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योगी ने विपक्ष पर किया जमकर हमला, बोले- कृषि कानूनों से विपक्षी दलों के नेताओं की दलाली हुई बंद

Fri, 19 Feb 2021 08:30 PM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Published by: Vikas Kumar Updated Fri, 19 Feb 2021 08:30 PM IST
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cm yogi adityanath attack on opposition parties over farm laws during up budget session
योगी आदित्यनाथ - फोटो : अमर उजाला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कृषि कानूनों से अन्नदाता किसान को ना परेशानी है ना कोई चिंता है। बल्कि विपक्षी दलों उन मित्रों को परेशानी और चिंता है जिनकी दलाली का पैसा अब सीधे किसानों के बैंक खाते में जमा हो रहा है। शुक्रवार को विधानसभा में नियम 56 के तहत किसान आंदोलन पर सपा, बसपा और कांग्रेस के आरोपों के जवाब में मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर जमकर निशाना साधा। 

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में पहले गन्ना पर्ची, खांडसारी लाइसेंस में उगाही होती थी और चीनी मिलों में खेल चलता था। लेकिन अब  गन्ना पर्ची भी सीधे किसान के स्मार्ट फोन पर मिल रही है, खांडसारी लाइसेंस ऑनलाइन और फ्री हो गया है। उन्होंने कहा कि किसानों की आड़ में कमाई के खेल में रमे हुए विपक्ष के मित्रों की कमाई का जरिया अब बंद हो गया है तो वे अपनी खीज को उतारने का प्रयास कर रहे हैं। 
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मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों के हित के लिए समर्थित भावना से काम करेगी। यदि कहीं कोई असमंजस होगा तो समन्वय से उसे दूर कर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए कहीं कोई प्रतिबंध नहीं है। लेकिन कानून में हाथ लेकर आगजनी, तोड़फोड़ और संवैधानिक प्रतीकों का अपमान करने और प्रदेश की 24 करोड़ जनता की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की छूट सरकार नहीं देगी।
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विधानसभा में विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों की किसानों के साथ सद्भावना नहीं बल्कि दुर्भावना है। उन्होंने कहा कि कृषि कानून में एपीएमसी एक्ट  मंडी की बाध्यता को समाप्त करता है। किसान की अपनी मर्जी से अपनी उपज को कहीं भी बेच सकता है। उसे जहां अच्छा दाम मिलेगा वहां फसल बेच सकता है। लेकिन बीच के दलालों को बुरा लग रहा है, यह लाभ किसानों को देने का प्रयास क्यों हो रहा है। कृषि कानून ने किसानों को सुरक्षा और संरक्षण दिया है, यही विपक्षी दलों को बुरा लग रहा है, इसलिए वाकआउट कर चले गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि विपक्षी दलों के नेता तो किसानों के खिलाफ काम करने वाली फील्ड के खिलाड़ी है। सपा बसपा की सरकारों ने किसानों की क्षति की है, किसी ने चीनी मिलें बेची थीं, कभी खरीद केंद्र नहीं चलाए गए। उन्होंने कहा कि विपक्षी दलों ने किसानों के हितों पर डकैती डालने का प्रयास किया। उनकी सरकार के समय किसानों पर जुल्म ढहाए और सालों तक गन्ना किसानों का हजारों क रोड़ रुपये गन्ना मूल्य बकाया रखा।

योगी ने कहा कि देश के किसानों को वास्तव में न्यूनतम समर्थन मूल्य प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में फसल खरीद की योजना उनकी सरकार 2017 में लेकर आई। 2003 से 2017 के बीच में तीन से छह लाख क्विंटल धान खरीद होती थी। जबकि इस साल कोरोना के बावजूद 66 लाख टन धान की एमएसपी के आधार पर की गई है। कोरोना में गेहूं की फसल खरीद के लिए केंद्र बनाए गए। किसी भी किसान को निराश नहीं होने दिया। पिछले पौने चार साल में जितनी फसल खरीद हुई है उतनी पहले सपा, बसपा की सरकार में कभी नहीं हुआ है। 


मुख्यमंत्री ने कहा कि लॉकडाउन में जब महाराष्ट्र, कर्नाटक में चीनी मिलें बंद हो गई थीं तब यूपी में 119 चीनी मिलों को संचालित किया गया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों को 1.23 लाख करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान कराया है।  2004 से 2014 के बीच हुए गन्ना मूल्य भुगतान को जोड़ लिया जाए तो उन 13-14 वर्षों में जितना भुगतान नहीं हुआ उतना भुगतान पिछले साढ़े तीन सालो में हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार केंद्र  सरकार के समन्वय से किसानों, नौजवानों, महिलाओं, मजदूरों, व्यापारियों के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।

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