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यूपी न्यायिक सेवा संघ का सम्मेलन: सीएम योगी हुए शामिल, बोले- सुशासन के लिए न्याय को सुगम और त्वरित बनाना होगा

Sat, 23 Aug 2025 12:33 PM IST
ANI, लखनऊ Published by: भूपेन्द्र सिंह Updated Sat, 23 Aug 2025 12:33 PM IST
सार

यूपी न्यायिक सेवा संघ के सम्मेलन में सीएम योगी शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने कहा कि सुशासन का लक्ष्य पाना है तो न्याय को सुगम और त्वरित बनाना होगा। आगे पढ़ें और जानें पूरी बात...

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CM Yogi said for good governance justice has to be made easy and quick
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ - फोटो : ANI

विस्तार

राजधानी लखनऊ में शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यूपी न्यायिक सेवा संघ के 42वें सम्मेलन में भाग लिया। इस मौके पर उन्होंने न्यायिक सेवा संघ के लिए 50 करोड़ रुपये का कॉर्पस फंड देने की घोषणा की। कहा कि उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ ने 102 वर्षों के अपने इतिहास में अनेक उपलब्धियां हासिल की हैं। 

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इस अवसर पर सीएम ने उपस्थित सभी न्यायमूर्तियों, अवकाश प्राप्त न्यायमूर्तियों और प्रदेश भर से आए न्यायिक अधिकारियों का स्वागत करते हुए कहा कि यह अधिवेशन ऐसे समय में आयोजित हुआ, जब भारत अपने संविधान के अमृत महोत्सव वर्ष में प्रवेश कर चुका है। संविधान की मूल थीम 'न्याय, स्वतंत्रता और बंधुता' इस आयोजन का आधार है। जिस तरह महाकुंभ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक है, उसी तरह यह अधिवेशन न्यायिक अधिकारियों की एकता और उनकी पेशेवर दक्षता को प्रदर्शित करता है।

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न्याय को सुगम और त्वरित बनाना पड़ेगा

अपने संबोधन में सीएम ने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों को एक विकसित भारत के संकल्प के साथ जोड़ा है। हम राज्य में कार्य कर रहे हैं, तो विकसित भारत का विकसित उत्तर प्रदेश बनेगा। हम जनपद में कार्य कर रहे हैं, तो विकसित उत्तर प्रदेश का विकसित जनपद बनेगा। यदि हमें सुशासन के लक्ष्य को प्राप्त करना है तो हमें न्याय को सुगम और त्वरित बनाना पड़ेगा। 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रयागराज में इलाहाबाद उच्च न्यायालय की मुख्य पीठ और लखनऊ में इसकी बेंच प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। सुशासन का लक्ष्य तभी प्राप्त हो सकता है, जब न्यायिक व्यवस्था समयबद्ध, सस्ती और सुलभ हो। उन्होंने बताया कि वर्ष 2024 में जनपद और ट्रायल कोर्ट में 72 लाख मामलों का निस्तारण हुआ, जो एक बड़ी उपलब्धि है। हमारी गति जितनी तेज होगी, आम जनमानस में विश्वास उतना ही मजबूत होगा। इसके लिए सरकार हर स्तर पर सहयोग करने को तैयार है।

न्याय प्रक्रिया को और तेज करने की योजना

सीएम ने नए आपराधिक कानूनों, भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू होने का उल्लेख किया। जो 1 जुलाई 2024 से प्रभावी हुए। प्रारंभिक आशंकाओं के बावजूद, न्यायिक अधिकारियों ने इन्हें तत्परता से लागू किया। इससे ये कानून दंड पर आधारित न होकर न्याय की सुदृढ़ व्यवस्था पर केंद्रित साबित हुए। 

सीएम ने कहा कि डिजिटल बुनियादी ढांचे और आधुनिक तकनीक को न्यायिक व्यवस्था में शामिल करने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। ई-कोर्ट, ई-पुलिसिंग, ई-प्रिजन, ई-प्रॉसीक्यूशन और ई-फोरेंसिक के एकीकरण के लिए इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम पर काम चल रहा है। डेटा-बेस्ड विश्लेषण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के उपयोग से लंबित मामलों को कम करने और न्याय प्रक्रिया को तेज करने की योजना है।

इस मौके पर ये लोग मौजूद रहे

इस दौरान मुख्य न्यायाधीश इलाहाबाद हाईकोर्ट न्यायमूर्ति अरुण भंसाली, न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता, न्यायमूर्ति राजन राय, न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान, उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा संघ के रणधीर सिंह, सभी जनपदों के न्यायाधीश समेत अवकाश प्राप्त न्यायमूर्ति गण व कई न्यायिक अधिकारीगण मौजूद रहे। 

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