हैं।
करते हैं वसूली और रखते हैं ख्याल
डेरा बस्ती के अरशद ने बताया कि बस्ती में शाम को दिनभर मिली भीख का हिसाब लिया जाता है। वहीं जिस घर के पुरुष बाहर भीख मांगने जाते हैं, उनके परिवार की जिम्मेदारी भी दादा संभालते हैं। किसी की तबीयत खराब हो तो इलाज करवाते हैं।
हर बस्ती एक-दूसरे के संपर्क में
भिखारियों की हर बस्ती एक दूसरे से संपर्क में रहती है। इलाके तय रहते हैं और कभी कोई दूसरे के इलाके में नहीं जाता है। भीख की रकम के हिसाब से पूरा नेटवर्क चलता है। जैसे मंदिर के बाहर मंगलवार, शनिवार व बृहस्पतिवार को ज्यादा भीख मिलती है। पॉलीटेक्निक, चारबाग, खम्मनपीर मजार, इमामबाड़ा जैसी जगहों पर भी अधिक भीख मिलती है। यहां बस्ती का मुखिया अपने खास भिखारियों को लगाकर वसूली करता है।

एक बस्ती की रोजाना कमाई 50 हजार तक
एक बस्ती के मुखिया ने बताया कि एक भिखारी रोजाना 800 से एक हजार रुपये तक ले आता है। घर के सदस्यों की संख्या के अनुसार कमाई घटती-बढ़ती रहती है। एक बस्ती औसतन 50 हजार रुपये तक रोज कमा लेती है। कोई बड़ा धार्मिक आयोजन होने पर कमाई बढ़ भी जाती है।

भिखारियों के लाने-ले जाने के लिए है ई-रिक्शा की व्यवस्था।

भिखारियों के लाने-ले जाने के लिए है ई-रिक्शा की व्यवस्था।- फोटो : ??? ?????

चिनहट की बलराम नगर बस्ती में भिखारियों ने बना रखे है आशियाने।

चिनहट की बलराम नगर बस्ती में भिखारियों ने बना रखे है आशियाने।- फोटो : ??? ?????

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed